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निजी अस्पताल में भी बन सकेंगे जन्म प्रमाण पत्र
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पीलीभीत। शहर के किसी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में आपके बच्चे का जन्म होता है तो वहां से भी नवजात का जन्म प्रमाण पत्र बनवाया जा सकेगा। नगरपालिका और स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 30 निजी अस्पतालों को सुविधा प्रदान की है। इन सभी में प्रसव कराए जाते हैं। इन अस्पतालों को यूजर आईडी और पासवर्ड मुहैया करा दिया गया है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एवं नगरपालिका द्वारा संयुक्त रूप से जन्म मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत यह प्रावधान किया गया है। जिले में करीब 65 निजी अस्पताल संचालित हैं। इसमें करीब 30 ऐसे हैं जहां प्रसव कराया जाता है। अभी तक नवजात का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नगरपालिका के चक्कर लगाने पड़ते थे। मगर अब नगरपालिका और स्वास्थ्य विभाग ने शासन के निर्देश पर निजी अस्पतालों को जन्म या मृत्यु प्रमाण जारी करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। इन निजी अस्पतालों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। उन्हें साइट पर कैसे काम करना है, इसकी बखूबी जानकारी दी गई है। 30 निजी अस्पतालों को यूजर आईडी और पासवर्ड जारी कर दिए गए। अब वह अपने अस्पतालों में होने वाले प्रसव के बाद प्रमाण पत्र बना सकेंगे। इसके लिए लोगों को नगरपालिका कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
घर और एंबुलेंस में होने वाले बच्चों का भी होगा प्रमाण पत्र जारी
घर और एंबुलेंस में होने वाले प्रसव का भी प्रमाण पत्र जारी होगा। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि अगर किसी बच्चे का जन्म घर पर ही हो रहा है, तो आशा के माध्यम से इसकी जानकारी संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दी जाएगी। उसी आधार पर जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा। वहीं अगर किसी बच्चे का जन्म एंबुलेंस में होता है तो एंबुलेंस के ड्राइवर या आशा की ओर दी गई सूचना के आधार पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है।
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इस तरह होगी प्रक्रिया
निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में बच्चे का जन्म या मृत्यु हो जाने पर 21 दिन के अंदर उसी अस्पताल के द्वारा जन्म या मृत्यु का फॉर्म पर ऑनलाइन भरना होगा। इसे सबमिट करते ही ऑनलाइन फॉर्म नगरपालिका की वेबसाइट पर आ जाएगा। उसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 21 दिन का समय बीतने पर ऑफलाइन आवेदन करना होगा।
अब नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले निजी अस्पताल जहां प्रसव कराया जाता है। उन अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जन्म मृृत्यु प्रमाण पत्र के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया है। वह 21 दिन के अंदर प्रक्रिया को पूरा कर आवेदन को ऑनलाइन करेंगे। अगर किसी तरह की दिक्कत आती है। तो वह विभाग से संपर्क करें। - डॉ. हरपाल सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एवं नगरपालिका द्वारा संयुक्त रूप से जन्म मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत यह प्रावधान किया गया है। जिले में करीब 65 निजी अस्पताल संचालित हैं। इसमें करीब 30 ऐसे हैं जहां प्रसव कराया जाता है। अभी तक नवजात का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नगरपालिका के चक्कर लगाने पड़ते थे। मगर अब नगरपालिका और स्वास्थ्य विभाग ने शासन के निर्देश पर निजी अस्पतालों को जन्म या मृत्यु प्रमाण जारी करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। इन निजी अस्पतालों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। उन्हें साइट पर कैसे काम करना है, इसकी बखूबी जानकारी दी गई है। 30 निजी अस्पतालों को यूजर आईडी और पासवर्ड जारी कर दिए गए। अब वह अपने अस्पतालों में होने वाले प्रसव के बाद प्रमाण पत्र बना सकेंगे। इसके लिए लोगों को नगरपालिका कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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घर और एंबुलेंस में होने वाले बच्चों का भी होगा प्रमाण पत्र जारी
घर और एंबुलेंस में होने वाले प्रसव का भी प्रमाण पत्र जारी होगा। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि अगर किसी बच्चे का जन्म घर पर ही हो रहा है, तो आशा के माध्यम से इसकी जानकारी संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दी जाएगी। उसी आधार पर जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा। वहीं अगर किसी बच्चे का जन्म एंबुलेंस में होता है तो एंबुलेंस के ड्राइवर या आशा की ओर दी गई सूचना के आधार पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है।
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इस तरह होगी प्रक्रिया
निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में बच्चे का जन्म या मृत्यु हो जाने पर 21 दिन के अंदर उसी अस्पताल के द्वारा जन्म या मृत्यु का फॉर्म पर ऑनलाइन भरना होगा। इसे सबमिट करते ही ऑनलाइन फॉर्म नगरपालिका की वेबसाइट पर आ जाएगा। उसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 21 दिन का समय बीतने पर ऑफलाइन आवेदन करना होगा।
अब नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले निजी अस्पताल जहां प्रसव कराया जाता है। उन अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जन्म मृृत्यु प्रमाण पत्र के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया है। वह 21 दिन के अंदर प्रक्रिया को पूरा कर आवेदन को ऑनलाइन करेंगे। अगर किसी तरह की दिक्कत आती है। तो वह विभाग से संपर्क करें। - डॉ. हरपाल सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी