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बंद ओपीडी में डंप लाखों की दवाईयां, कई पर एक्सपायरी का खतरा
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पीलीभीत। कोरोना काल में जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी-पीएचसी की भी ओपीडी बंद थी। उस वजह से सरकारी स्टोरों से दवाओं का वितरण नाम मात्र का हो पाया। अब इसके परिणाम सामने दिखाई देने लगे हैं। जिला अस्पताल समेत सीएचसी-पीएचसी में लाखों रुपये की दवाएं एक्सपायर होने कगार पर हैं। एक से डेढ़ माह के अंदर इन दवाइयों का वितरण नहीं किया गया तो यह एक्सपायर हो सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग ऐसी दवाइयों की सूची बना रहा है, जो एक्सपायरी डेट के करीब हैं। ओपीडी खुलने के बाद अधिकतर ऐसी दवाइयों को सीएससी पीएससी भेजा गया है, जो एक्सपायर होने के कगार पर हैं। लॉकडाउन से अब तक करीब दो लाख रुपये की दवाइयां एक्सपायर हो भी चुकी हैं।
कोरोना संक्रमण पर काबू के लिए मार्च के तीसरे हफ्ते में पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। उसमें सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की ओपीडी सेवाएं भी बंद हो गईं। अगस्त में अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं दोबारा शुरू हो सकीं। सामान्य दिनों में जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1200 मरीज दवाईयां लेने आते थे। इसके अलावा जिला महिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी पर भी मरीजों की लाइन लगती थी। लॉकडाउन में मरीज आने बंद हो गए। ऐसे में पहले से जमा दवाओं का वितरण नहीं हो पाया। सरकारी अस्पतालों को दवाईयों की सप्लाई यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन करता है। कई बार कॉरपोरेशन मांग से ज्यादा दवाएं या फिर ऐसी दवाओं की सप्लाई कर देता है, जिनकी खपत काफी कम है। लॉकडाउन में ओपीडी बंद रहने से पहले से स्टोर में रखीं तमाम दवाएं एक्सपायर हो गईं तो कुछ दवाएं एक्सपायर होने के कगार पर हैं। जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी-पीएचसी में ऐसी दवाओं की सूची तैयार कराई जाने लगी हैं, जो एक्सपायर हो चुकी हैं या फिर उनकी एक्सपायरी डेट काफी नजदीक है। दरअसल, अस्पतालों में छह माह की दवाओं का ही स्टॉक रखा जाता है। अस्पतालों में कार्यरत फार्मासिस्ट का कहना है कि लॉकडाउन से अब तक लगभग दो लाख रुपये की दवाएं खराब हो चुकी हैं। कुुुछ दवाईयों की एक्सपायरी डेट बिल्कुल नजदीक है। उनकी सूची बनाई जा रही है। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल के स्टोरों में दवा एक्सपायर होने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। ओपीडी बंद होने से कुछ दवाईयां एक्सपायर हुई होंगी। सूची बनाकर ऐसी दवाइयों को डिस्पोज किया जाएगा। ओपीडी खुलने के बाद मरीजों को दवाइयों का वितरण शुरू हो चुका है। किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है।
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कोरोना संक्रमण पर काबू के लिए मार्च के तीसरे हफ्ते में पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। उसमें सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की ओपीडी सेवाएं भी बंद हो गईं। अगस्त में अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं दोबारा शुरू हो सकीं। सामान्य दिनों में जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1200 मरीज दवाईयां लेने आते थे। इसके अलावा जिला महिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी पर भी मरीजों की लाइन लगती थी। लॉकडाउन में मरीज आने बंद हो गए। ऐसे में पहले से जमा दवाओं का वितरण नहीं हो पाया। सरकारी अस्पतालों को दवाईयों की सप्लाई यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन करता है। कई बार कॉरपोरेशन मांग से ज्यादा दवाएं या फिर ऐसी दवाओं की सप्लाई कर देता है, जिनकी खपत काफी कम है। लॉकडाउन में ओपीडी बंद रहने से पहले से स्टोर में रखीं तमाम दवाएं एक्सपायर हो गईं तो कुछ दवाएं एक्सपायर होने के कगार पर हैं। जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी-पीएचसी में ऐसी दवाओं की सूची तैयार कराई जाने लगी हैं, जो एक्सपायर हो चुकी हैं या फिर उनकी एक्सपायरी डेट काफी नजदीक है। दरअसल, अस्पतालों में छह माह की दवाओं का ही स्टॉक रखा जाता है। अस्पतालों में कार्यरत फार्मासिस्ट का कहना है कि लॉकडाउन से अब तक लगभग दो लाख रुपये की दवाएं खराब हो चुकी हैं। कुुुछ दवाईयों की एक्सपायरी डेट बिल्कुल नजदीक है। उनकी सूची बनाई जा रही है। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल के स्टोरों में दवा एक्सपायर होने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। ओपीडी बंद होने से कुछ दवाईयां एक्सपायर हुई होंगी। सूची बनाकर ऐसी दवाइयों को डिस्पोज किया जाएगा। ओपीडी खुलने के बाद मरीजों को दवाइयों का वितरण शुरू हो चुका है। किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है।
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