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कुछ को मिली नई जिंदगी पर वेटिंग लिस्ट पड़ी कई पर भारी
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पीलीभीत। एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत आरबीएसके टीम की ओर से स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के अंतर्गत गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज और अन्य बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है। योजना के तहत जहां कई को नई जिंदगी मिली है वहीं, मेडिकल कॉलेज और अन्य बड़े अस्पतालों में लंबी वेटिंग लिस्ट कई लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में चिह्नित जहां दस हजार बच्चों को इलाज नसीब नहीं हुआ, वहीं वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी करीब तीन हजार बच्चों में से करीब एक हजार बच्चों का इलाज नहीं हो पाया है। इनका वेटिंग लिस्ट में नंबर है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शासन के समक्ष इस मुद्देे को उठा चुके हैं। डीईआईसी प्रबंधक मो. जुबेर ने बताया कि पिछले वर्ष 46,328 बच्चे चिह्नित किए किए गए, इनमें गंभीर बीमारियों से पीड़ित करीब चौदह हजार बच्चों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज और अन्य बड़े अस्पतालों में भेजा गया था। इसमें कई बच्चों को इलाज कर उन्हें नई जिंदगी दी जा चुकी है। शासकीय धन पर इनका नि:शुल्क इलाज कराया गया है। इसमें दिल तक के आपरेशन हुए हैं।
अधिकतर में मिलती है कुपोषण और खून की कमी की शिकायत
आरबीएसके टीम की ओर से किए गए निरीक्षण में अधिकतर बच्चों में कुपोषण, वजन की कमी और खून की कमी की शिकायतें मिलती हैं। इन बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही इलाज करा दिया जाता है। हार्ट डिजीस, न्यूरो, स्किन, हार्मोन्स डिसआर्डर, स्केबीज, कटे होठ, पैरों और आंखों में टेढ़ापन जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को बाहर इलाज के लिए भेजा जाता है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भारी भीड़ की वजह से बच्चों को इलाज के लिए लंबी डेट मिल रही है। इस बारे में शासन के समक्ष भी मुद्दा उठाया गया है। शासन से समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया है।
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- डॉ. अश्वनि गुप्ता, नोडल अधिकारी आरबीएसके
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अधिकतर में मिलती है कुपोषण और खून की कमी की शिकायत
आरबीएसके टीम की ओर से किए गए निरीक्षण में अधिकतर बच्चों में कुपोषण, वजन की कमी और खून की कमी की शिकायतें मिलती हैं। इन बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही इलाज करा दिया जाता है। हार्ट डिजीस, न्यूरो, स्किन, हार्मोन्स डिसआर्डर, स्केबीज, कटे होठ, पैरों और आंखों में टेढ़ापन जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को बाहर इलाज के लिए भेजा जाता है।
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भारी भीड़ की वजह से बच्चों को इलाज के लिए लंबी डेट मिल रही है। इस बारे में शासन के समक्ष भी मुद्दा उठाया गया है। शासन से समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया है।
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- डॉ. अश्वनि गुप्ता, नोडल अधिकारी आरबीएसके