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आईएमए की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी
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पीलीभीत। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) विधेयक पास होने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की हड़ताल के चलते बुधवार को स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गईं। आईएमए से जुड़े निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर बंद रहे। केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रहीं। ओपीडी बंद रहने से मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा।
बुधवार को हड़ताल के चलते आईएमए डॉक्टरों ने ओपीडी व डायग्नोस्टिक सेवाओं को पूरी तरह से बंद रखा। इसके बाद एक बैठक हुई, जिसमें आईएमए सचिव डॉ. दीपक गंगवार ने बिल को अप्रजातांत्रिक बताया और कहा कि बिल स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा को अंधकार में खींचने का काम करेगा। बिल में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को असीम सुविधाएं दी गई हैं। बिल के सेक्शन 32 के तहत 3.5 लाख नॉन मेडिकल लोगों को लाइसेंस देकर सभी प्रकार की दवाइयां लिखने और इलाज करने का कानूनी अधिकार दिया जा रहा है, जो एक तरीके से झोलाछाप को वैद्यता प्रदान कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने जैसा है। सरकार को चेतावनी दी कि अगर डॉक्टरों की मांगें न मानी गईं तो इमरजेंसी सेवाएं भी ठप कर दी जाएंगी। डॉ. पीडी सिंह ने एनएमसी बिल को चिकित्सक विरोधी बताया और कहा कि भविष्य में इसके कारण भ्रष्टाचार बढ़ेगा। डॉ. ज्ञान प्रकाश ने कहा कि एनएमसी विधेयक को लेकर हम लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछली बार जब सदन में विधेयक पास हुआ था तब आईएमए के विरोध पर सरकार ने संशोधन का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में सरकार ने उन्हीं नियमों को लागू कर दिया। इस बिल से अब नीम हकीम भी डॉक्टर बन जाएंगे। बैठक में डॉ. एचसी सचान, डॉ. मधु सचान, डॉ. अमित सचान, डॉ. प्रियंका, डॉ. शिल्पी, डॉ. सुमित, डॉ. पीएन सक्सेना, डॉ. एसके मित्रा, डॉ. बीदास, डॉ. एमके पांडे, डॉ. एन तिवारी, डॉ. एसआर गुप्ता, डॉ. सतीश चंद्र गंगवार, डॉ. उपेंद्रनाथ मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
ओपीडी बंद होने से भटके मरीज
जिले में आईएमए से जुड़े करीब 90 डॉक्टर हैं। आईएमए डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दूर दराज से शहर पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बुधवार सुबह से ही अस्पतालों के सामने मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। बाद में जब हड़ताल के चलते ओपीडी सेवा बंद होने की उन्हें जानकारी हुई तो वे लौट गए।
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बुधवार को हड़ताल के चलते आईएमए डॉक्टरों ने ओपीडी व डायग्नोस्टिक सेवाओं को पूरी तरह से बंद रखा। इसके बाद एक बैठक हुई, जिसमें आईएमए सचिव डॉ. दीपक गंगवार ने बिल को अप्रजातांत्रिक बताया और कहा कि बिल स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा को अंधकार में खींचने का काम करेगा। बिल में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को असीम सुविधाएं दी गई हैं। बिल के सेक्शन 32 के तहत 3.5 लाख नॉन मेडिकल लोगों को लाइसेंस देकर सभी प्रकार की दवाइयां लिखने और इलाज करने का कानूनी अधिकार दिया जा रहा है, जो एक तरीके से झोलाछाप को वैद्यता प्रदान कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने जैसा है। सरकार को चेतावनी दी कि अगर डॉक्टरों की मांगें न मानी गईं तो इमरजेंसी सेवाएं भी ठप कर दी जाएंगी। डॉ. पीडी सिंह ने एनएमसी बिल को चिकित्सक विरोधी बताया और कहा कि भविष्य में इसके कारण भ्रष्टाचार बढ़ेगा। डॉ. ज्ञान प्रकाश ने कहा कि एनएमसी विधेयक को लेकर हम लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछली बार जब सदन में विधेयक पास हुआ था तब आईएमए के विरोध पर सरकार ने संशोधन का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में सरकार ने उन्हीं नियमों को लागू कर दिया। इस बिल से अब नीम हकीम भी डॉक्टर बन जाएंगे। बैठक में डॉ. एचसी सचान, डॉ. मधु सचान, डॉ. अमित सचान, डॉ. प्रियंका, डॉ. शिल्पी, डॉ. सुमित, डॉ. पीएन सक्सेना, डॉ. एसके मित्रा, डॉ. बीदास, डॉ. एमके पांडे, डॉ. एन तिवारी, डॉ. एसआर गुप्ता, डॉ. सतीश चंद्र गंगवार, डॉ. उपेंद्रनाथ मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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ओपीडी बंद होने से भटके मरीज
जिले में आईएमए से जुड़े करीब 90 डॉक्टर हैं। आईएमए डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दूर दराज से शहर पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बुधवार सुबह से ही अस्पतालों के सामने मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। बाद में जब हड़ताल के चलते ओपीडी सेवा बंद होने की उन्हें जानकारी हुई तो वे लौट गए।
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