{"_id":"60b67e5b8ebc3e6e8d211e19","slug":"health-issue-pilibhit-news-bly448412623","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला पड़तालः डेढ़ माह में बुखार से नौ की मौत, स्वास्थ्य विभाग बता रहा तीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला पड़तालः डेढ़ माह में बुखार से नौ की मौत, स्वास्थ्य विभाग बता रहा तीन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीसलपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरखेड़ा से संबद्ध गांव नरायनपुर में पिछले लगभग डेढ़ माह में तेज बुखार से नौ लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने केवल तीन मौतें दूसरी बीमारियों से होने की पुष्टि की है।
गांव नरायनपुर के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में माह अप्रैल के अंतिम सप्ताह में तेज बुखार का प्रकोप शुरू हो गया था। ग्रामीणों ने उसी समय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचित कर इलाज करानेे की मांग की, मगर अधिकारियों ने ग्रामीणों की बात को हवा में उड़ा दिया। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई राहत मिली न देख मरीजों ने झोलाछापों से इलाज करवाना शुरू कर दिया। इसके बाद तेज बुखार ने तेजी से पैर पसारने शुरू कर दिए और लोगों के मरने का सिलसिला जारी हो गया। इस दौरान 70 वर्षीय विष देवी पत्नी रामभरोसे गंगवार, 69 वर्षीय कमरुद्दीन पुत्र रमजानी, 70 वर्षीय किशनलाल मौर्य पुत्र रेवाराम, 59 वर्षीय फूलमती पत्नी लालचंद मौर्य, 70 वर्षीय होरीलाल मौर्य पुत्र खियोराज, 80 वर्षीय नत्थूलाल पुत्र हीरालाल राना, 18 वर्षीय सोनी पुत्री श्रीपाल गुप्ता और 50 वर्षीय ओमकार गंगवार पुत्र नन्हेंलाल की मौत हो गई। नौ मौतें होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी ने गांव में पहुंचकर हाल जानने की जहमत नहीं उठाई। विभाग ने केवल आशा और एएनएम को भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।
अधिकारियों को समय पर दे दी थी सूचना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन पर सूचना दे दी थी, लेकिन अधिकारियों ने सूचना को हलके में लिया। जिससे गांव में स्थिति बदतर हो गई और नौ लोगों की मौत हो गई। - श्यामाचरन गंगवार, ग्रामीण
विज्ञापन
शिविर लगता तो शायद नहीं होती नौ मौतें
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को गांव में शिविर लगाकर मरीजों का सही समय पर इलाज करना चाहिए था। यदि ऐसा हो जाता तो इतने लोगों की मौतें नहीं होती। स्थिति काफी बिगड़ गई है। - राकेश मिश्रा, ग्रामीण
एक अदद डाक्टर तक नहीं पहुंचा गांव
नौ लोगों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों ने गांव में एक डाक्टर तक भेजने की आवश्यकता महसूस नहीं की। केवल एएनएम और आशा वर्कर को गांव में भेजकर औपचारिकता निभाई। - डालचंद्र ग्रामीण
मौतों के लिए अधिकारी जिम्मेदार
मेरा गांव बरखेड़ा से मात्र पांच किलोमीटर दूरी पर है, फिर भी सीएचसी के डॉक्टरों ने पूरा मामला संज्ञान में आने के बावजूद गांव की ओर रुख नहीं किया और एक-एक कर नौ लोगों की जान चली गई। - इतवारी लाल ग्रामीण
तेज बुखार से नहीं हुई किसी की मौत
टीम द्वारा कराई गई जांच में पता चला कि नरायनपुर में केवल तीन लोगों की मौत हुई है। मृतक विष देवी और कमरुद्दीन काफी ज्यादा उम्र के थे। उनकी स्वाभाविक मौत हुई है। 55 वर्षीय ओमकार की हार्ट अटैक से मौत हुई है। किसी की भी तेज बुखार से मौत नहीं हुई। सीएचसी में डॉक्टरों की काफी कमी है, जिसके कारण हर जगह डॉक्टरों का भेजा जाना संभव नहीं है। - डॉ. एसके सिंह, एमओआईसी सीएचसी बरखेड़ा
विज्ञापन
गांव नरायनपुर के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में माह अप्रैल के अंतिम सप्ताह में तेज बुखार का प्रकोप शुरू हो गया था। ग्रामीणों ने उसी समय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचित कर इलाज करानेे की मांग की, मगर अधिकारियों ने ग्रामीणों की बात को हवा में उड़ा दिया। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई राहत मिली न देख मरीजों ने झोलाछापों से इलाज करवाना शुरू कर दिया। इसके बाद तेज बुखार ने तेजी से पैर पसारने शुरू कर दिए और लोगों के मरने का सिलसिला जारी हो गया। इस दौरान 70 वर्षीय विष देवी पत्नी रामभरोसे गंगवार, 69 वर्षीय कमरुद्दीन पुत्र रमजानी, 70 वर्षीय किशनलाल मौर्य पुत्र रेवाराम, 59 वर्षीय फूलमती पत्नी लालचंद मौर्य, 70 वर्षीय होरीलाल मौर्य पुत्र खियोराज, 80 वर्षीय नत्थूलाल पुत्र हीरालाल राना, 18 वर्षीय सोनी पुत्री श्रीपाल गुप्ता और 50 वर्षीय ओमकार गंगवार पुत्र नन्हेंलाल की मौत हो गई। नौ मौतें होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी ने गांव में पहुंचकर हाल जानने की जहमत नहीं उठाई। विभाग ने केवल आशा और एएनएम को भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।
विज्ञापन
अधिकारियों को समय पर दे दी थी सूचना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन पर सूचना दे दी थी, लेकिन अधिकारियों ने सूचना को हलके में लिया। जिससे गांव में स्थिति बदतर हो गई और नौ लोगों की मौत हो गई। - श्यामाचरन गंगवार, ग्रामीण
विज्ञापन
शिविर लगता तो शायद नहीं होती नौ मौतें
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को गांव में शिविर लगाकर मरीजों का सही समय पर इलाज करना चाहिए था। यदि ऐसा हो जाता तो इतने लोगों की मौतें नहीं होती। स्थिति काफी बिगड़ गई है। - राकेश मिश्रा, ग्रामीण
एक अदद डाक्टर तक नहीं पहुंचा गांव
नौ लोगों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों ने गांव में एक डाक्टर तक भेजने की आवश्यकता महसूस नहीं की। केवल एएनएम और आशा वर्कर को गांव में भेजकर औपचारिकता निभाई। - डालचंद्र ग्रामीण
मौतों के लिए अधिकारी जिम्मेदार
मेरा गांव बरखेड़ा से मात्र पांच किलोमीटर दूरी पर है, फिर भी सीएचसी के डॉक्टरों ने पूरा मामला संज्ञान में आने के बावजूद गांव की ओर रुख नहीं किया और एक-एक कर नौ लोगों की जान चली गई। - इतवारी लाल ग्रामीण
तेज बुखार से नहीं हुई किसी की मौत
टीम द्वारा कराई गई जांच में पता चला कि नरायनपुर में केवल तीन लोगों की मौत हुई है। मृतक विष देवी और कमरुद्दीन काफी ज्यादा उम्र के थे। उनकी स्वाभाविक मौत हुई है। 55 वर्षीय ओमकार की हार्ट अटैक से मौत हुई है। किसी की भी तेज बुखार से मौत नहीं हुई। सीएचसी में डॉक्टरों की काफी कमी है, जिसके कारण हर जगह डॉक्टरों का भेजा जाना संभव नहीं है। - डॉ. एसके सिंह, एमओआईसी सीएचसी बरखेड़ा