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आधा बजट भी खर्च नहीं कर सका सेहत महकमा
पीलीभीत।
Updated Tue, 17 Mar 2015 11:25 PM IST
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सेहत महकमा जरूरतमंदों
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को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में तो पीछे रहा ही, साथ ही सरकारी बजट
को भी खर्च करने में फिसड्डी साबित हुआ। चालू वित्तीय वर्ष में महकमा कुल
बजट का करीब 31 प्रतिशत ही धन खर्च कर सका। इस कारण करीब साढ़े दस 10 करोड़
रुपये विभाग के पास बच गए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की धनराशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को दी जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा यह धनराशि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को संचालित करने को दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में स्वास्थ्य विभाग को 15.38 लाख रुपये का बजट मिला।
इसमें आरसीएच के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की ट्रेनिंग व प्रशिक्षण के लिए 6.70 करोड़ बजट जारी किया गया था, लेकिन महकमा खर्च कुल 1.40 करोड़ रुपये ही कर सका। इसी तरह जिला स्वास्थ्य समिति के लिए मिले 3.62 करोड़, नियमित टीकाकरण को 64 लाख, पल्स पोलियो के लिए 10.5 करोड़, आईडीएसपी (नई बीमारियों के सर्वे के लिए) के लिए 1.77 लाख, एनएलईपी (कुष्ठरोग से बचाव) के लिए 9.71 लाख, आरएनटीसीपी (क्षय रोग निवारण) के लिए 71.35 लाख का बजट स्वीकृत हुआ था।
50 फीसदी भी पार नहीं कर पाई कोई योजना
बजट में मिले आरसीएच मद में कुल धनराशि का 16.5 प्रतिशत, टीकाकरण में 12, पल्स पोलियो में 31, आईडीएसपी में 11.33, आरएनटीसीपी में 33 प्रतिशत ही बजट खर्च किया जा सका। अन्य योजनाओं में भी खर्च की स्थिति कमावेश ऐसी ही रही।
पिछली बार से 35 प्रतिशत कम मिली धनराशि
वित्तीय वर्ष 2013-14 में विभाग को 23.72 करोड़ रुपये का बजट प्राप्त हुआ था, जबकि इस बार मात्र 15.38 करोड़ रुपये का बजट ही मिल सका। कम बजट मिलने के बाद भी विभाग साल भर में इसे खर्च नहीं कर सका।
कब कितना मिला बजट
वर्ष 2008-09 07.00 करोड़
वर्ष 2009-10 08.82 करोड़
वर्ष 2010-11 12.00 करोड़
वर्ष 2011-12 16.88 करोड़
वर्ष 2012-13 26.10 करोड़
वर्ष 2013-14 23.72 करोड़
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स्वास्थ्य विभाग की कार्ययोजना अमूमन हर साल जून-जुलाई में आती है, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में पीआईपी दिसंबर माह के बाद प्राप्त हुई। जिसकी वजह से कुछ योजनाएं देरी से संचालित होने के कारण बजट खर्च नहीं हो सका है।
डॉ. ओम चौहान, प्रभारी सीएमओ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की धनराशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को दी जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा यह धनराशि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को संचालित करने को दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में स्वास्थ्य विभाग को 15.38 लाख रुपये का बजट मिला।
इसमें आरसीएच के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की ट्रेनिंग व प्रशिक्षण के लिए 6.70 करोड़ बजट जारी किया गया था, लेकिन महकमा खर्च कुल 1.40 करोड़ रुपये ही कर सका। इसी तरह जिला स्वास्थ्य समिति के लिए मिले 3.62 करोड़, नियमित टीकाकरण को 64 लाख, पल्स पोलियो के लिए 10.5 करोड़, आईडीएसपी (नई बीमारियों के सर्वे के लिए) के लिए 1.77 लाख, एनएलईपी (कुष्ठरोग से बचाव) के लिए 9.71 लाख, आरएनटीसीपी (क्षय रोग निवारण) के लिए 71.35 लाख का बजट स्वीकृत हुआ था।
50 फीसदी भी पार नहीं कर पाई कोई योजना
बजट में मिले आरसीएच मद में कुल धनराशि का 16.5 प्रतिशत, टीकाकरण में 12, पल्स पोलियो में 31, आईडीएसपी में 11.33, आरएनटीसीपी में 33 प्रतिशत ही बजट खर्च किया जा सका। अन्य योजनाओं में भी खर्च की स्थिति कमावेश ऐसी ही रही।
पिछली बार से 35 प्रतिशत कम मिली धनराशि
वित्तीय वर्ष 2013-14 में विभाग को 23.72 करोड़ रुपये का बजट प्राप्त हुआ था, जबकि इस बार मात्र 15.38 करोड़ रुपये का बजट ही मिल सका। कम बजट मिलने के बाद भी विभाग साल भर में इसे खर्च नहीं कर सका।
कब कितना मिला बजट
वर्ष 2008-09 07.00 करोड़
वर्ष 2009-10 08.82 करोड़
वर्ष 2010-11 12.00 करोड़
वर्ष 2011-12 16.88 करोड़
वर्ष 2012-13 26.10 करोड़
वर्ष 2013-14 23.72 करोड़
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स्वास्थ्य विभाग की कार्ययोजना अमूमन हर साल जून-जुलाई में आती है, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में पीआईपी दिसंबर माह के बाद प्राप्त हुई। जिसकी वजह से कुछ योजनाएं देरी से संचालित होने के कारण बजट खर्च नहीं हो सका है।
डॉ. ओम चौहान, प्रभारी सीएमओ