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खारकीव से पैदल ही चल पड़े पीलीभीत के हैदर
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पूरनपुर। यूक्रेन में फंसे शहर के छात्र हैदर ने अपने परिजनों को बताया कि यहां दहशत का माहौल है। बम फटने की आवाजें आ रही हैं। मंगलवार को वह पैदल रेलवे स्टेशन की ओर निकल पड़े। करीब 20 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर हैदर ने अपने साथियों के साथ ट्रेन पकड़ ली।
हैदर के पिता राइस मिलर अजीम खां ने बताया कि उनका बेटा 2018 में यूक्रेन के खारकीव यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। अगस्त माह में घर आया था। सितंबर में फिर यूक्रेन चला गया। अब यूक्रेन और रूस में युद्ध छिड़ गया। उनका पुत्र कई दिनों से खारकीव में फंसा हुआ था। उसे अधिकांश समय बंकर में ही रहना पड़ रहा था। युद्ध के चलते मेस और बाजार बंद होने से दो वक्त का खाना तक नहीं मिल रहा है। पीने के पानी तक पर संकट है।
युद्ध के धमाकों से पिछले कई दिन से वह दहशत में है। मंगलवार को हैदर अपने 30 साथियों के साथ हैदर पैदल रेलवे स्टेशन की ओर चल दिया। करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर ट्रेन में सवार होने की जानकारी हैदर ने मंगलवार को दी है। मगर बॉर्डर पर छात्रों को पार कराने के लिए इंतजाम पुख्ता न होने पर सभी चिंतित हैं। बातचीत में बार बार संपर्क कट रहा था। इसलिए वे भी चिंता में हैं। जब तक बेटा नहीं लौट आता है तब तक पल पल खबर ले रहे हैं।
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यूक्रेन से बोले- बलजीत सिंह, मां चिंता मत करना - गांव भोपतपुर निवासी बलजीत सिंह अपनी पत्नी मनदीप कौर के साथ तीन महीने पहले यूक्रेन गए थे। युद्ध में पति-पत्नी फंसे है। बलजीत की मां का पिछले तीन दिन से बेटा, बहू से संपर्क नहीं हो पा रहा था। बलजीत सिंह के फुफेरे भाई मनवीर सिंह ने बताया कि मंगलवार को बलजीत की उसकी बुआ से बात हुई है। बलजीत ने दूसरे किसी के मोबाइल नंबर से बुआ से बात की और कहा कि मां मेरी चिंता मत करना हम दोनों अब सुरक्षित है। संवाद
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हैदर के पिता राइस मिलर अजीम खां ने बताया कि उनका बेटा 2018 में यूक्रेन के खारकीव यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। अगस्त माह में घर आया था। सितंबर में फिर यूक्रेन चला गया। अब यूक्रेन और रूस में युद्ध छिड़ गया। उनका पुत्र कई दिनों से खारकीव में फंसा हुआ था। उसे अधिकांश समय बंकर में ही रहना पड़ रहा था। युद्ध के चलते मेस और बाजार बंद होने से दो वक्त का खाना तक नहीं मिल रहा है। पीने के पानी तक पर संकट है।
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युद्ध के धमाकों से पिछले कई दिन से वह दहशत में है। मंगलवार को हैदर अपने 30 साथियों के साथ हैदर पैदल रेलवे स्टेशन की ओर चल दिया। करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर ट्रेन में सवार होने की जानकारी हैदर ने मंगलवार को दी है। मगर बॉर्डर पर छात्रों को पार कराने के लिए इंतजाम पुख्ता न होने पर सभी चिंतित हैं। बातचीत में बार बार संपर्क कट रहा था। इसलिए वे भी चिंता में हैं। जब तक बेटा नहीं लौट आता है तब तक पल पल खबर ले रहे हैं।
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यूक्रेन से बोले- बलजीत सिंह, मां चिंता मत करना - गांव भोपतपुर निवासी बलजीत सिंह अपनी पत्नी मनदीप कौर के साथ तीन महीने पहले यूक्रेन गए थे। युद्ध में पति-पत्नी फंसे है। बलजीत की मां का पिछले तीन दिन से बेटा, बहू से संपर्क नहीं हो पा रहा था। बलजीत सिंह के फुफेरे भाई मनवीर सिंह ने बताया कि मंगलवार को बलजीत की उसकी बुआ से बात हुई है। बलजीत ने दूसरे किसी के मोबाइल नंबर से बुआ से बात की और कहा कि मां मेरी चिंता मत करना हम दोनों अब सुरक्षित है। संवाद