{"_id":"1b52bd140fb06e715de6102d66b9362c","slug":"government-land-in-the-old-hospital-records-demarche-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुराने अस्पताल भूमि मामले में शासन ने तलब किए अभिलेख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुराने अस्पताल भूमि मामले में शासन ने तलब किए अभिलेख
पीलीभीत
Updated Sat, 21 Nov 2015 11:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पुराने अस्पताल स्थित भूमि पर जिला पंचायत ने बनवाई गई 31 दुकानों का विवाद निपट नहीं रहा है। हाईकोर्ट के आदेश पर दुकानों की नीलामी पर लगी रोक के साथ उसके क्रम में शासन ने सीएमओ से भूमि संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में तत्कालीन जिलाधिकारी ओएन सिंह ने शासन को भेजे गए पत्र में अस्पताल की भूमि पर जिला पंचायत द्वारा नियम विरुद्ध दुकानें बनाने का आरोप लगाया है। इससे जिला पंचायत का उस भूमि पर किया जा रहा दावा और कमजोर हो गया है।
शहर के पुराने अस्पताल भूमि को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला पंचायत अक्तूबर 2013 में आमने-सामने आ गए थे। जिला पंचायत के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी ने भूमि का स्वामित्व जिला पंचायत का होने की बात कही थी। उसमें 31 दुकानों का निर्माण कराकर उसकी नीलामी की तैयारी शुरू कर दी थी। वहीं तत्कालीन सीएमओ डॉ. राकेश तिवारी ने भी भूमि को करीब सौ वर्ष से अधिक स्वास्थ्य विभाग के अधीन होने की बात कहते हुए उसके अस्पताल की भूमि होने का दावा किया था। इस मामले में शासन को भी अवगत कराया गया था।
शासन के निर्देश पर डीएम ने भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया। मगर इस बीच जिला पंचायत ने निर्माणाधीन प्रशासनिक भवन के चारों ओर बनाई जा रही दुकानों का निर्माण रातों रात पूरा कर दिया था। इस मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमा गैरोला ने हाईकोर्ट में रिट दायर करते हुए स्वास्थ्य विभाग की भूमि पर जिला पंचायत द्वारा कब्जा करने का आरोप लगाते हुए उस पर जिला पंचायत द्वारा बनवाई गई सभी 31 दुकानों को गलत करार दिया था। साथ ही उसकी बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित दुकानों की न सिर्फ बिक्री पर रोक लगा दी, बल्कि प्रमुख सचिव पंचायती राज व प्रमुख सचिव मेडिकल हेल्थ को सर्वे कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन
आदेश में उक्त सरकारी जमीन का कहीं निजी उपयोग तो नहीं किया जा रहा है यह पता लगाकर रिपोर्ट देने को कहा गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन डीएम ओएन सिंह से भी रिपोर्ट मांगी गई थी। तत्कालीन डीएम ने भी अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इधर, अब शासन के सचिव अरविंद नारायण मिश्र ने सीएमओ व सीएमएस को पत्र भेजकर भूमि संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ. आरसी शर्मा ने शासन द्वारा पत्र आने की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि इससे जुड़े सभी अभिलेख सीएमओ कार्यालय में हैं। सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि आदेश उनके ज्वाइन करने से पूर्व का है। तत्कालीन सीएमओ ने रिपोर्ट भेजी होगी। इस मामले की जानकारी की जाएगी।
कोर्ट के हस्तक्षेप पर बदला प्रशासन का रुख
तत्कालीन डीएम ओएन सिंह के समय ही जिला पंचाचयतने पुराने अस्पताल की भूमि पर स्वामित्व को लेकर दोनों महकमे आमने-सामने हो गए थे। इसके बाद भी जिला प्रशासन मौन रहा। इसके बाद जिला पंचायत ने संबंधित भूमि पर दुकानों का निर्माण कराना शुरू किया तब भी सेहत महकमे के अधिकारियों ने प्रशासन को अवगत कराते हुए आपत्ति दर्ज कराई। मगर तब सत्तापक्ष के एक नेता के इशारे पर जिला पंचायत चल रही थी। लिहाजा प्रशासन भी चुप्पी साधे रहा। जिला पंचायत सदस्य रमा गैरोला जब हाईकोर्ट में रिट दायर कर आदेश करा लाईं। हाईकोर्ट के उस आदेश के क्रम में जब शासन ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी तो तत्कालीन डीएम का भी रुख बदल गया। उन्होंने भी अपनी रिपोर्ट में उस भूमि को जिला पंचायत की न होना बताते हुए नियम विरुद्ध तरीके से उस पर दुकानों का निर्माण कराने की बात लिख कर भेज दी। यही नहीं उन्होंने अपने पत्र में निर्माण कार्य रुकवाने व विधिक राय लेकर जिला अस्पताल की भूमि खाली कराने का आदेश जारी करने का भी आग्रह किया था।
शहर के पुराने अस्पताल भूमि को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला पंचायत अक्तूबर 2013 में आमने-सामने आ गए थे। जिला पंचायत के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी ने भूमि का स्वामित्व जिला पंचायत का होने की बात कही थी। उसमें 31 दुकानों का निर्माण कराकर उसकी नीलामी की तैयारी शुरू कर दी थी। वहीं तत्कालीन सीएमओ डॉ. राकेश तिवारी ने भी भूमि को करीब सौ वर्ष से अधिक स्वास्थ्य विभाग के अधीन होने की बात कहते हुए उसके अस्पताल की भूमि होने का दावा किया था। इस मामले में शासन को भी अवगत कराया गया था।
विज्ञापन
शासन के निर्देश पर डीएम ने भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को रुकवा दिया। मगर इस बीच जिला पंचायत ने निर्माणाधीन प्रशासनिक भवन के चारों ओर बनाई जा रही दुकानों का निर्माण रातों रात पूरा कर दिया था। इस मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमा गैरोला ने हाईकोर्ट में रिट दायर करते हुए स्वास्थ्य विभाग की भूमि पर जिला पंचायत द्वारा कब्जा करने का आरोप लगाते हुए उस पर जिला पंचायत द्वारा बनवाई गई सभी 31 दुकानों को गलत करार दिया था। साथ ही उसकी बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित दुकानों की न सिर्फ बिक्री पर रोक लगा दी, बल्कि प्रमुख सचिव पंचायती राज व प्रमुख सचिव मेडिकल हेल्थ को सर्वे कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन
आदेश में उक्त सरकारी जमीन का कहीं निजी उपयोग तो नहीं किया जा रहा है यह पता लगाकर रिपोर्ट देने को कहा गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन डीएम ओएन सिंह से भी रिपोर्ट मांगी गई थी। तत्कालीन डीएम ने भी अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इधर, अब शासन के सचिव अरविंद नारायण मिश्र ने सीएमओ व सीएमएस को पत्र भेजकर भूमि संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ. आरसी शर्मा ने शासन द्वारा पत्र आने की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि इससे जुड़े सभी अभिलेख सीएमओ कार्यालय में हैं। सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि आदेश उनके ज्वाइन करने से पूर्व का है। तत्कालीन सीएमओ ने रिपोर्ट भेजी होगी। इस मामले की जानकारी की जाएगी।
कोर्ट के हस्तक्षेप पर बदला प्रशासन का रुख
तत्कालीन डीएम ओएन सिंह के समय ही जिला पंचाचयतने पुराने अस्पताल की भूमि पर स्वामित्व को लेकर दोनों महकमे आमने-सामने हो गए थे। इसके बाद भी जिला प्रशासन मौन रहा। इसके बाद जिला पंचायत ने संबंधित भूमि पर दुकानों का निर्माण कराना शुरू किया तब भी सेहत महकमे के अधिकारियों ने प्रशासन को अवगत कराते हुए आपत्ति दर्ज कराई। मगर तब सत्तापक्ष के एक नेता के इशारे पर जिला पंचायत चल रही थी। लिहाजा प्रशासन भी चुप्पी साधे रहा। जिला पंचायत सदस्य रमा गैरोला जब हाईकोर्ट में रिट दायर कर आदेश करा लाईं। हाईकोर्ट के उस आदेश के क्रम में जब शासन ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी तो तत्कालीन डीएम का भी रुख बदल गया। उन्होंने भी अपनी रिपोर्ट में उस भूमि को जिला पंचायत की न होना बताते हुए नियम विरुद्ध तरीके से उस पर दुकानों का निर्माण कराने की बात लिख कर भेज दी। यही नहीं उन्होंने अपने पत्र में निर्माण कार्य रुकवाने व विधिक राय लेकर जिला अस्पताल की भूमि खाली कराने का आदेश जारी करने का भी आग्रह किया था।