जमीन तो मिल गई लेकिन मंदिर कौन बनवाएगा

पीलीभ्ाीत ब्यूराो Updated Sun, 04 Jun 2017 07:35 PM IST
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 असम रोड पर अतिक्रमण के नाम पर मंदिर तोड़े  जाने के बाद उपजे बवाल को शांत कराने के लिए प्रशासन ने भले ही पड़ोस के खेत स्वामी से थोड़ी सी जमीन दान में दिला ली है, लेकिन अब इस जमीन पर मंदिर कौन और कैसे बनवाएगा। यह सवाल अब हर किसी के दिमाग में उठ रहा है और सबकी निगाहें प्रशासन की ओर हैं।      
23 मई को जिला प्रशासन द्वारा गठित एंटी भूमाफिया टॉक्स फोर्स ने पूरनपुर रोड पर पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर सड़क किनारे बने पुराने धार्मिक स्थल को तोड़ दिया था। इसके बाद नाराज ग्रामीणों ने हाइवे जाम कर दिया था और आगजनी होने पर पुलिस को लाठी चार्ज भी करनी पड़ी थी। हालांकि पुलिस ने दबाव बनाने के लिए 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कई लोगों को जेल भेज दिया था जो अभी भी जेल में बंद हैं लेकिन ग्रामीणों में इसके प्रति आक्रोश कम नहीं हुआ था। वह मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे थे। कई राजनीतिक संगठन के नेता भी मंदिर निर्माण की मांग को लेकर अनशन तक की चेतावनी दे दी थी। जिसके बाद सकते में आए प्रशासन ने कुछ नेताओं की मध्यस्थता के बाद धार्मिक स्थल के निकट स्थित प्लाट के स्वामी से मंदिर बनवाने को जमीन देने का ऐलान करा दिया था। इससे एक हद तक मामला शांत भी हो गया था। शनिवार को समाधान दिवस के बाद राजस्व और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की नाप करा दी। यहां नॉप के दौरान गांव के ही एक व्यक्ति ने दान में दी जा रही जमीन को अपनी बताते हुए दान देने वाले व्यक्ति पर सात साल से जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप भी लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी।  लेकिन प्रशासन ने उसके दावे को नकार दिया था। प्रशासन ने अभी उसके दावे पर कोई कार्रवाई नहीं की है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित ग्रामीण ने लिखित रूप से कोई पत्र नहीं दिया है। लिहाजा उसकी बात में दम नहीं लगता है। इस तरह वर्षों पुराने इस धार्मिक स्थल के बदले नया मंदिर बनाने को जमीन तो मिल गई लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि इस जमीन पर मंदिर कौन, कब और कैसे बनाएगा। धार्मिक स्थल प्रशासन ने ध्वस्त किया था इसलिए लोगों का मानना है कि प्रशासन ही मंदिर बनवाने की पहल करेगा। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर और हिंदुत्व के नाम पर वोट पाकर सत्ता पर काबिज हुए भाजपाई इसमें आगे आ सकते हैं। तीसरा उपाय है ग्रामीण जनसहयोग से चंदा एकत्र कर इसका निर्माण कराएं। रविवार को शहर और गांव में मंदिर निर्माण को लेकर तरह तरह की चर्चाएं उठती रहीं और लोग अपने अपने हिसाब से कयास लगाते देखे गए।      
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जमीन मिलने पर उठे कई सवाल      
मंदिर तोड़े जाने के बाद उपजे बवाल के और बढने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने किसी तरह प्रयास कर सड़क किनारे की कुछ जमीन मंदिर निर्माण के लिए उपलब्ध करा दी। कुछ दिनों में यहां मंदिर बनना भी तय है। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रशासन ने तोड़े गए स्थान को मंदिर माना ही नहीं था तो अब उसे बनाने के लिए जमीन क्यों उपलब्ध करा दी। दूसरा यदि प्रशासन मान रहा है कि वहां मंदिर था और अब दूसरा मंदिर बनना चाहिए तो उसे अतिक्रमण बताकर तोडा क्ययों गया। क्या पूरनपुर मार्ग के चौड़ीकरण में सिर्फ यही एक धार्मिक स्थल बाधा बना हुआ था? ऐसे कईं सवाल हैं जिसका उत्तर भी प्रशासन को ही देना होगा।      
 

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