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शादी हो गई, अनुदान का इंतजार करते रह गए दंपती
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पीलीभीत। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित शादी अनुदान योजना के तहत हर साल सैकड़ों आवेदकों को सरकारी इमदाद का लाभ नहीं मिल पाता। शासन से बजट कम जारी होने से उनको मायूसी हाथ लगती है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी 1595 आवेदकों को योजना का लाभ नहीं मिल सका।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा अल्पसंख्यक वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की बेटियों की शादी के लिए बीस हजार रुपये की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है। इसमें विधवा, विकलांगों को वरीयता मिलती है। यानि जिस लड़की की मां विधवा हैं या माता-पिता में कोई विकलांग है उसे वरीयता के आधार पर चयन कर लिया जाएगा।
हर साल जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास दो से तीन हजार आवेदन आते हैं, लेकिन इनमें लाभ चालीस फीसदी से कम आवेदकों को मिल पाता है। वित्तीय सत्र 2020-21 में ढाई हजार आवेदन हुए। इसमें महज 276 को ही योजना का लाभ मिल सका। बाकी आवेदकों के हाथ मायूसी लगी। 2021-22 में विभाग को 2430 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें 835 को लाभ मिला। मौजूदा सत्र की बात करें तो दो हजार आवेदन आ चुके हैं। अभी तक 121 को लाभ मिल चुका है।
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आवेदन पास कराने को भी लगाने पड़ते चक्कर
शादी अनुदान के आवेदन ऑनलाइन होते हैं। इसकी हार्ड कॉपी ब्लॉक स्तर पर जमा करनी होती है। ब्लॉक से स्वीकृत होने के बाद आवेदन जिला स्तर पर भेजा जाता है। एक आवेदक ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर आवेदन पास कराने के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़े। कुछ न कुछ आपत्ति लगा दी जाती है। निस्तारण के नाम पर फिर पैसे लिए जाते हैं।
आवेदनों के हिसाब से नहीं मिल पाता शासन से बजट
शादी अनुदान का बजट हर साल जारी किया जाता है। बजट कम होने के कारण सभी को इसका लाभ नहीं मिल पाता। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि जो लोग अप्रैल शुरू में आवेदन करते हैं तो उनको पहले लाभ मिल जाता है। वैसे आवेदन शादी से पहले और बाद में भी किया जा सकता है लेकिन अप्रैल के आवेदनों को पहली किस्त से ही पैसा जारी कर दिया जाता है। अगर उसके बाद अगली किस्त नहीं आई तो उनको लाभ नहीं मिल पाता।
शादी अनुदान के तहत शासन से जितना बजट मिलता है वरीयता के आधार वितरित कर दिया जाता है। इसमें विधवा और विकलांग को वरीयता मिलती है। इनके बाद सामान्य आवेदकों का चयन करते हैं। हर साल सभी आवेदकों को लाभ नहीं मिल पाता। - केपी सिंह, समाज कल्याण अधिकारी/प्रभारी अल्पसंख्यक अधिकारी
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा अल्पसंख्यक वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की बेटियों की शादी के लिए बीस हजार रुपये की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है। इसमें विधवा, विकलांगों को वरीयता मिलती है। यानि जिस लड़की की मां विधवा हैं या माता-पिता में कोई विकलांग है उसे वरीयता के आधार पर चयन कर लिया जाएगा।
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हर साल जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास दो से तीन हजार आवेदन आते हैं, लेकिन इनमें लाभ चालीस फीसदी से कम आवेदकों को मिल पाता है। वित्तीय सत्र 2020-21 में ढाई हजार आवेदन हुए। इसमें महज 276 को ही योजना का लाभ मिल सका। बाकी आवेदकों के हाथ मायूसी लगी। 2021-22 में विभाग को 2430 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें 835 को लाभ मिला। मौजूदा सत्र की बात करें तो दो हजार आवेदन आ चुके हैं। अभी तक 121 को लाभ मिल चुका है।
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आवेदन पास कराने को भी लगाने पड़ते चक्कर
शादी अनुदान के आवेदन ऑनलाइन होते हैं। इसकी हार्ड कॉपी ब्लॉक स्तर पर जमा करनी होती है। ब्लॉक से स्वीकृत होने के बाद आवेदन जिला स्तर पर भेजा जाता है। एक आवेदक ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर आवेदन पास कराने के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़े। कुछ न कुछ आपत्ति लगा दी जाती है। निस्तारण के नाम पर फिर पैसे लिए जाते हैं।
आवेदनों के हिसाब से नहीं मिल पाता शासन से बजट
शादी अनुदान का बजट हर साल जारी किया जाता है। बजट कम होने के कारण सभी को इसका लाभ नहीं मिल पाता। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि जो लोग अप्रैल शुरू में आवेदन करते हैं तो उनको पहले लाभ मिल जाता है। वैसे आवेदन शादी से पहले और बाद में भी किया जा सकता है लेकिन अप्रैल के आवेदनों को पहली किस्त से ही पैसा जारी कर दिया जाता है। अगर उसके बाद अगली किस्त नहीं आई तो उनको लाभ नहीं मिल पाता।
शादी अनुदान के तहत शासन से जितना बजट मिलता है वरीयता के आधार वितरित कर दिया जाता है। इसमें विधवा और विकलांग को वरीयता मिलती है। इनके बाद सामान्य आवेदकों का चयन करते हैं। हर साल सभी आवेदकों को लाभ नहीं मिल पाता। - केपी सिंह, समाज कल्याण अधिकारी/प्रभारी अल्पसंख्यक अधिकारी