{"_id":"5f2c56c58ebc3e4ade1d9b7b","slug":"gaushala-in-bad-condition-pilibhit-news-bly4153833192","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला लाइवः करोड़ों रुपए खर्च...फिर भी गोशाला में भूख और बीमारी से मर रहीं गायें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला लाइवः करोड़ों रुपए खर्च...फिर भी गोशाला में भूख और बीमारी से मर रहीं गायें
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पीलीभीत। सूबे में भाजपा की सरकार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। ऊपर से पूर्व केंद्रीय मंत्री और सुल्तानपुर की सांसद मेनका गांधी की बनाई गोशाला। इन सबका गाय प्रेम और गोवंशीय पशुओं को बचाने की मुहिम को आम जनता भी जानती है। मगर, अफसर इन सबको धता-बताकर पूरे सिस्टम को पलीता लगाने में लगे हैं। मेनका गांधी की देवीपुरा में बनाई गोशाला में गायों की देखभाल के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च हो गया। मगर, गोशाला की गायें फिर भी जीवित नहीं बच पा रही हैं।
गोशाला में गायें भूख और बीमारी से लगातार मर रही हैं। उनके शव कई दिनों से गोशाला के अंदर और बाहर कीचड़ में पड़े होकर सड़ रहे हैं। मगर, गोशाला की जिम्मेदारी संभालने का दावा करने वाले सीवीओ को इन सबकी खबर ही नहीं थी। इतना ही नहीं, देवीपुरा गोशाला में जो गायें जिंदा भी बची हैं, वह इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि चलने लायक नहीं हैं। इससे गोशाला की बदहाल व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।
किसी ने अमर उजाला दफ्तर में फोन करके बताया कि देवीपुरा गोशाला के बाहर की जमीन पर कुछ गायों के शव और हड्डियां पड़े हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने देवीपुरा जाकर मौके पर देखा तो बात वाकई सच निकली। गोशाला में पशुओं को खाने के लिए भरपूर चारा मिलना तो दूर की बात है, भरपेट पानी भी नहीं मिल रहा। गोशाला परिसर में बरसात में दो फुट तक कीचड़ और गंदगी फैली हुई थी। पशुओं केे बैठने का साफ स्थान नहीं था। गायों को जो चारा या भूसा खिलाया जाता है, सामने दिखने पर लगा कि वह चारा भी कर्मचारी गोबर में ही डाल देते हैं। गायें गोबर या गंदगी से सना वह चारा खाती नहीं। पीने के लिए जो पानी दिया जाता है, उसमें कीड़े पड़े थे। हालत यह कि गायें न तो ठीक से चारा खा पाती हैं, न ही भीषण गर्मी में भर पेट पानी पी सकती हैं। इसलिए गोशाला में कुछ गायें भूख से मर रही हैं तो कुछ बीमारी से। फिलहाल, गोशाला के अंदर गायों के मरने का सिलसिला लंबे समय से जारी है। खास बात यह है कि मरने के बाद गायों के शव वहीं कीचड़ में ही पड़े सड़ रहे हैं। न तो उनका पोस्टमार्टम कराया गया, न ही उन्हें दफन करने की सुध ली गई। बृहस्पतिवार को भी एक दर्जन गोवंशीय पशुओं के शव गोशाला में जहां-जहां पड़े हुए थे। ये कई दिन पुराने प्रतीत हो रहे थे। हालांकि, गोशाला में रहने वाले कर्मचारी पहले तो मृत पशुओं को जिंदा बताते रहे। काफी हील हुज्जत के बाद बीती रात गायों के मरने की बात कहकर परदा डालने की कोशिश की। कुछ कर्मचारियों ने तो यहां तक कह दिया कि गायें भूख और इलाज के अभाव में नहीं, बैठने की जगह न होने के कारण मर गईं। फिलहाल, लापरवाही का यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में गोशाला के अंदर जिंदा बची गायें भी बहुत दिन तक बची नहीं रहेंगी।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने बनाई थी गोशाला
सोसायटी फॉर द प्रीवेंशन ऑफ क्रियूल्टी टू एनीमल (एसपीसीए) द्वारा दिसंबर 1986 में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के प्रयास से मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर माधोटांडा रोड पर देवीपुरा गोशाला की स्थापना की गई थी। इसका मकसद गोवंशीय पशुओं की रक्षा और उनका संवर्धन करना था। जिन्हें गोशाला की देखरेख की जिम्मेदारी मिली, वे पहले से ही लापरवाही बरतने लगे। मगर, साल 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। उसमें भी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। उस समय गोशाला में सुधार की उम्मीद हर किसी को जाग उठी। बीते साल सरकार की ओर से गोवंश संरक्षण मुहिम शासन स्तर से शुरू भी की गई। इसमें सड़कों पर घूमने वाले गोवंशीय पशुओं को छत, खानपान और इलाज की व्यवस्था कराने के लिए गोशालाओं में ले जाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद अधिकांश गोशालाओं का हाल बद से बदतर है। मगर, उनमें देवीपुरा की गोशाला का दृश्य अगर कोई देख ले तो उसके तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
घटकर रह गए तीन कर्मचारी, उन्हें भी वेतन नहीं
एक समय था देवीपुरा गोशाला में आसपास के जनपदों से भी पशु भेजे जाते थे। उनकी देखरेख करने के लिए चालक, ड्रेसर समेत 15 लोगों का स्टाफ रहता था। मगर, बदहाली के चलते वर्तमान में गोशाला में महज तीन कर्मचारी रह गए हैं। उनका भी एक माह का वेतन नहीं मिला। पहले गोशाला में पशुओं को लाने-ले जाने के लिए दो वाहन थे। बीते दिनों से बजट के अभाव में डीजल न होने की बात कहकर यह बहुत दिन खड़े रहे। अब वहां एक भी वाहन नहीं रह गया है।
पीने का पानी ऐसा कि सेहतमंद पशु भी हो जाए बीमार
अफसर से लेकर गोशाला के कर्मचारी पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था होने की बात करते हैं, मगर गोशाला में गोवंशीय पशु सूखे भूसे के सहारे ही जिंदा हैं। वह भी पेट भरके नहीं। पीने के लिए साफ पानी भी उन्हें नहीं दिया जा रहा। पानी में कीड़े भी थे। जिस तरह से पीने का पानी, परिसर की गंदगी और देखरेख के इंतजाम थे, उसमें तो बहुत अच्छी सेहत वाला पशु भी बीमार हो जाएगा।
300 की क्षमता, 511 हैं, इलाज को चंद दवाएं
300 पशुओं की क्षमता वाली देवीपुरा गोशाला वर्तमान में ओवरलोड भी चल रही है। वहां के कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान में गोशाला के अंदर 162 गाय और 349 बैल-बछड़े हैं। इसमें बीमार पशुओं की संख्या केवल सात ही बताई गई, जबकि हकीकत में यह संख्या इससे कहीं ज्यादा है। कर्मचारियों द्वारा मरने वाले पशुओं का आंकड़ा छिपाया जाता रहा। परिसर में मृत पड़े 10 से अधिक पशुओं को लेकर भी अनभिज्ञता जता दी गई। दवाओं का स्टॉक न के बराबर था। कहा गया कि प्रतिदिन डॉक्टर आते हैं। अगर यह सही है तो गोशाला परिसर में कीचड़ में मृत गायों का डॉक्टर को पता क्यों नहीं चला। उनका पोस्टमार्टम कराने की जहमत क्यों नहीं उठाई गई?
राजनीति चमकाने बहुत पहुंचे, अब कोई नहीं आता
देवीपुरा गोशाला की बदहाली को दूर करने के नाम पर खुद को समाजसेवी और गोप्रेम का हवाला देकर कई लोग बीते बरसों में आगे आए। व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को जिम्मेदारी भी संभाली। मगर, हर बार की तरह नतीजा जस का तस रहा। गोशाला की तस्वीर तो नहीं बदली, मगर गाय प्रेम के नाम पर उनका जरूर काम बन गया। किसी की राजनीति चमक गई तो किसी की आमदनी बढ़ गई।
गोशाला के अंदर कीचड़ के बारे में पता लगा था। पशु चिकित्सक टीम के साथ हम रोजाना जाते हैं। गांवशीय पशुओं की मौत के बारे में हमें जानकारी नहीं है। कुछ कमियां सामने आने पर उच्चाधिकारियों को अवगत भी कराया गया था। हकीकत परखने के लिए अब मैं खुद गोशाला जाऊंगा। - डॉ. एके गर्ग, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
मेनका बोलीं- यह सब हो क्या रहा है
गोशाला के अंदर गोवंशीय पशुओं की मौत से मैं अवाक हूं। यह सब क्या हो रहा है। मेरी तो समझ में नहीं आ रहा। इसमें पूरी तरह सीवीओ की लापरवाही झलक रही है। सीवीओ पर कार्रवाई कराने के लिए मैं संबंधित अधिकारियों से बात करती हूं। - मेनका गांधी, वन्य जीव प्रेमी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद
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गोशाला में गायें भूख और बीमारी से लगातार मर रही हैं। उनके शव कई दिनों से गोशाला के अंदर और बाहर कीचड़ में पड़े होकर सड़ रहे हैं। मगर, गोशाला की जिम्मेदारी संभालने का दावा करने वाले सीवीओ को इन सबकी खबर ही नहीं थी। इतना ही नहीं, देवीपुरा गोशाला में जो गायें जिंदा भी बची हैं, वह इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि चलने लायक नहीं हैं। इससे गोशाला की बदहाल व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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सोसायटी फॉर द प्रीवेंशन ऑफ क्रियूल्टी टू एनीमल (एसपीसीए) द्वारा दिसंबर 1986 में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के प्रयास से मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर माधोटांडा रोड पर देवीपुरा गोशाला की स्थापना की गई थी। इसका मकसद गोवंशीय पशुओं की रक्षा और उनका संवर्धन करना था। जिन्हें गोशाला की देखरेख की जिम्मेदारी मिली, वे पहले से ही लापरवाही बरतने लगे। मगर, साल 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। उसमें भी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। उस समय गोशाला में सुधार की उम्मीद हर किसी को जाग उठी। बीते साल सरकार की ओर से गोवंश संरक्षण मुहिम शासन स्तर से शुरू भी की गई। इसमें सड़कों पर घूमने वाले गोवंशीय पशुओं को छत, खानपान और इलाज की व्यवस्था कराने के लिए गोशालाओं में ले जाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद अधिकांश गोशालाओं का हाल बद से बदतर है। मगर, उनमें देवीपुरा की गोशाला का दृश्य अगर कोई देख ले तो उसके तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
घटकर रह गए तीन कर्मचारी, उन्हें भी वेतन नहीं
एक समय था देवीपुरा गोशाला में आसपास के जनपदों से भी पशु भेजे जाते थे। उनकी देखरेख करने के लिए चालक, ड्रेसर समेत 15 लोगों का स्टाफ रहता था। मगर, बदहाली के चलते वर्तमान में गोशाला में महज तीन कर्मचारी रह गए हैं। उनका भी एक माह का वेतन नहीं मिला। पहले गोशाला में पशुओं को लाने-ले जाने के लिए दो वाहन थे। बीते दिनों से बजट के अभाव में डीजल न होने की बात कहकर यह बहुत दिन खड़े रहे। अब वहां एक भी वाहन नहीं रह गया है।
पीने का पानी ऐसा कि सेहतमंद पशु भी हो जाए बीमार
अफसर से लेकर गोशाला के कर्मचारी पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था होने की बात करते हैं, मगर गोशाला में गोवंशीय पशु सूखे भूसे के सहारे ही जिंदा हैं। वह भी पेट भरके नहीं। पीने के लिए साफ पानी भी उन्हें नहीं दिया जा रहा। पानी में कीड़े भी थे। जिस तरह से पीने का पानी, परिसर की गंदगी और देखरेख के इंतजाम थे, उसमें तो बहुत अच्छी सेहत वाला पशु भी बीमार हो जाएगा।
300 की क्षमता, 511 हैं, इलाज को चंद दवाएं
300 पशुओं की क्षमता वाली देवीपुरा गोशाला वर्तमान में ओवरलोड भी चल रही है। वहां के कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान में गोशाला के अंदर 162 गाय और 349 बैल-बछड़े हैं। इसमें बीमार पशुओं की संख्या केवल सात ही बताई गई, जबकि हकीकत में यह संख्या इससे कहीं ज्यादा है। कर्मचारियों द्वारा मरने वाले पशुओं का आंकड़ा छिपाया जाता रहा। परिसर में मृत पड़े 10 से अधिक पशुओं को लेकर भी अनभिज्ञता जता दी गई। दवाओं का स्टॉक न के बराबर था। कहा गया कि प्रतिदिन डॉक्टर आते हैं। अगर यह सही है तो गोशाला परिसर में कीचड़ में मृत गायों का डॉक्टर को पता क्यों नहीं चला। उनका पोस्टमार्टम कराने की जहमत क्यों नहीं उठाई गई?
राजनीति चमकाने बहुत पहुंचे, अब कोई नहीं आता
देवीपुरा गोशाला की बदहाली को दूर करने के नाम पर खुद को समाजसेवी और गोप्रेम का हवाला देकर कई लोग बीते बरसों में आगे आए। व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को जिम्मेदारी भी संभाली। मगर, हर बार की तरह नतीजा जस का तस रहा। गोशाला की तस्वीर तो नहीं बदली, मगर गाय प्रेम के नाम पर उनका जरूर काम बन गया। किसी की राजनीति चमक गई तो किसी की आमदनी बढ़ गई।
गोशाला के अंदर कीचड़ के बारे में पता लगा था। पशु चिकित्सक टीम के साथ हम रोजाना जाते हैं। गांवशीय पशुओं की मौत के बारे में हमें जानकारी नहीं है। कुछ कमियां सामने आने पर उच्चाधिकारियों को अवगत भी कराया गया था। हकीकत परखने के लिए अब मैं खुद गोशाला जाऊंगा। - डॉ. एके गर्ग, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
मेनका बोलीं- यह सब हो क्या रहा है
गोशाला के अंदर गोवंशीय पशुओं की मौत से मैं अवाक हूं। यह सब क्या हो रहा है। मेरी तो समझ में नहीं आ रहा। इसमें पूरी तरह सीवीओ की लापरवाही झलक रही है। सीवीओ पर कार्रवाई कराने के लिए मैं संबंधित अधिकारियों से बात करती हूं। - मेनका गांधी, वन्य जीव प्रेमी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद