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गणेश चौथ पर इस बार नहीं लगा मेला, अब पांच सितंबर का इंतजार

Thu, 01 Sep 2022 12:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2022 12:00 AM IST
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Ganesh Chauth fair was not held for the first time
पीलीभीत। वर्ष 1984 में शुरू हुआ पीलीभीत का मशहूर गणेश चौथ मेला इस बार रामलीला मैदान में नहीं लग सका। न ही गणेश चतुर्थी के दिन निकलने वाली शोभायात्रा के बाद गणपति की स्थापना मेलास्थल पर स्थापित हो सकी। आयोजन स्थल को लेकर मामला कोर्ट में विचाराधीन है। बुधवार को इस पर जिला जज की कोर्ट में सुनवाई होने थी, लेकिन अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायालय ने अब अगली तारीख पांच सितंबर तय की है।
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बुधवार को चर्चित गणेश चौथ मेले की सुनवाई के बाद तय होना था कि रामलीला मैदान की जगह पर इस बार मेला होगा या नहीं। इसी दौरान कचहरी में अधिवक्ताओं ने गणेश चौथ पर अवकाश की मांग उठाते हुए काम बंद कर दिया। इसके बाद अदालत ने मामले में अगली तारीख 5 सितंबर तय की है।
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अगली तारीख पड़ने पर मेला कमेटी के लोगों को तगड़ा झटका लगा। उन्हें उम्मीद थी कि फैसला उनके पक्ष में आएगा। उन्होंने मेले की सारी तैयारियां कर रखी थीं।
1984 के बाद (कोरोना काल को छोड़कर) ऐसा पहली बार हुआ जब शोभायात्रा निकलने के बाद श्री गणेश प्रतिमा मेलास्थल पर स्थापित नहीं हो सकी और न ही रामलीला मैदान में मेला लगा। बुधवार को शाम को शोभायात्रा तो निकली गई, लेकिन शोभायात्रा के बाद गणेेश प्रतिमा को रामलीला मैदान की जगह डिग्री कॉलेज रोड पर नई बस्ती में धार्मिकस्थल पर स्थापित किया गया।
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अगली तारीख का सबको बेसब्री से इंतजार
गणेश चौथ पर मेला शुरू न होने से लोगों में खासी निराशा है। शहर में पूरे साल में महज एक यही मेला होता था। इधर, जगह को लेकर मेले की लड़ाई लड़ रहे मेला कमेटी के सदस्य प्रदीप तिवारी ने बताया कि पहली बार गणेश चौथ की छुट्टी को लेकर हड़ताल हुई है। अब वह पांच तारीख का इंतजार करेंगे। लोगों को भी इस दिन होने वाली सुनवाई का इंतजार रहेगा। 20 सितंबर तक देखा जाएगा। इस बीच में अगर आदेश हुआ, तो मेला लगेगा। भले ही एक दिन के लिए मेला लगाना पड़े। लेकिन 20 सितंबर के बाद मेला नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने मेला किसी दूसरी जगह लगाए जाने से साफ इन्कार कर दिया।
यह है विवाद
मेला कमेटी की तरफ से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता आलोक नगायच का कहना है कि 1993 से लगातार रामलीला मैदान की जमीन पर ही गणेश चौथ मेले का आयोजन होता चला आया है। साथ ही रामलीला मैदान की जगह महंत ओमकार नाथ की नहीं है। उनके पक्ष को सुने बगैर ही एक तरफा फैसला दे दिया गया है। इसकी अपील जिला जज की अदालत में की गई है। अब इस पर सुनवाई चल रही है। वहीं महंत पक्ष की तरफ से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता आरके अवस्थी का कहना है कि महंत जमीन के मालिक है। पूर्व में यहां गलत तरीके से मेला लग रहा था। कई बार इसकी शिकायत पुलिस प्रशासन से की गई। कार्रवाई न होने पर वर्ष 2000 में वाद दायर किया गया। जिसमें मई 2022 में उनके पक्ष में फैसला आ गया।
गणेश चौथ मनाने के लिए की हड़ताल
मंगलवार को बार एसोसिएशन की तरफ से एक पत्र जारी कर दिया गया था। इसमें कहा गया था कि 31 अगस्त को गणेश चौथ है। अधिवक्ता भी इस पर्व को मनाते हैं और घरों में गणेश प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसलिए कार्य से विरत रहने को कहा गया था। बुधवार सुबह अधिकांश अधिवक्ताओं को इसके बारे में पता चला। हालांकि गणेश चौथ मेला प्रकरण से जुड़ा एक पक्ष चाह रहा था कि सुनवाई हो जाए। लेकिन हड़ताल होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।

आज भी रहेगी हड़ताल
जिला संयुक्त बार एसोसिएशन के सभाकक्ष में एडवोकेट बाबूराम शर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट संत राम राठौर व सिविल बार के अध्यक्ष एडवोकेट आलोक नगायच की मौजूदगी में निर्णय लिया कि एक सितंबर को सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। बैठक में ई-कोर्ट काफी समय से बंद होने, कोर्ट फीस के उपलब्ध न होने, न्यायालयों में अनियमिताएं व्याप्त होने की बात कही गई। इसके साथ ही न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी रोष प्रकट किया गया। इन सभी मुद्दों को लेकर बृहस्पतिवार को 12 बजे जिला संयुक्त बार एसोसिएशन के हॉल में बैठक भी होगी।
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