फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Freedom fighter Major Singh are not Guruditt

स्वतंत्रता सेनानी मेजर गुरुदित्त सिंह नहीं रहे

Mon, 21 Dec 2015 11:23 PM IST
jarakothi
jarakothi Updated Mon, 21 Dec 2015 11:23 PM IST
विज्ञापन
Freedom fighter Major Singh are not Guruditt

देश की आजादी में हिस्सा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानी मेजर गुरुदित्त सिंह नहीं रहे। वह 99 साल के थे। पुलिस ने स्वतंत्रता सेनानी को अंतिम सलामी दी। वहीं अधिकारियों ने पुष्पचक्र चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में उनके बड़े बेटे देवेंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी।

विज्ञापन

मूलरूप से पंजाब के वल्लड़वाल गुरुदासपुर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मेजर गुरुदित्त सिंह वर्ष 1956 में पंजाब से क्षेत्र के गांव पिपरिया करम में आकर परिवार सहित बस गए थे। उनके पुत्र देवेंद्र सिंह ने बताया आजादी की लड़ाई में भाग लेने के बाद भी उनके पिता को कई साल तक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली पेंशन नहीं मिली। इस पर वर्ष वर्ष 2006 में हाईकोर्ट की शरण ली। तब उनको 2006 में पेंशन मिलना शुरू हुई। हालांकि पिछले वर्षों 1991 से बकाया पेंशन का सरकार ने भुगतान किया। देवेंद्र ने बताया कि उनके पिता सात भाई थे, जिनमें पांच सेना में रहे। सोमवार को 99 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के निधन की सूचना पर एसडीएम ज्ञानेंद्र सिंह, सीओ सिटी यशवीर सिंह, तहसीलदार दिग्विजय सिंह उनके गांव पहुंचे। तीनों अधिकारियों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी वहीं पुलिस टीम ने सलामी दी। इस दौरान एसडीएम ने शासन की ओर से अंतिम संस्कार के लिए पांच हजार रुपये की धनराशि भी प्रदान की। मेजर गुरुदित्त अपने पीछे तीन पुत्र देवेंद्र, राजेंद्र, और अरविंदर व तीन विवाहित पुत्रियों सर्वजीत कौर, मंजीत कौर, सुखजीत कौर सहित भरापूरा परिवार बिलखता छोड़ गए। दोपहर को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी अंतिम यात्रा में क्षेत्र के तमाम लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन


अंग्रेजी सेना होने के बावजूद निकाला था जुलूस
जराकोठी। मेजर गुरदित्त सिंह वर्ष 1934 से 1946 तक अंग्रेजी सेना में तैनात रहे। इस दौरान देश की आजादी के लिए उन्होंने अंग्रेजी सेना के वाहन पर सुभाष चंद्र बोस की फोटो लगाकर जुलूस निकाला। इसकी जानकारी होने पर अंग्रेजों ने उनको नौकरी से निकाल दिया और सात माह के लिए जेल में डाल दिया। उनके बड़े पुत्र देवेंद्र सिंह ने बताया कि इस दौरान अंग्रेजों ने उन्हें माफी मांगने पर दुबारा सेना में रखने का आश्वासन भी दिया, लेकिन वह अंग्रेजों के आगे झुके नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed