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किसानों की पीड़ा : गन्ना किसानों का मिलों पर 282 करोड़ से ज्यादा का बकाया

Mon, 07 Mar 2022 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2022 01:03 AM IST
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Farmers' pain: Sugarcane farmers owe more than 282 crores to mills
पीलीभीत। पेराई सत्र से पहले शासन का दावा था कि गन्ने की तौल के चौदह दिन के अंदर किसानों को उनका भुगतान चीनी मिलें कर देंगी मगर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। हजारों किसान ऐसे हैं, जिन्हें अब तक गन्ना भुगतान नहीं मिला है। मिलों की मनमानी से आजिज आकर कई किसानों ने कोल्हू पर औने पौने दाम पर गन्ना बेच दिया। बिलसंडा में तमाम किसानों ने मिल को गन्ना देने से इनकार कर दिया। अब अधिकतर क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं मगर किसानों का मिलों पर अब तक 282 करोड़ से ज्यादा का बकाया है।
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पीलीभीत शहर की एलएच शुगर मिल ने जरूर बीस फरवरी तक का भुगतान कर दिया है। इसके अलावा पूरनपुर, बीसलपुर सहकारी चीनी मिल, बरखेड़ा की बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल भुगतान नहीं कर पाई हैं। सबसे खराब स्थिति बरखेड़ा की है। बजाज मिल पर नए सत्र का 210.69 करोड़ रुपये बकाया है। मिल ने सिर्फ 15 नवंबर तक का ही भुगतान दिया है। पूरनपुर सहाकारी चीनी मिल ने 19 दिसंबर का भुगतान किया है। मिल पर अब 37.52 करोड़ का बकाया है। वहीं बीसलपुर ने 29 दिसंबर का भुगतान किया है। मिल पर 39.16 करोड़ का बकाया है। चारों मिलों पर कुल 282.70 करोड़ रुपये बकाया है।
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पिछले पेराई सत्र में भी भुगतान देरी से - भुगतान को लेकर चीनी मिलों ने पिछले साल भी किसानों को काफी परेशान किया था। बरखेड़ा, पूरनपुर और बीसलपुर को मिलाकर संबद्ध किसानों का 162.12 करोड़ रुपये बकाया था। जो इस सत्र में किया गया है। बरखेड़ा चीनी मिल ने मार्च में नए सत्र में जाकर भुगतान किया। बजाज चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र का सबसे ज्यादा 126 करोड़ 7 लाख रुपये गन्ना मूल्य बकाया था। बीसलपुर की सहकारी चीनी मिल पर किसानों का 21.47 करोड़ बकाया था। वहीं पूरनपुर में सहकारी चीनी मिल पर पिछले पेराई सत्र का 14.58 करोड़ रुपये बकाया था। मिलों ने नए सत्र में आकर भुगतान किया।
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अप्रैल में बंद हो जाएंगी मिलें- नवंबर में नया पेराई सत्र शुरू हुआ था। अब अप्रैल में मिलें बंद हो जाएंगी। हालांकि अभी तक कोई अधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं हुई है। भुगतान को लेकर मिलों की लापरवाही इस बार भी किसानों पर भारी पड़ रही है। अगर यही हाल रहा तो इस बार भी गन्ना किसानों का करोड़ों रुपये मिलों के पास दबा रह जाएगा।
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