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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Farmers are being sprinkled salt on the wounds

किसान के जख्मों पर छिड़का जा रहा नमक

Tue, 14 Apr 2015 11:49 PM IST
पीलीभीत।
पीलीभीत। Updated Tue, 14 Apr 2015 11:49 PM IST
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बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुए किसानों के साथ प्रशासन मुआवजे के नाम पर किस तरह मजाक कर रहा है इसका नमूना सदर तहसील क्षेत्र के गांव में देखने को मिल रहा है। किसानों को मुआवजे के नाम पर 13, 27 और 68 रुपये से लेकर 297 रुपये तक के चेक मिल रहे हैं।
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आपदा राहत के जारी 2013 के शासनादेश के अनुसार किसानों को न्यूनतम 750 रुपये का मुआवजा देने का नियम है, लेकिन सदर तहसील में मुआवजा वितरण में लापरवाही की सारी हदें पार कर दी गईं हैं। तहसील क्षेत्र के गांव सिमरिया ताराचंद्र में किसानों को जो मुआवजा मिल रहा है उससे अधिक खर्च चेक को गांव से बैंक तक जाकर भुगतान कराने में हो जाएगा। किसानों के लिए दिया गया मुआवजा उनकी जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
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गांव निवासी धर्मेंद्र के पास ढाई बीघा जमीन है। बारिश में उनकी फसल तबाह होने पर मात्र 198 रुपये का मुआवजा दिया गया है। इसी प्रकार एक एकड़ में गेहूं करने वाले राममूर्ति को 68 रुपये, पौन एकड़ में गेहूं करने वाले वेदपाल को 90 रुपये, और तीन बीघा में गेहूं करने वाले नरेश को 27 रुपये का चेक मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि कई को मात्र 13-13 रुपये के चेक मिले हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव से करीब डेढ़ किमी दूर ज्योहरा कल्यानपुर गांव में बैंक हैं। यदि मुआवजा के इन चेकों का भुगतान कराने वह बैंक जाते हैं तो पूरे दिन की दिहाड़ी तो मारी ही जाएगी। साथ में आने जाने में चेक की धनराशि से अधिक खर्च हो जाएगा।

क्या है नियम
आपदा राहत में मुआवजे के लिए वर्ष 2013 के शासनादेश के अनुसार न्यूनतम (लघु कृषकों को) 750 रुपये दिए जाने चाहिए। अब शासन ने आठ अप्रैल 2015 को नया शासनादेश लागू कर है जिसके अनुसार न्यूनतम मुआवजा एक हजार कर दिया गया। वहीं सोमवार को शासन ने पुन: इसमें बदलाव करते हुए न्यूनतम मुआवजा 1500 रुपये कर दिया है।
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सदर तहसील के कई गांव में गड़बड़ी की शिकायतें आई हैं। गांव की रिपोर्ट तलब की है। किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
- ओएन सिंह, डीएम
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