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Pilibhit News: बाढ़ से बेघर परिवारों को कई साल बाद भी नहीं मिल सका अपना घर
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शारदा डैम की तलहटी में बसे बाढ़ पीड़ित।संवाद
- दो दशक पूर्व शारदा नदी में आई बाढ़ में कट गई थी जमीन और घर
- पट्टे की जमीन न मिलने से सरकारी योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
कलीनगर। शारदा नदी की बाढ़ से बेघर हुए रमनगरा भुजिया गांव के करीब 60 पट्टेदार दो दशक बीतने के बाद भी परिवार के साथ झोपड़पट्टी में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि आज तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी, इससे वे न सिर्फ घर बन सका तो सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के तराई इलाके में शारदा नदी की बाढ़ का खतरा बना रहता है। दो दशक पूर्व नदी में आई भीषण बाढ़ ने रमनगरा भुजिया गांव में खूब तबाही मचाई थी। करीब 60 परिवारों की पट्टे की जमीन नदी ने काट दी थी। घर भी नदी के आगोश में समा गए थे।
इसके बाद बेघर हुए परिवार शारदा डैम की तलहटी में आकर बस गए। उस समय प्रशासन ने सुरक्षित जगह जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया, लेकिन आज तक जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर होकर ये परिवार डैम के वर्जित क्षेत्र में ही झोपड़पट्टी डालकर परिवार का भरणपोषण कर रहे हैं।
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बाढ़ से बेघर हुए अशोक राय, लब महंत, विकास राय, संजित सरकार का कहना है कि लंबे समय से जमीन को लेकर मांग कर रहे हैं। पूर्व में क्षेत्र के दौरे पर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भी एक पत्र देकर अपनी समस्या से अवगत कराया था। उनका कहना है कि जमीन न मिलने से सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य माधुरी राहा का कहना है कि सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद को पत्र देकर लोगों की समस्या का समाधान करने की मांग की गई है।
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- पट्टे की जमीन न मिलने से सरकारी योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
कलीनगर। शारदा नदी की बाढ़ से बेघर हुए रमनगरा भुजिया गांव के करीब 60 पट्टेदार दो दशक बीतने के बाद भी परिवार के साथ झोपड़पट्टी में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि आज तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी, इससे वे न सिर्फ घर बन सका तो सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के तराई इलाके में शारदा नदी की बाढ़ का खतरा बना रहता है। दो दशक पूर्व नदी में आई भीषण बाढ़ ने रमनगरा भुजिया गांव में खूब तबाही मचाई थी। करीब 60 परिवारों की पट्टे की जमीन नदी ने काट दी थी। घर भी नदी के आगोश में समा गए थे।
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इसके बाद बेघर हुए परिवार शारदा डैम की तलहटी में आकर बस गए। उस समय प्रशासन ने सुरक्षित जगह जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया, लेकिन आज तक जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। मजबूर होकर ये परिवार डैम के वर्जित क्षेत्र में ही झोपड़पट्टी डालकर परिवार का भरणपोषण कर रहे हैं।
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बाढ़ से बेघर हुए अशोक राय, लब महंत, विकास राय, संजित सरकार का कहना है कि लंबे समय से जमीन को लेकर मांग कर रहे हैं। पूर्व में क्षेत्र के दौरे पर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भी एक पत्र देकर अपनी समस्या से अवगत कराया था। उनका कहना है कि जमीन न मिलने से सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य माधुरी राहा का कहना है कि सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद को पत्र देकर लोगों की समस्या का समाधान करने की मांग की गई है।