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लखनऊ के नंबर की कार से घूमा ठेकेदार, एसटीएफ आने का मचा शोर
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पीलीभीत। लखनऊ के नंबर की कार में ठेकेदार असलहाधारियों के साथ शहर में बीती शाम घूमा तो कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने के लिए एसटीएफ के पहुंचने का शोर मच गया। मामला संज्ञान में आने पर अधिकारियों ने कार पर लिखे नंबर से छानबीन कराई। इसमें ठेकेदार के होने की पुष्टि होने पर अफवाह को शांत कराया गया।
एक दिन पूर्व बुधवार को बरेली से अचानक पीलीभीत पहुंचकर डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने उत्तराखंड सीमा पर मझोला पहुंचकर हालात की जानकारी जुटाई थी। इसे कानपुर हत्याकांड के कुख्यात अपराधी विकास दुबे की धरपकड़ को सुरक्षा बढ़ाने से जोड़कर देखा गया था। इसी बीच शहर में बुधवार शाम टनकपुर हाईवे पर लखनऊ के नंबर की दो कारें दौड़ती दिखीं। उसमें कुछ लोग असलहा लिए भी सवार थे। ऐसे में कुछ ही देर में लखनऊ से विकास दुबे को पकड़ने के लिए एसटीएफ के आने का शोर मच गया। यह अफवाह तेजी से पूरे जनपद में फैलनी शुरू हो गई। इसकी कुछ लोगों ने पुष्टि करने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधा। इसके बाद अधिकारी भी हरकत में आ गए और बताए गए कारों के नंबरों को लेकर छानबीन कराई। एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि लखनऊ से एसटीएफ के आने की अफवाह थी। मगर बाद में स्पष्ट हुआ कि पूरनपुर का रहने वाला एक व्यक्ति लखनऊ में ठेकेदारी करता है। वह उसी की कार थी।
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एक दिन पूर्व बुधवार को बरेली से अचानक पीलीभीत पहुंचकर डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने उत्तराखंड सीमा पर मझोला पहुंचकर हालात की जानकारी जुटाई थी। इसे कानपुर हत्याकांड के कुख्यात अपराधी विकास दुबे की धरपकड़ को सुरक्षा बढ़ाने से जोड़कर देखा गया था। इसी बीच शहर में बुधवार शाम टनकपुर हाईवे पर लखनऊ के नंबर की दो कारें दौड़ती दिखीं। उसमें कुछ लोग असलहा लिए भी सवार थे। ऐसे में कुछ ही देर में लखनऊ से विकास दुबे को पकड़ने के लिए एसटीएफ के आने का शोर मच गया। यह अफवाह तेजी से पूरे जनपद में फैलनी शुरू हो गई। इसकी कुछ लोगों ने पुष्टि करने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधा। इसके बाद अधिकारी भी हरकत में आ गए और बताए गए कारों के नंबरों को लेकर छानबीन कराई। एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि लखनऊ से एसटीएफ के आने की अफवाह थी। मगर बाद में स्पष्ट हुआ कि पूरनपुर का रहने वाला एक व्यक्ति लखनऊ में ठेकेदारी करता है। वह उसी की कार थी।
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