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जरा देखिए साहब! स्कूली बच्चों को भी चूना लगाने से बाज नहीं आएंगे ‘ये सब’
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पीलीभीत। बेसिक शिक्षा विभाग में यूनिफार्म को लेकर बड़ा खेल चल रहा है। कमीशन के फेर मेें शासनादेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सिलवाने के बजाए सिली हुई यूनिफार्म सप्लायर के माध्यम से खरीदकर बांटी जा रहीं हैं। जो ईमानदार शिक्षक हैं उन्हें सप्लायर के आदमी धमका रहे हैं। जिले में कुछ ही स्कूल हैं जहां कपड़ा खरीदकर बच्चों के नाप से यूनिफार्म तैयार कराई गई है। इस तरह स्कूली बच्चों को भी चूना लगाने से सिस्टम बाज नहीं आ रहा है।
5.84 करोड़ का है बजट
बेसिक स्कूलों में बच्चों को निशुल्क यूनिफार्म देने के लिए शासन ने शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही फरमान जारी कर दिया था। शासन ने बच्चों के लिए दो जोड़ी यूनिफार्म प्रति बच्चा देने को 600 रुपये देने की बात कही है। शासन स्तर से जिले में 5,58,61,749 रुपये का बजट उपलब्ध कराया गया है। विभाग ने समस्त विद्यालयों के स्कूल प्रबंध समिति के खातों में 337 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से धनराशि ट्रांसफर की है।
ये है शासनादेश
बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म का वितरण होना है। इसके लिए साफ निर्देश थे कि एक लाख से अधिक की खरीद टेंडर पर होगी। कम धनराशि होने पर विद्यालयों में टेलर बुलाकर बच्चों का नाप लेकर यूनिफार्म सिलवाई जाएगी। वहीं खरीदे जाने वाले कपड़े का मानक 67 फीसदी सूती और 33 फीसदी पॉलिस्टर मिश्रित होना चाहिए।
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सत्ताधारी नेताओं ने इशारे पर हो रहा खेल
शिक्षा विभाग में माफिया की जड़ें काफी गहरी है। उन्होंने शासन की इस योजना पर भी शिकंजा कस दिया है। यह माफिया कोई और नहीं बल्कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के पाले हुए छुटभैये हैं जो खुद तो कमा ही रहे हैं और नेताजी को भी मोटा कमीशन दे रहे हैं। वहीं अफसरों को मोटे कमीशन का लालच मिला तो वे भी सरेंडर होते जा रहे हैं। खेल की सेंटिंग होते ही बरेली के एक सप्लायर से संपर्क करके कई विद्यालयों में यूनिफार्म के वितरण का काम शुरू हो गया है।
अफसरों से शिक्षक तक शामिल
शासन द्वारा पहली किस्त के रूप में 56 प्रतिशत धनराशि दी गई है। माफिया खेल की शुरुआत स्कूल में जाकर ही करते हैं। जिम्मेदार शिक्षक से सेटिंग कर यूनिफार्म का रेट तय लिया जाता है। इसके लिए 120 या 140 रुपये प्रति जोड़ा यूनिफार्म खरीद कर बाकी कमीशन खुद और जिम्मेदार अफसरों की जेबों तक पहुंचा दिया जाता है। कोशिश यही रहती है कि पहली किस्त में मिली धनराशि से दो सभी बच्चों को दो-दो जोड़ी यूनिफार्म दे दी जाए ताकि दूसरी किस्त का आसानी से हजम कर लिया जाए।
ईमानदार शिक्षकों को धमका रहे हैं सप्लायर के लोग
ऐसा भी नहीं कि सभी शिक्षक कमीशनखोरी कर रहे हैं। विभाग में कई ईमादानदार छवि के शिक्षक है, लेकिन इन दिनों इन शिक्षकों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। ठेके पर यूनिफार्म न लेने पर इन्हें धमकाया जा रहा है। एक शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि दो लोग आए थे। मैंने ठेके पर यूनिफार्म लेने से मना किया तो बोले मैं विधायक का आदमी हूं। चुपचाप आर्डर दे दो।
महज 30 फीसदी बांटी गईं यूनिफार्म
विभाग द्वारा चलाई जा रही कवायद के बाद भी मात्र 30 फीसदी बच्चों को यूनिफार्म दी गई है। जबकि शासन ने 15 जुलाई तक यूनिफार्म वितरण के निर्देश दिए थे।
क्या कहते हैं बच्चे:
मुझे इस बार अभी तक यूनिफार्म ही नहीं मिली। पिछले साल भी देर से मिली थी।
- सारिका, छात्रा मॉडल स्कूल भीमसेन ब्रजरानी
मुझे पुरानी यूनिफार्म ही पहनकर स्कूल आना पड़ रहा है क्योंकि अभी नई यूनिफार्म मिली ही नहीं है।
- अंकित, छात्र प्राथमिक विद्यालय बाग गुलशेर खां
मेेरे दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन दोनों को अब तक यूनिफार्म नहीं मिली है। पता करा तो कह रहे हैं जल्दी मिलने वाली है।
-पवन वर्मा, मरौरी खास
यूनिफार्म का तो सिर्फ नाम है। इतना घटिया कपड़ा दिया जाता है कि साल भर तक नहीं चलता। सरकारी को अच्छा कपड़ा देना चाहिए।
- मायाराम, तकिया दीनारपुर
अभी तक मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं आया है। शिक्षकों को गुणवत्तापरक यूनिफार्म वितरण के निर्देेश दिए गए हैं। लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। गड़बड़ी मिलने पर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी।
-देवेंद्र स्वरूप, बीएसए
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5.84 करोड़ का है बजट
बेसिक स्कूलों में बच्चों को निशुल्क यूनिफार्म देने के लिए शासन ने शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही फरमान जारी कर दिया था। शासन ने बच्चों के लिए दो जोड़ी यूनिफार्म प्रति बच्चा देने को 600 रुपये देने की बात कही है। शासन स्तर से जिले में 5,58,61,749 रुपये का बजट उपलब्ध कराया गया है। विभाग ने समस्त विद्यालयों के स्कूल प्रबंध समिति के खातों में 337 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से धनराशि ट्रांसफर की है।
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ये है शासनादेश
बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म का वितरण होना है। इसके लिए साफ निर्देश थे कि एक लाख से अधिक की खरीद टेंडर पर होगी। कम धनराशि होने पर विद्यालयों में टेलर बुलाकर बच्चों का नाप लेकर यूनिफार्म सिलवाई जाएगी। वहीं खरीदे जाने वाले कपड़े का मानक 67 फीसदी सूती और 33 फीसदी पॉलिस्टर मिश्रित होना चाहिए।
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सत्ताधारी नेताओं ने इशारे पर हो रहा खेल
शिक्षा विभाग में माफिया की जड़ें काफी गहरी है। उन्होंने शासन की इस योजना पर भी शिकंजा कस दिया है। यह माफिया कोई और नहीं बल्कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के पाले हुए छुटभैये हैं जो खुद तो कमा ही रहे हैं और नेताजी को भी मोटा कमीशन दे रहे हैं। वहीं अफसरों को मोटे कमीशन का लालच मिला तो वे भी सरेंडर होते जा रहे हैं। खेल की सेंटिंग होते ही बरेली के एक सप्लायर से संपर्क करके कई विद्यालयों में यूनिफार्म के वितरण का काम शुरू हो गया है।
अफसरों से शिक्षक तक शामिल
शासन द्वारा पहली किस्त के रूप में 56 प्रतिशत धनराशि दी गई है। माफिया खेल की शुरुआत स्कूल में जाकर ही करते हैं। जिम्मेदार शिक्षक से सेटिंग कर यूनिफार्म का रेट तय लिया जाता है। इसके लिए 120 या 140 रुपये प्रति जोड़ा यूनिफार्म खरीद कर बाकी कमीशन खुद और जिम्मेदार अफसरों की जेबों तक पहुंचा दिया जाता है। कोशिश यही रहती है कि पहली किस्त में मिली धनराशि से दो सभी बच्चों को दो-दो जोड़ी यूनिफार्म दे दी जाए ताकि दूसरी किस्त का आसानी से हजम कर लिया जाए।
ईमानदार शिक्षकों को धमका रहे हैं सप्लायर के लोग
ऐसा भी नहीं कि सभी शिक्षक कमीशनखोरी कर रहे हैं। विभाग में कई ईमादानदार छवि के शिक्षक है, लेकिन इन दिनों इन शिक्षकों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। ठेके पर यूनिफार्म न लेने पर इन्हें धमकाया जा रहा है। एक शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि दो लोग आए थे। मैंने ठेके पर यूनिफार्म लेने से मना किया तो बोले मैं विधायक का आदमी हूं। चुपचाप आर्डर दे दो।
महज 30 फीसदी बांटी गईं यूनिफार्म
विभाग द्वारा चलाई जा रही कवायद के बाद भी मात्र 30 फीसदी बच्चों को यूनिफार्म दी गई है। जबकि शासन ने 15 जुलाई तक यूनिफार्म वितरण के निर्देश दिए थे।
क्या कहते हैं बच्चे:
मुझे इस बार अभी तक यूनिफार्म ही नहीं मिली। पिछले साल भी देर से मिली थी।
- सारिका, छात्रा मॉडल स्कूल भीमसेन ब्रजरानी
मुझे पुरानी यूनिफार्म ही पहनकर स्कूल आना पड़ रहा है क्योंकि अभी नई यूनिफार्म मिली ही नहीं है।
- अंकित, छात्र प्राथमिक विद्यालय बाग गुलशेर खां
मेेरे दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन दोनों को अब तक यूनिफार्म नहीं मिली है। पता करा तो कह रहे हैं जल्दी मिलने वाली है।
-पवन वर्मा, मरौरी खास
यूनिफार्म का तो सिर्फ नाम है। इतना घटिया कपड़ा दिया जाता है कि साल भर तक नहीं चलता। सरकारी को अच्छा कपड़ा देना चाहिए।
- मायाराम, तकिया दीनारपुर
अभी तक मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं आया है। शिक्षकों को गुणवत्तापरक यूनिफार्म वितरण के निर्देेश दिए गए हैं। लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। गड़बड़ी मिलने पर हर हाल में कार्रवाई की जाएगी।
-देवेंद्र स्वरूप, बीएसए