दवा को दारू समझ गटक रहे लोग: पीलीभीत-नेपाल बॉर्डर तक फैला इन दवाओं का बाजार, इसलिए ये नशेड़ियों की पहली पसंद
बीसलपुर, पूरनपुर, कलीनगर तहसील के गांवों में नशे की दवाओं का सेवन करने वाले युवाओं की संख्या अच्छी खासी है। यहां मेडिकल स्टोरों पर ये दवाइयां आसानी से मिल जाती हैं। इनमें कफ सिरप नशे के लती युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। दरअसल, खांसी में इस्तेमाल होने वाले कुछ सीरप में कोडीन साल्ट होता है।
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पीलीभीत में दवा के नाम पर बिक रहे कफ सिरप नशे के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। वजह यह है कि कप सिरप आसानी से बाजार में उपलब्ध रहते हैं। जिले में शहर से लेकर देहात तक इसका जाल फैला है। नेपाल और उत्तराखंड बॉर्डर से सटे इलाके में इसकी तस्करी हो रही है। शासन अब नशे के कारोबारियों को पकड़ने के लिए अभियान चलाने जा रहा है।
बीसलपुर, पूरनपुर, कलीनगर तहसील के गांवों में नशे की दवाओं का सेवन करने वाले युवाओं की संख्या अच्छी खासी है। यहां मेडिकल स्टोरों पर ये दवाइयां आसानी से मिल जाती हैं। इनमें कफ सिरप नशे के लती युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। दरअसल, खांसी में इस्तेमाल होने वाले कुछ सीरप में कोडीन साल्ट होता है। जिसमें कोडीन की मात्रा 10 प्रतिशत होती है।
वर्तमान में कोडीस्टार, कोरेक्स-टी सिरप नशेड़ियों की पहली पसंद बने हुए हैं। यह इसलिए भी पसंद है कि इसमें दुर्गंध नहीं आती। पक्के बिल पर ही इन सीरप या दवाइयों को मेडिकल स्टोरों पर रखा जा सकता है। एमबीबीएस चिकित्सक के पर्चे पर ही इसको बेचा जा सकता है। लेकिन नशेड़ी ज्यादा दाम चुकाकर मेडिकल स्टोरों से इसे आसानी से हासिल कर लेते हैं। एक दवा कारोबारी के अनुसार जिले में करीब एक से डेढ़ हजार कोडीनयुक्त कफ सिरप एक दिन में बिक जाते हैं।
नेपाल बॉर्डर पर बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी
नेपाल बार्डर पर बड़े पैमाने पर इन दवाओं की तस्करी हो रही है। बीती पांच मई को नेपाल बार्डर के पास गभिया सहराई गांव में एक मेडिकल स्टोर से 6.40 लाख रुपये की ऐसी दवाइयां बरामद हुई थीं। इसमें कोडीन युक्त कफ सिरप भी शामिल थे। इसके अलावा दो माह पूर्व रमनगरा गांव एक मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाइयां बरामद हुई थीं।
आगरा और बरेली बनी दवा की बड़ी मंडी
आगरा और बरेली दवा की बड़ी मंडी है। यहां से थोक में दवाएं मंगवाई जाती हैं। पिछले कुछेक सालों में आगर का काम काफी बढ़ा है। नेपाल और उत्तराखंड में नशीली दवाओं को तस्करी कर भेजा जा रहा है। औषधि विभाग ने इस पर शिकंजा कसने के लिए काफी नियम कानून बनाए हैं। पक्के बिल पर ही दवाइयां खरीदी बेची जा सकती हैं। लेकिन दवा विक्रेता भी कम नहीं है। मेडिकल स्टोर पर कुछेक सिरप रखे जाते हैं। स्टाक कहीं दूसरी जगह रखा जाता है। 70 रुपये वाला सिरप 150-200 रुपये तक में बेचा जाता है।
पीलीभीत में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां नशे की दवाइयों की खपत के मामले सामने आए हैं। नशे के कारोबारियों को पकड़ने के लिए जल्द ही अभियान चलाने जा रहे हैं। -संजय यादव, औषधि उपायुक्त