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प्रवासियों की निगरानी को बनी समिति पर प्रधानों ने उठाए सवाल
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बीसलपुर। महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात जैसे संक्रमित क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी मजदूरों की निगरानी के लिए बनीं समितियों पर प्रधानों ने ही सवाल उठा दिए हैं। उनका कहना है कि अफसरों ने कई जगह फर्जी समितियां बना दी हैं। इन्हीं वजहों से होम कवारंटीन प्रवासी मजदूर गांवों में खुलेआम घूम रहे हैं।
जब से प्रवासी मजदूरों व अन्य के आने का सिलसिला शुरू हुआ है, तब से एकाएक कोरोना संक्रमितों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जनपद में कोरोना संक्रमण के 20 मौजूदा मामले हैं। स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन के लिए गांवों में पहुंचे प्रवासी मजदूरों पर नजर रखने के लिए 17 मई तक निगरानी समितियां गठित की गई थीं। इनकी सूची जनपद मुख्यालय भी भेजने को कहा गया था। ब्लॉक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आनन फानन में निगरानी समितियों का गठन सूची भी भेज दी, मगर हकीकत में ये समितियां कागजों में ही दौड़ रही हैं। बिलसंडा ब्लॉक के अभिलेखों के अनुसार 100 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियां गठित हुई है, मगर इनमें से कई को लेकर सवाल उठे हैं।
समितियों में ये किए गए हैं शामिल
निगरानी समितियों में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, एएनएम, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर, कोटेदार समेत कुछ जागरूक ग्राम पंचायत सदस्यों को शामिल किया गया है। कुल मिलाकर 15 से 17 लोग इसमें शामिल किए गए हैं।
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निगरानी समितियों के ये हैं काम
निगरानी समितियों का दायित्व है कि समिति के सदस्य बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों को ढूंढें। फिर सीएचसी में लाकर उनकी स्क्रीनिंग कराएं। जो श्रमिक बाहर से आकर होम क्वारंटीन हुए हैं, वे नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी देखरेख करें। अगर कोई प्रवासी उनकी बात न माने तो उनकी कंट्रोल रूम को सूचना दें। ग्रामीणों को कोरोना की भयावहता के बारे में जागरूक करें। घरों में क्वारंटीन मजदूरों पर विशेष नजर रखें। लॉकडाउन का पालन करने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करें। लॉकडाउन तोड़ने वालों की सूचना दें। सरकारी रजिस्टर में तो निगरानी समिति का काम ठीक चल रहा है, मगर हकीकत कुछ और है। अधिकांश निगरानी समितियों का गठन ग्राम पंचायत या ग्राम विकास अधिकारियों केे स्तर से किया गया है। ये अधिकारी गांव गए तक नहीं और समितियां बना दीं।
बोले प्रधान
निगरानी समिति के फर्जी गठन की जांच हो
मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति नहीं बनी। ब्लॉक के अभिलेखों में मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन दिखाया गया है तो फिर वह 100 फीसदी फर्जी है। गलत सूचना देने की जांच होनी चाहिए। ऐसे अधिकारी या कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई हो। -ज्ञानवती मिश्रा, ग्राम प्रधान बमरोली।
केवल पांच नाम आए, कैसे बनेगी समिति
मैंने ग्राम पंचायत अधिकारी को निगरानी समिति गठित करने के लिए गांव से पांच नाम दे दिए हैं। निगरानी समिति में कम से कम 15 सदस्य होने चाहिए। मैं तो यही कहूंगा कि अभी मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति नहीं बन पाई है। न ही बाहर से आए प्रवासी मजदूरों की निगरानी हो पा रही है। -राजाराम ग्राम प्रधान किशनपुर।
अभी दो या तीन दिन लगेंगे
मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन नहीं हो पाया है। निगरानी समिति गठन के संबंध में औपचारिकताएं पूरी कर ली गई। दो या तीन दिन में समिति का गठन हो जाएगा। अभी बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों की निगरानी नहीं हो पा रही है। -बीना अवस्थी, प्रधान मरौरी खास
नांद के प्रधान बोले- बरेली से लौटकर करेंगे गठन
हम एक गंभीर मरीज लेकर बरेली के एक अस्पताल में आए हैं। मरीज का इलाज कराने के बाद गांव लौटेंगे, तब निगरानी समिति का गठन करेंगे। मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन नहीं हो पाया है। अगर कोई कह रहा है कि समिति बन गई तो झूठ बोल रहा है। -देवपाल ग्राम प्रधान नांद।
बोले अधिकारी
सभी पंचायतों में हो गया गठन
ब्लॉक की सभी 100 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों का गठन हो चुका है। एक समिति में न्यूनतम 15 और अधिकतम 17 सदस्य शामिल किए गए हैं। अभिलेखों में सदस्यों के मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं। निगरानी समितियां सौंपे गए काम अपने गांवों में करा रही हैं। -पीएन द्विवेदी, बीडीओ बिलसंडा।
721 ग्राम पंचायतों में निगरानी समिति बनाई गई है। इनमें प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक, कोटेदोर, आशा, एएनएम को शामिल किया गया है। समितियों को उनके काम से परिचित करा दिया गया है। इनकी मॉनिटरिंग भी कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग अलग से टीमें बनाकर निगरानी समिति के काम की मॉनिटरिंग कर रहा है। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
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जब से प्रवासी मजदूरों व अन्य के आने का सिलसिला शुरू हुआ है, तब से एकाएक कोरोना संक्रमितों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जनपद में कोरोना संक्रमण के 20 मौजूदा मामले हैं। स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन के लिए गांवों में पहुंचे प्रवासी मजदूरों पर नजर रखने के लिए 17 मई तक निगरानी समितियां गठित की गई थीं। इनकी सूची जनपद मुख्यालय भी भेजने को कहा गया था। ब्लॉक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आनन फानन में निगरानी समितियों का गठन सूची भी भेज दी, मगर हकीकत में ये समितियां कागजों में ही दौड़ रही हैं। बिलसंडा ब्लॉक के अभिलेखों के अनुसार 100 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियां गठित हुई है, मगर इनमें से कई को लेकर सवाल उठे हैं।
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समितियों में ये किए गए हैं शामिल
निगरानी समितियों में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, एएनएम, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर, कोटेदार समेत कुछ जागरूक ग्राम पंचायत सदस्यों को शामिल किया गया है। कुल मिलाकर 15 से 17 लोग इसमें शामिल किए गए हैं।
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निगरानी समितियों के ये हैं काम
निगरानी समितियों का दायित्व है कि समिति के सदस्य बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों को ढूंढें। फिर सीएचसी में लाकर उनकी स्क्रीनिंग कराएं। जो श्रमिक बाहर से आकर होम क्वारंटीन हुए हैं, वे नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी देखरेख करें। अगर कोई प्रवासी उनकी बात न माने तो उनकी कंट्रोल रूम को सूचना दें। ग्रामीणों को कोरोना की भयावहता के बारे में जागरूक करें। घरों में क्वारंटीन मजदूरों पर विशेष नजर रखें। लॉकडाउन का पालन करने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करें। लॉकडाउन तोड़ने वालों की सूचना दें। सरकारी रजिस्टर में तो निगरानी समिति का काम ठीक चल रहा है, मगर हकीकत कुछ और है। अधिकांश निगरानी समितियों का गठन ग्राम पंचायत या ग्राम विकास अधिकारियों केे स्तर से किया गया है। ये अधिकारी गांव गए तक नहीं और समितियां बना दीं।
बोले प्रधान
निगरानी समिति के फर्जी गठन की जांच हो
मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति नहीं बनी। ब्लॉक के अभिलेखों में मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन दिखाया गया है तो फिर वह 100 फीसदी फर्जी है। गलत सूचना देने की जांच होनी चाहिए। ऐसे अधिकारी या कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई हो। -ज्ञानवती मिश्रा, ग्राम प्रधान बमरोली।
केवल पांच नाम आए, कैसे बनेगी समिति
मैंने ग्राम पंचायत अधिकारी को निगरानी समिति गठित करने के लिए गांव से पांच नाम दे दिए हैं। निगरानी समिति में कम से कम 15 सदस्य होने चाहिए। मैं तो यही कहूंगा कि अभी मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति नहीं बन पाई है। न ही बाहर से आए प्रवासी मजदूरों की निगरानी हो पा रही है। -राजाराम ग्राम प्रधान किशनपुर।
अभी दो या तीन दिन लगेंगे
मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन नहीं हो पाया है। निगरानी समिति गठन के संबंध में औपचारिकताएं पूरी कर ली गई। दो या तीन दिन में समिति का गठन हो जाएगा। अभी बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों की निगरानी नहीं हो पा रही है। -बीना अवस्थी, प्रधान मरौरी खास
नांद के प्रधान बोले- बरेली से लौटकर करेंगे गठन
हम एक गंभीर मरीज लेकर बरेली के एक अस्पताल में आए हैं। मरीज का इलाज कराने के बाद गांव लौटेंगे, तब निगरानी समिति का गठन करेंगे। मेरी ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन नहीं हो पाया है। अगर कोई कह रहा है कि समिति बन गई तो झूठ बोल रहा है। -देवपाल ग्राम प्रधान नांद।
बोले अधिकारी
सभी पंचायतों में हो गया गठन
ब्लॉक की सभी 100 ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों का गठन हो चुका है। एक समिति में न्यूनतम 15 और अधिकतम 17 सदस्य शामिल किए गए हैं। अभिलेखों में सदस्यों के मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं। निगरानी समितियां सौंपे गए काम अपने गांवों में करा रही हैं। -पीएन द्विवेदी, बीडीओ बिलसंडा।
721 ग्राम पंचायतों में निगरानी समिति बनाई गई है। इनमें प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक, कोटेदोर, आशा, एएनएम को शामिल किया गया है। समितियों को उनके काम से परिचित करा दिया गया है। इनकी मॉनिटरिंग भी कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग अलग से टीमें बनाकर निगरानी समिति के काम की मॉनिटरिंग कर रहा है। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ