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134 गायों के गायब होने के मामले में शासन को भेजी गई रिपोर्ट
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पीलीभीत। देवीपुरा गोशाला से 134 गायों के गायब होने के मामले में डीएम ने मजिस्ट्रियल जांच पूरी होने के बाद शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जांच में 134 गायों के गायब होने का जिक्र नहीं है, बल्कि छह गायों की मौत के बाद उन्हें गोशाला के पीछे दफनाकर मामला छिपाया जाना बताया गया है। जांच में यह भी संकेत दिया गया है कि मृत या गोशाला से गायब गायों की संख्या छह से अधिक हो सकती है। डीएम ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसमें गोशाला की गायों की मौत का जिम्मेदार तत्कालीन (अब रिटायर्ड) मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की कार्यप्रणाली को मानकर उनके खिलाफ भी कार्रवाई करने की संस्तुति की गई है।
जनपद में 29 गोशालाएं हैं। वर्तमान में 11 गोशाला में गायें रखी जा रही हैं। पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग पर शहर से सटी देवीपुरा गोशाला में मार्च के आखिरी हफ्ते में 134 गायों को भरा पचपेड़ा गोशाला में शिफ्ट कराने के लिए वहां से निकाला गया। हालांकि गोशाला कर्मचारियों के अनुसार वहां से केवल कागजों में ही गायों को शिफ्ट करना दर्शाया गया, जबकि हकीकत में एक भी गाय बाहर नहीं निकली। गोशाला कर्मचारियों का कहना है कि बीच में कुछ गाय मर गई थीं। उन्हें गोशाला के पीछे ही खाली पड़ी जमीन पर दफना दिया गया। पशुपालन विभाग के अफसरों ने उन गायों को ही भरा पचपेड़ा में शिफ्ट कराना दिखाया, जबकि वहां की गोशाला में इस साल देवीपुरा गोशाला से एक भी गाय नहीं भेजी गई। स्थानीय प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई। तीन सदस्यीय जांच टीम में एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप मिश्र, एएसपी रोहित मिश्र और पशु चिकित्साधिकारी अखिलेश गर्ग थे। जांच टीम ने गोशाला पहुंचकर स्टाफ के बयान लिए और मौके पर मिले अभिलखों को भी कब्जे में ले लिया। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में यह बताया गया कि देवीपुरा गोशाला में केवल छह गाय मरी थीं। उन्हें गोशाला के पीछे ही खाली पड़ी जमीन पर दफना दिया गया। अधिकारियों ने यह अंदेशा जताया है कि मृत या गोशाला से गायब गायों की संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है।
गोशाला कर्मचारी ने ही बताया था कि 134 गाय बाहर गईं
व्यवस्थापक ओमप्रकाश ने ही कुछ दिन पहले इस बात का खुलासा किया था कि देवीपुरा गोशाला से 28 मार्च को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से 134 गायों को भरा पचपेड़ा ले जाया गया था। मगर, वे गाय वहां नहीं पहुंची। उन्होंने यह भी बताया था कि इन गायों का विवरण पशुपालन विभाग के अधिकारियों के कहने पर उसने रजिस्टर में भी दर्ज किया था। बाद में ओमप्रकाश ने यह कह दिया था कि गाय गोशाला से बाहर नहीं गईं। सर्दियों में धीरे-धीरे गायों की मौत होती रही। तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के निर्देश पर उन्हें गोशाला के पीछे खाली जमीन पर दफनाया जाता रहा। ऐसे में जब गायों की संख्या कम होने लगी तो उन्हें भरा पचपेड़ा गोशाला में ले जाया जाना दिखाया गया। व्यवस्थापक ओमप्रकाश के बदलते बयान गायों के गायब होने के पीछे के खेल की ओर इशारा कर रहे हैं।
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बिना पोस्टमार्टम हो गया शवों का निस्तारण
गोशाला के रजिस्टर में तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा अपने रिटायरमेंट से पहले कुछ मृत गायों का विवरण दर्ज कराया गया है। इसमें इन मृत गायों के शवों का बिना पोस्टमार्टम ही निस्तारण करा दिया गया। प्रशासन ने शासन को भेजी रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में पाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि यदि शासन को इस प्रकरण में अपने स्तर से जांच की जरूरत लगे तो इस प्रकरण में दोबारा जांच भी कराई जा सकती है।
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जनपद में 29 गोशालाएं हैं। वर्तमान में 11 गोशाला में गायें रखी जा रही हैं। पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग पर शहर से सटी देवीपुरा गोशाला में मार्च के आखिरी हफ्ते में 134 गायों को भरा पचपेड़ा गोशाला में शिफ्ट कराने के लिए वहां से निकाला गया। हालांकि गोशाला कर्मचारियों के अनुसार वहां से केवल कागजों में ही गायों को शिफ्ट करना दर्शाया गया, जबकि हकीकत में एक भी गाय बाहर नहीं निकली। गोशाला कर्मचारियों का कहना है कि बीच में कुछ गाय मर गई थीं। उन्हें गोशाला के पीछे ही खाली पड़ी जमीन पर दफना दिया गया। पशुपालन विभाग के अफसरों ने उन गायों को ही भरा पचपेड़ा में शिफ्ट कराना दिखाया, जबकि वहां की गोशाला में इस साल देवीपुरा गोशाला से एक भी गाय नहीं भेजी गई। स्थानीय प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई। तीन सदस्यीय जांच टीम में एडीएम न्यायिक देवेंद्र प्रताप मिश्र, एएसपी रोहित मिश्र और पशु चिकित्साधिकारी अखिलेश गर्ग थे। जांच टीम ने गोशाला पहुंचकर स्टाफ के बयान लिए और मौके पर मिले अभिलखों को भी कब्जे में ले लिया। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में यह बताया गया कि देवीपुरा गोशाला में केवल छह गाय मरी थीं। उन्हें गोशाला के पीछे ही खाली पड़ी जमीन पर दफना दिया गया। अधिकारियों ने यह अंदेशा जताया है कि मृत या गोशाला से गायब गायों की संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है।
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गोशाला कर्मचारी ने ही बताया था कि 134 गाय बाहर गईं
व्यवस्थापक ओमप्रकाश ने ही कुछ दिन पहले इस बात का खुलासा किया था कि देवीपुरा गोशाला से 28 मार्च को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से 134 गायों को भरा पचपेड़ा ले जाया गया था। मगर, वे गाय वहां नहीं पहुंची। उन्होंने यह भी बताया था कि इन गायों का विवरण पशुपालन विभाग के अधिकारियों के कहने पर उसने रजिस्टर में भी दर्ज किया था। बाद में ओमप्रकाश ने यह कह दिया था कि गाय गोशाला से बाहर नहीं गईं। सर्दियों में धीरे-धीरे गायों की मौत होती रही। तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के निर्देश पर उन्हें गोशाला के पीछे खाली जमीन पर दफनाया जाता रहा। ऐसे में जब गायों की संख्या कम होने लगी तो उन्हें भरा पचपेड़ा गोशाला में ले जाया जाना दिखाया गया। व्यवस्थापक ओमप्रकाश के बदलते बयान गायों के गायब होने के पीछे के खेल की ओर इशारा कर रहे हैं।
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बिना पोस्टमार्टम हो गया शवों का निस्तारण
गोशाला के रजिस्टर में तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा अपने रिटायरमेंट से पहले कुछ मृत गायों का विवरण दर्ज कराया गया है। इसमें इन मृत गायों के शवों का बिना पोस्टमार्टम ही निस्तारण करा दिया गया। प्रशासन ने शासन को भेजी रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में पाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि यदि शासन को इस प्रकरण में अपने स्तर से जांच की जरूरत लगे तो इस प्रकरण में दोबारा जांच भी कराई जा सकती है।