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पीलीभीत टाइगर रिजर्व के क्षेत्र मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए संवाद
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मानव वन्य-जीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए सांसद वरुण गांधी ने गुरुवार को वर्चुअल संवाद किया। वर्चुअल बैठक की शुरूआत करते हुए पर्यावरण प्रेमी केशव अग्रवाल ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आए दिन बाघ के सड़क पर आने और मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने के साथ इसके कारण और निवारण को लेकर सुझाव दिए। इसके बाद सांसद वरुण गांधी ने अधिकारियों से समस्या का समाधान तलाशने के लिए उचित कदम उठाने के लिए संवाद किया।
संवाद में अतिरिक्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व) कमलेश कुमार, जिलाधिकारी पुलकित खरे, मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उप निदेशक नवीन खंडेलवाल, विश्व प्रकृति निधि के क्षेत्रीय कोआर्डिनेटर डॉ. मुदित गु्ता, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी विश्व प्रकृति निधि नरेश कुमार, वन्य जीव प्रेमी कौशलेंद्र सिंह, पत्रकार केशव अग्रवाल व अमिताभ अग्निहोत्री शामिल हुए।
बैठक में बताया गया कि पीटीआर करीब 620 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में है। इतने क्षेत्र 30-35 बाघों के लिए पर्याप्त है लेकिन यहां पर बाघ की संख्या अब 60-65 से अधिक है। जंगल क्षेत्र के आसपास गन्ने की खेती हो रही है। जंगल और गन्ने के खेत में बाघ अंतर नहीं कर पाते । इसलिए बाघ जंगल से बाहर आते है और आए दिन मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं होती हैं। अगर इन घटनाओं को रोकना है तो जंगल के आसपास गन्ने के स्थान पर औषधीय पौधों की खेती की जाए।
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साथ ही जो क्षेत्रफल के हिसाब जितने बाघ अधिक हो रहे हैं, उन्हें चित्रकूट, सुहानी परवा और सुहेलवा फॉरेस्ट रेंज में पुनर्वासित किया जाए। संवाद में सुझाव सामने आने के बाद इस संबंध में विशेषज्ञ टीमों को बुलाने और जरूरी आकलन कराए जाने पर सहमति बनी। साथ ही अगली वर्चुअल बैठक जल्दी करने का निर्णय लिया गया।
मैं दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलूंगा, ताकि पीलीभीत टाइगर रिजर्व की किसी परियोजना के लिए धनराशि की कमी न होने पाए।
- वरुण गांधी सांसद
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संवाद में अतिरिक्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व) कमलेश कुमार, जिलाधिकारी पुलकित खरे, मुख्य वन संरक्षक ललित वर्मा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उप निदेशक नवीन खंडेलवाल, विश्व प्रकृति निधि के क्षेत्रीय कोआर्डिनेटर डॉ. मुदित गु्ता, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी विश्व प्रकृति निधि नरेश कुमार, वन्य जीव प्रेमी कौशलेंद्र सिंह, पत्रकार केशव अग्रवाल व अमिताभ अग्निहोत्री शामिल हुए।
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बैठक में बताया गया कि पीटीआर करीब 620 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में है। इतने क्षेत्र 30-35 बाघों के लिए पर्याप्त है लेकिन यहां पर बाघ की संख्या अब 60-65 से अधिक है। जंगल क्षेत्र के आसपास गन्ने की खेती हो रही है। जंगल और गन्ने के खेत में बाघ अंतर नहीं कर पाते । इसलिए बाघ जंगल से बाहर आते है और आए दिन मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं होती हैं। अगर इन घटनाओं को रोकना है तो जंगल के आसपास गन्ने के स्थान पर औषधीय पौधों की खेती की जाए।
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साथ ही जो क्षेत्रफल के हिसाब जितने बाघ अधिक हो रहे हैं, उन्हें चित्रकूट, सुहानी परवा और सुहेलवा फॉरेस्ट रेंज में पुनर्वासित किया जाए। संवाद में सुझाव सामने आने के बाद इस संबंध में विशेषज्ञ टीमों को बुलाने और जरूरी आकलन कराए जाने पर सहमति बनी। साथ ही अगली वर्चुअल बैठक जल्दी करने का निर्णय लिया गया।
मैं दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलूंगा, ताकि पीलीभीत टाइगर रिजर्व की किसी परियोजना के लिए धनराशि की कमी न होने पाए।
- वरुण गांधी सांसद