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कूड़ेदान में करोड़ो हजम कर गए सचिव-प्रधान, नोटिस का जवाब भी नहीं भेजा
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पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखने के नाम पर किए गए घोटाले का खुलासा होने के बाद प्रशासन की ओर से सख्ती की गई। प्रधानों और सचिवों को नोटिस दिए गए, लेकिन उनमें से किसी पर इस सख्ती का असर नहीं दिखाई दिया।
डीएम के आदेश पर बनी कमेटी की जांच के बाद पहले 168 प्रधानों को नोटिस दिए गए थे। दस दिन पहले 44 ग्राम पंचायतों के सचिवों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। सचिवों को एक सप्ताह में नोटिस का जवाब देना था, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी किसी प्रधान या सचिव ने नोटिस का जवाब नहीं दिया।
ग्रामीण क्षेत्र को स्वच्छ रखने के लिए केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखवाए गए थे। इसमें सचिवों और प्रधानों ने ड्रम काटकर कूड़ेदान बनवा दिए और 7 हजार रुपये प्रति कूड़ेदान की दर से भुगतान दिखाकर करोड़ों की घपलेबाजी कर दी। कूड़ेदान को महज एक हजार रुपये में खरीदकर कर कागजों को अधिक दामों में दर्शाकर बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया। शिकायतें होने पर जांच हुई तो मामले सामने आया। जांच में कूड़ेदान ड्रम काटकर बनवाए पाए गए। इनकी कीमत बाजार में एक हजार भी नहीं थी, मगर, उनको सात हजार में खरीदना दिखा दिया। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने ब्लॉक स्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराई। कमेटी की जांच रिपोर्ट ने प्रधानों को कटघरे में खड़ा कर दिया। 164 ग्राम पंचायत के प्रधानों को नोटिस जारी हुए। कूड़ेदान घपले में सचिवों की स्थिति भी गड़बड़ मिलने पर 10 दिन पहले 40 सचिवों को नोटिस जारी किए गए। जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। 10 दिन बीतने के बाद भी न तो सचिव और न ही प्रधानों ने नोटिस का जवाब भेजा।
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नोटिस का जवाब देने का समय एक सप्ताह तय किया था। डाक से नोटिस भेजे गए, पहुंचने की तारीख अलग है। अभी नोटिस के जवाब का इंतजार है। उसके बाद कार्रवाई होगी। - प्रमोद कुमार, डीपीआरओ
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डीएम के आदेश पर बनी कमेटी की जांच के बाद पहले 168 प्रधानों को नोटिस दिए गए थे। दस दिन पहले 44 ग्राम पंचायतों के सचिवों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। सचिवों को एक सप्ताह में नोटिस का जवाब देना था, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी किसी प्रधान या सचिव ने नोटिस का जवाब नहीं दिया।
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ग्रामीण क्षेत्र को स्वच्छ रखने के लिए केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखवाए गए थे। इसमें सचिवों और प्रधानों ने ड्रम काटकर कूड़ेदान बनवा दिए और 7 हजार रुपये प्रति कूड़ेदान की दर से भुगतान दिखाकर करोड़ों की घपलेबाजी कर दी। कूड़ेदान को महज एक हजार रुपये में खरीदकर कर कागजों को अधिक दामों में दर्शाकर बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया। शिकायतें होने पर जांच हुई तो मामले सामने आया। जांच में कूड़ेदान ड्रम काटकर बनवाए पाए गए। इनकी कीमत बाजार में एक हजार भी नहीं थी, मगर, उनको सात हजार में खरीदना दिखा दिया। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने ब्लॉक स्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराई। कमेटी की जांच रिपोर्ट ने प्रधानों को कटघरे में खड़ा कर दिया। 164 ग्राम पंचायत के प्रधानों को नोटिस जारी हुए। कूड़ेदान घपले में सचिवों की स्थिति भी गड़बड़ मिलने पर 10 दिन पहले 40 सचिवों को नोटिस जारी किए गए। जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। 10 दिन बीतने के बाद भी न तो सचिव और न ही प्रधानों ने नोटिस का जवाब भेजा।
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नोटिस का जवाब देने का समय एक सप्ताह तय किया था। डाक से नोटिस भेजे गए, पहुंचने की तारीख अलग है। अभी नोटिस के जवाब का इंतजार है। उसके बाद कार्रवाई होगी। - प्रमोद कुमार, डीपीआरओ