{"_id":"860d27e571317a1df496b4c6b4ce411d","slug":"dam-hindi-news-4","type":"story","status":"publish","title_hn":"शारदा नदी पर नहीं बन सका तटबंध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शारदा नदी पर नहीं बन सका तटबंध
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Fri, 26 Jun 2015 12:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हालांकि पूरे वर्ष शासन से लेकर न्यायपालिका तक शारदा पर तटबंध बनाने व बाढ़ नियंत्रण योजनाएं बनाने की कोशिशें होती रहीं, लेकिन पहला मौका है कि एक योजना पर भी कार्य शुरू नहीं हो सका।
शारदा नदी जिसे नेपाल में महाकाली के नाम से जाना जाता है, भारतीय क्षेत्र में जनपद के नौजल्हा नंबर दो से प्रवेश करती है। नोमेंस लैंड पर सनेड़ी नदी भी शारदा में मिल जाती है।
यहां से शुरू होता है तबाही का दौर
नौजल्हा नंबर दो में नदी के बांये किनारे पर लग्गा भग्गा का जंगल है। जंगल का हर साल कटान नदी करती है। चूंकि 22 किमी लंबा शारदा डैम भी नदी के दांए किनारे पर ही है। इसके चलते पिछले वर्षों में यहां सेकेंड मार्जिनल बांध व पत्थर की ठोकरें बनाई गई थीं, लेकिन नदी में बाढ़ आने के दौरान गत वर्ष अधिकांश ठोकरें नदी के गर्भ में समा गई थीं। इस दौरान 34 परिवारों की आवसीय भूमि भी कट गई थी।
विज्ञापन
दौड़भाग के बावजूद नहीं शुरू हो सके कार्य
सिंचाई विभाग के अफसर लखनऊ के चक्कर काटते रहे, लेकिन कुछ हाथ नहीं लग सका। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य संजय विश्वास ने जल कल्याण वेलफेयर सोसायटी की मदद से शारदा पर तटबंध बनाने को हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन इस पर भी अभी हाईकोर्ट में मात्र तारीखें ही पड़ रही हैं।
मानसून हुआ सक्रिय, अब फ्लड फाइटिंग ही सहारा
मानसून सक्रिय होने के बाद शारदा का जलस्तर बढ़ने लगा है। केंद्र सरकार ने सीआरएफ से धन देने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है, जबकि हर साल केंद्र सरकार बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर करोड़ों रुपया देती थी। प्रदेश सरकार ने भी अपने स्वीकृत दो प्रोजेक्टों पर भी समय से धन नहीं दिया। जिसके चलते कहीं कोई बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए जा सके। अब सिंचाई विभाग के पास मात्र फ्लड फाइटिंग के सहारे ही बाढ़ नियंत्रण कार्य कराना मजबूरी बन गया है।
बल्ला कटर बनाने के निर्देश
दो दिन पूर्व अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड और एसडीएम पूरनपुर ने नदी का दौरा कर कुछ स्थानों पर बल्ला कटर बनाने के निर्देश दिए। हालांकि अब बाढ़ के समय कब कहां नदी अपना रौद्र रुप दिखा दे, यह समय के गर्भ में है। जिसे लेकर तलहटी में बसे लोगों की सांसें ऊपर नीचे होने लगी है।
शारदा के कटान एवं बाढ़ से जहां-जहां स्थिति बिगड़ने की संभावना है, वहां पूरी नजर रखी जा रही है। एसडीएम के साथ दौराकर कुछ जरूरी बचाव कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वीकृत दो प्रोजेक्टों पर कार्य अक्तूबर के बाद शुरू हो सकेगा।
- मिन्हाज अहमद, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड
विज्ञापन
शारदा नदी जिसे नेपाल में महाकाली के नाम से जाना जाता है, भारतीय क्षेत्र में जनपद के नौजल्हा नंबर दो से प्रवेश करती है। नोमेंस लैंड पर सनेड़ी नदी भी शारदा में मिल जाती है।
विज्ञापन
यहां से शुरू होता है तबाही का दौर
नौजल्हा नंबर दो में नदी के बांये किनारे पर लग्गा भग्गा का जंगल है। जंगल का हर साल कटान नदी करती है। चूंकि 22 किमी लंबा शारदा डैम भी नदी के दांए किनारे पर ही है। इसके चलते पिछले वर्षों में यहां सेकेंड मार्जिनल बांध व पत्थर की ठोकरें बनाई गई थीं, लेकिन नदी में बाढ़ आने के दौरान गत वर्ष अधिकांश ठोकरें नदी के गर्भ में समा गई थीं। इस दौरान 34 परिवारों की आवसीय भूमि भी कट गई थी।
विज्ञापन
दौड़भाग के बावजूद नहीं शुरू हो सके कार्य
सिंचाई विभाग के अफसर लखनऊ के चक्कर काटते रहे, लेकिन कुछ हाथ नहीं लग सका। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य संजय विश्वास ने जल कल्याण वेलफेयर सोसायटी की मदद से शारदा पर तटबंध बनाने को हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन इस पर भी अभी हाईकोर्ट में मात्र तारीखें ही पड़ रही हैं।
मानसून हुआ सक्रिय, अब फ्लड फाइटिंग ही सहारा
मानसून सक्रिय होने के बाद शारदा का जलस्तर बढ़ने लगा है। केंद्र सरकार ने सीआरएफ से धन देने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है, जबकि हर साल केंद्र सरकार बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर करोड़ों रुपया देती थी। प्रदेश सरकार ने भी अपने स्वीकृत दो प्रोजेक्टों पर भी समय से धन नहीं दिया। जिसके चलते कहीं कोई बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं कराए जा सके। अब सिंचाई विभाग के पास मात्र फ्लड फाइटिंग के सहारे ही बाढ़ नियंत्रण कार्य कराना मजबूरी बन गया है।
बल्ला कटर बनाने के निर्देश
दो दिन पूर्व अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड और एसडीएम पूरनपुर ने नदी का दौरा कर कुछ स्थानों पर बल्ला कटर बनाने के निर्देश दिए। हालांकि अब बाढ़ के समय कब कहां नदी अपना रौद्र रुप दिखा दे, यह समय के गर्भ में है। जिसे लेकर तलहटी में बसे लोगों की सांसें ऊपर नीचे होने लगी है।
शारदा के कटान एवं बाढ़ से जहां-जहां स्थिति बिगड़ने की संभावना है, वहां पूरी नजर रखी जा रही है। एसडीएम के साथ दौराकर कुछ जरूरी बचाव कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वीकृत दो प्रोजेक्टों पर कार्य अक्तूबर के बाद शुरू हो सकेगा।
- मिन्हाज अहमद, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड