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बगैर नागरिकता प्रमाणपत्र वाले बंगाली परिवारों में हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा (पीलीभीत)।
Updated Sun, 10 Sep 2017 06:41 PM IST
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राजस्व प्रशासन ने पूर्वी पाकिस्तान से आए बंगाली विस्थापितों का शुरू किया सर्वे
राजस्व निरीक्षक के नेतृत्व मेें 16 लेखपालों की टीम कर रही हैं सर्वे
जिला पुर्नवासन विभाग द्वारा बसाए गए बंगाली विस्थापित और उसके बाद आकर बसे परिवारों का राजस्व प्रशासन द्वारा सर्वे शुरू कर दिया गया है। जिसके चलते इन बंगाली परिवारों में हड़कंप मच गया है। बताते हैं कि इनमें कई ऐसे हैं जिनके पास न तो भारत की नागरिकता का प्रमाणपत्र है और न ही उस दौरान दी गई बार्डर स्लिप आदि। ऐसे में इन्हें डर है कि कहीं इन्हें बंग्लादेशी न घोषित कर दिया जाए।
वर्ष 1959 में पूर्वी पाकिस्तान से आए बंगाली विस्थापित परिवारों को तत्कालीन केंद्र सरकार ने तराई क्षेत्र की कई कॉलोनियों में बसाया था। पुनर्वासन विभाग द्वारा इनको पांच-पांच एकड़ कृषि भूमि और आवास बनाकर दिए गए थे, लेकिन वर्ष 1964 से 1971 तक जो विस्थापित यहां आए थे, उन्हें कृषि भूमि के पट्टे नहीं दिए गए। बताते हैं कि इसके बाद विभिन्न प्रांतों के कैंपों में रह रहे बंगाली परिवार भी यहां आ गए। जिनकी संख्या काफी अधिक थी। इधर, जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व प्रशासन ने कलीनगर तहसील के राजस्व निरीक्षक विजेंद्र राना के नेतृत्व ने 16 लेखपालों की टीम को विस्थापित गांवों में लगाकर सर्वे शुरू कराया है। शनिवार से शुरू हुए सर्वे में टीम द्वारा जिला पुनर्वास विभाग द्वारा बसाए गए परिवारों की संख्या, अब परिवार में कितने लोग भूमि के पात्र हैं, बाद में आकर बसे विस्थापित परिवारों की संख्या, उनके पास बार्डर स्लिप या नागरिकता प्रमाण पत्र या किसी कैंप में रहने का प्रमाणपत्र हैं या नहीं, इसका ब्योरा तलाशा जा रहा है।
इधर इस सर्वे से विस्थापितों को तो पट्टे मिलने की आस बंधी हैं, लेकिन जिनके पास कोई प्रमाणपत्र या अन्य साक्ष्य नहीं है, ऐसे विस्थापित परिवारों में हड़कंप मचा हुआ है। उन्हें डर है कि कहीं उन्हें बांग्लादेशी न घोषित न कर दिया जाए। मालूम हो कि पहले भी ऐसे अभियान चलाए गए थे, तो फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वालों का पूरा एक गिरोह सक्रिय हो गया था। हालांकि पुलिस ने उस दौरान इस गिरोह का धर दबोचा था। इस संबंध में राजस्व निरीक्षक विजेंद्र राना ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर विस्थापित परिवारों का सर्वे शुरू किया गया है। इसको लेकर लेखपालों की टीम बनाई गई है। सर्वे में विस्थापित परिवारों की संख्या के अलावा नागरिकता प्रमाणपत्र या कोई अन्य साक्ष्य आदि के बारे में ब्योरा जुटाया जा रहा है। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
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राजस्व निरीक्षक के नेतृत्व मेें 16 लेखपालों की टीम कर रही हैं सर्वे
जिला पुर्नवासन विभाग द्वारा बसाए गए बंगाली विस्थापित और उसके बाद आकर बसे परिवारों का राजस्व प्रशासन द्वारा सर्वे शुरू कर दिया गया है। जिसके चलते इन बंगाली परिवारों में हड़कंप मच गया है। बताते हैं कि इनमें कई ऐसे हैं जिनके पास न तो भारत की नागरिकता का प्रमाणपत्र है और न ही उस दौरान दी गई बार्डर स्लिप आदि। ऐसे में इन्हें डर है कि कहीं इन्हें बंग्लादेशी न घोषित कर दिया जाए।
वर्ष 1959 में पूर्वी पाकिस्तान से आए बंगाली विस्थापित परिवारों को तत्कालीन केंद्र सरकार ने तराई क्षेत्र की कई कॉलोनियों में बसाया था। पुनर्वासन विभाग द्वारा इनको पांच-पांच एकड़ कृषि भूमि और आवास बनाकर दिए गए थे, लेकिन वर्ष 1964 से 1971 तक जो विस्थापित यहां आए थे, उन्हें कृषि भूमि के पट्टे नहीं दिए गए। बताते हैं कि इसके बाद विभिन्न प्रांतों के कैंपों में रह रहे बंगाली परिवार भी यहां आ गए। जिनकी संख्या काफी अधिक थी। इधर, जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व प्रशासन ने कलीनगर तहसील के राजस्व निरीक्षक विजेंद्र राना के नेतृत्व ने 16 लेखपालों की टीम को विस्थापित गांवों में लगाकर सर्वे शुरू कराया है। शनिवार से शुरू हुए सर्वे में टीम द्वारा जिला पुनर्वास विभाग द्वारा बसाए गए परिवारों की संख्या, अब परिवार में कितने लोग भूमि के पात्र हैं, बाद में आकर बसे विस्थापित परिवारों की संख्या, उनके पास बार्डर स्लिप या नागरिकता प्रमाण पत्र या किसी कैंप में रहने का प्रमाणपत्र हैं या नहीं, इसका ब्योरा तलाशा जा रहा है।
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इधर इस सर्वे से विस्थापितों को तो पट्टे मिलने की आस बंधी हैं, लेकिन जिनके पास कोई प्रमाणपत्र या अन्य साक्ष्य नहीं है, ऐसे विस्थापित परिवारों में हड़कंप मचा हुआ है। उन्हें डर है कि कहीं उन्हें बांग्लादेशी न घोषित न कर दिया जाए। मालूम हो कि पहले भी ऐसे अभियान चलाए गए थे, तो फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वालों का पूरा एक गिरोह सक्रिय हो गया था। हालांकि पुलिस ने उस दौरान इस गिरोह का धर दबोचा था। इस संबंध में राजस्व निरीक्षक विजेंद्र राना ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर विस्थापित परिवारों का सर्वे शुरू किया गया है। इसको लेकर लेखपालों की टीम बनाई गई है। सर्वे में विस्थापित परिवारों की संख्या के अलावा नागरिकता प्रमाणपत्र या कोई अन्य साक्ष्य आदि के बारे में ब्योरा जुटाया जा रहा है। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
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