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दो लाख रुपये देकर कराई गई थी पोपी की हत्या
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sun, 05 Jun 2016 10:51 PM IST
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हत्या के आरोपी
- फोटो : pilibhit, beureu
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बिथरी चैनपुर के हिस्ट्रीशीटर पोपी की हत्या दो लाख रुपये की सुपारी देकर कराई गई थी। गांव के ही प्रधान पद उम्मीद दूसरे हिस्ट्रीशीटर ने चुनाव जीतने के लिए हत्या की साजिश रची थी। एक साल बाद पुलिस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में सफल हो सकी है। पकड़े गए दो हत्यारों को मीडिया के सामने पेश कर एसपी ने घटना का खुलासा किया है।
बतादें कि बरेली जिले के बिथरी चैनपुर क्षेत्र के सैदूपुर कुर्मीयान निवासी हिस्ट्रीशीटर पोनी पुत्र प्रानसुख 24 मई 2015 को सुनगढ़ी क्षेत्र के एक बारात घर में शादी समारोह में शामिल होने आया था और अचानक लापता हो गया था। दो दिन बाद पास के एक तालाब में उसका सिर कटा शव पड़ा मिला। शरीर पर लगे टैटू के आधार पर परिवारीजनों ने उसकी शिनाख्त की थी। हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस सुरागरसी में लगी रही, लेकिन कोई साक्ष्य नहीं मिल सका। इसके बाद डीआईजी के आदेश पर विवेचना सुनगढ़ी से हटाकर क्राइम ब्रांच को दे दी गई। एक साल बाद आखिरकार पुलिस ने हत्याकांड की गुत्थी को सुलझा ही दिया। सुरागरसी करते हुए पुलिस मृतक के गांव के ही राहुल कुर्मी तक पहुंची, लेकिन वह पुलिस को नहीं मिल सका। शनिवार को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर रेलवे स्टेशन के पास से संदिग्ध रूप से घूम रहे राहुल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले तो आरोपी पुलिस को भटकाने की कोशिश करता रहा, लेकिन सख्ती बढ़ने पर बरेली के भुता क्षेत्र के गांव कीरतपुर निवासी पिंकू उर्फ नरोत्तम का नाम प्रकाश में आया। इसको भी पुलिस ने धर दबोचा। कुछ देर की पूछताछ के बाद ही आरोपियों ने गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस के अनुसार पोपी की हत्या प्रधानी चुनाव को लेकर उसके ही गांव के दूसरे हिस्ट्रीशीटर जगदीश प्रधान ने कराई थी। दोनों एक ही सीट से ग्राम प्रधान पद पर चुनाव लड़ रहे थे। जगदीश को पोपी से अपनी हार का डर लग रहा था। इसी में उसने राहुल को दो लाख रुपये की सुपारी दी थी, जिसके बाद राहुल ने पिंकू के साथ मिलकर उसको मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने सुपारी लेकर हत्या करने वाले दोनों शातिरों की निशानदेही पर बांका बरामद किया। रविवार को पुलिस लाइन में एसपी अनिल कुमार सिंह ने हत्याकांड का खुलासा किया है। इस दौरान एएसपी विकास कुमार वैद्य, सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट भी मौजूद रहे।
पहले पिलाई शराब, फिर मार डाला
दो लाख की सुपारी मिलने के बाद से राहुल और पिंकू पोपी को मारने की प्लानिंग में जुट गए थे। इस बीच अचानक गांव से एक बारात पीलीभीत आई, जिसमें सब लोग आए हुए थे। मौका पाकर इसी दिन घटना को अंजाम देने की तैयारी की गई। पहले दोनों ने पोपी को जमकर शराब पिलाई। इसके बाद टहलते हुए उसे तालाब के पास ले गए। जहां बांके से कई बार किए। उसके मरने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और शव को तालाब में फेंककर भाग गए। खास बात यह है कि आज तक मृतक का सिर नहीं मिल सका है।
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शातिर दिमाग के आगे पुलिस भी हो गई पस्त
पीलीभीत। वैसे तो दोनों आरोपियों का पुराना इतिहास है, लेकिन ऐसा भी नहीं कि सुपारी लेकर हत्या करने का शक जाहिर हो सके। राहुल पर जानलेवा हमला, मारपीट, लूट और गुंडा एक्ट कार्रवाई हुई है। उधर, पिंकू पर भी ऐसे ही तीन मुकदमे हैं। खास बात यह है कि अपराध करने के बाद उससे बचने के लिए जो शातिर दिमाग आरोपी राहुल ने इस्तेमाल किया, उसको सुनकर तो पुलिस भी दंग रह गई। हत्या करने के बाद उसको पहले से अहसास था कि पुलिस उसे पकड़े भले ही न, लेकिन पूछताछ के लिए उस तक जरूर पहुंचेगी। इसलिए उसने एक ऐसा पैंतरा खेला कि पुलिस उसका नाम एक बार प्रकाश में आने के बाद भी असफल रही। घटना के तीन दिन बाद उसने अपने एक पुराने मुकदमे में जमानत रद्द करा ली और जेल चला गया। यहां तीन महीने तक रहता रहा, दुबारा जमानत कराने की कोशिश भी नहीं की। उसकी यह कोशिश काम भी आई। क्राइम ब्रांच में तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर अतुल प्रधान ने दो बार उसके घर दबिशें दीं, लेकिन जेल में होने का पता लगने पर जांच की दिशा उससे हट गई।
सीओ की गंभीरता से नहीं लगी एफआर
वर्ष 2015 के बहुचर्चित और खासा सुर्खियों में रहे पोनी हत्याकांड को लेकर अफसर हिम्मत हार चुके थे। पहले पत्नी के पिता पर शक गहराया तो बाद में पशु तस्करों पर हत्या कराने का, लेकिन हर बार असफल रहे। ऐसे में उच्चाधिकारियों ने केस लंबित रखने के बजाए एफआर लगाने का भी कई बार दबाव बनाया, लेकिन सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट को इसमें सुराग मिलने की आस दिखी। उन्होंने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संग्राम सिंह को लगाया और आखिरकार हत्यारों को खोज निकाला।
पोपी हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम को ढाई हजार रुपये नगद ईनाम की घोषणा की गई है। हत्या की साजिश रचने वाले जगदीश की तलाश जारी है। उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
- अनिल कुमार सिंह, एसपी
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बतादें कि बरेली जिले के बिथरी चैनपुर क्षेत्र के सैदूपुर कुर्मीयान निवासी हिस्ट्रीशीटर पोनी पुत्र प्रानसुख 24 मई 2015 को सुनगढ़ी क्षेत्र के एक बारात घर में शादी समारोह में शामिल होने आया था और अचानक लापता हो गया था। दो दिन बाद पास के एक तालाब में उसका सिर कटा शव पड़ा मिला। शरीर पर लगे टैटू के आधार पर परिवारीजनों ने उसकी शिनाख्त की थी। हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस सुरागरसी में लगी रही, लेकिन कोई साक्ष्य नहीं मिल सका। इसके बाद डीआईजी के आदेश पर विवेचना सुनगढ़ी से हटाकर क्राइम ब्रांच को दे दी गई। एक साल बाद आखिरकार पुलिस ने हत्याकांड की गुत्थी को सुलझा ही दिया। सुरागरसी करते हुए पुलिस मृतक के गांव के ही राहुल कुर्मी तक पहुंची, लेकिन वह पुलिस को नहीं मिल सका। शनिवार को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर रेलवे स्टेशन के पास से संदिग्ध रूप से घूम रहे राहुल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले तो आरोपी पुलिस को भटकाने की कोशिश करता रहा, लेकिन सख्ती बढ़ने पर बरेली के भुता क्षेत्र के गांव कीरतपुर निवासी पिंकू उर्फ नरोत्तम का नाम प्रकाश में आया। इसको भी पुलिस ने धर दबोचा। कुछ देर की पूछताछ के बाद ही आरोपियों ने गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस के अनुसार पोपी की हत्या प्रधानी चुनाव को लेकर उसके ही गांव के दूसरे हिस्ट्रीशीटर जगदीश प्रधान ने कराई थी। दोनों एक ही सीट से ग्राम प्रधान पद पर चुनाव लड़ रहे थे। जगदीश को पोपी से अपनी हार का डर लग रहा था। इसी में उसने राहुल को दो लाख रुपये की सुपारी दी थी, जिसके बाद राहुल ने पिंकू के साथ मिलकर उसको मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने सुपारी लेकर हत्या करने वाले दोनों शातिरों की निशानदेही पर बांका बरामद किया। रविवार को पुलिस लाइन में एसपी अनिल कुमार सिंह ने हत्याकांड का खुलासा किया है। इस दौरान एएसपी विकास कुमार वैद्य, सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट भी मौजूद रहे।
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पहले पिलाई शराब, फिर मार डाला
दो लाख की सुपारी मिलने के बाद से राहुल और पिंकू पोपी को मारने की प्लानिंग में जुट गए थे। इस बीच अचानक गांव से एक बारात पीलीभीत आई, जिसमें सब लोग आए हुए थे। मौका पाकर इसी दिन घटना को अंजाम देने की तैयारी की गई। पहले दोनों ने पोपी को जमकर शराब पिलाई। इसके बाद टहलते हुए उसे तालाब के पास ले गए। जहां बांके से कई बार किए। उसके मरने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और शव को तालाब में फेंककर भाग गए। खास बात यह है कि आज तक मृतक का सिर नहीं मिल सका है।
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पीलीभीत। वैसे तो दोनों आरोपियों का पुराना इतिहास है, लेकिन ऐसा भी नहीं कि सुपारी लेकर हत्या करने का शक जाहिर हो सके। राहुल पर जानलेवा हमला, मारपीट, लूट और गुंडा एक्ट कार्रवाई हुई है। उधर, पिंकू पर भी ऐसे ही तीन मुकदमे हैं। खास बात यह है कि अपराध करने के बाद उससे बचने के लिए जो शातिर दिमाग आरोपी राहुल ने इस्तेमाल किया, उसको सुनकर तो पुलिस भी दंग रह गई। हत्या करने के बाद उसको पहले से अहसास था कि पुलिस उसे पकड़े भले ही न, लेकिन पूछताछ के लिए उस तक जरूर पहुंचेगी। इसलिए उसने एक ऐसा पैंतरा खेला कि पुलिस उसका नाम एक बार प्रकाश में आने के बाद भी असफल रही। घटना के तीन दिन बाद उसने अपने एक पुराने मुकदमे में जमानत रद्द करा ली और जेल चला गया। यहां तीन महीने तक रहता रहा, दुबारा जमानत कराने की कोशिश भी नहीं की। उसकी यह कोशिश काम भी आई। क्राइम ब्रांच में तैनाती के दौरान इंस्पेक्टर अतुल प्रधान ने दो बार उसके घर दबिशें दीं, लेकिन जेल में होने का पता लगने पर जांच की दिशा उससे हट गई।
सीओ की गंभीरता से नहीं लगी एफआर
वर्ष 2015 के बहुचर्चित और खासा सुर्खियों में रहे पोनी हत्याकांड को लेकर अफसर हिम्मत हार चुके थे। पहले पत्नी के पिता पर शक गहराया तो बाद में पशु तस्करों पर हत्या कराने का, लेकिन हर बार असफल रहे। ऐसे में उच्चाधिकारियों ने केस लंबित रखने के बजाए एफआर लगाने का भी कई बार दबाव बनाया, लेकिन सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट को इसमें सुराग मिलने की आस दिखी। उन्होंने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संग्राम सिंह को लगाया और आखिरकार हत्यारों को खोज निकाला।
पोपी हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम को ढाई हजार रुपये नगद ईनाम की घोषणा की गई है। हत्या की साजिश रचने वाले जगदीश की तलाश जारी है। उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
- अनिल कुमार सिंह, एसपी