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बरेली से सस्पेंड होकर आया था हत्यारोपी इंस्पेक्टर
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 25 Apr 2016 11:39 PM IST
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पूरनपुर पुलिस हिरासत में हुई सद्दाम और शकील की मौत के मामले में आरोपी इंस्पेक्टर शक्ति सिंह ने बरेली से एक मामले में सस्पेंड होकर जुलाई, 2015 में जिले में आमद दर्ज कराई थी। तत्कालीन एसपी जेके शाही ने उन्हें बहाल कर पूरनपुर की कमान सौंप दी थी। इस प्रकरण में हत्यारोपियों की गिरफ्तारी को लेकर संशय बरकरार है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने का हवाला देकर अघोषित रूप से उनके पक्ष में खड़ी दिखाई दे रही है।
बरेली सदर कोतवाली में तैनाती के दौरान वहां के एसएसपी ने एक मामले में वादी की शिकायत पर इंस्पेक्टर शक्ति सिंह को निलंबित कर दिया था। उन पर एक मामले के आरोपी को उसी के खर्चे पर महाराष्ट्र से घरेलू हवाई यात्रा पर लाने का आरोप था। सूत्रों के मुताबिक निलंबन के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी में अच्छी पकड़ होने के कारण शक्ति सिंह ने अपना तबादला पीलीभीत करा लिया। इसके कुछ दिन बाद ही तत्कालीन एसपी जेके शाही ने उन्हें बहाल कर पूरनपुर का कोतवाल बना दिया। 31 मार्च, 2016 को पुलिस कस्टडी में पूरनपुर के मोहल्ला रजागंज निवासी सद्दाम और शकील की मौत हो गई थी। दोनों को पुलिस मादक पदार्थ रखने के आरोप में पकड़कर लाई थी। पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में इंस्पेक्टर शक्ति सिंह के अलावा छह पुलिस वालों समेत 14 लोगों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस मामले में आरोपी पुलिस वालों की गिरफ्तारी पर संशय अभी बरकरार है। एएसपी विकास कुमार वैद्य ने बताया कि विवेचना चल रही है। आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे तभी गिरफ्तारी हो सकेगी।
गैरहाजिर रहने की खुली पत्रावली
पूरनपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से हत्यारोपी इंस्पेक्टर शक्ति सिंह और अन्य आरोपी पुलिस वालों को एसपी ने निलंबित कर दिया था। नियमानुसार निलंबित पुलिस वालों को पुलिस लाइन में आमद करानी चाहिए थी, लेकिन सभी आरोपी बिना किसी सूचना के गायब हो गए। प्रभारी कोतवाल ने सीओ के माध्यम से गैरहाजिरी होने की रिपोर्ट एसपी को भेजी थी। एएसपी विकास कुमार वैद्य ने बताया कि सभी आरोपियों की जांच पत्रावली खोली जा चुकी है। जांच पूरी होने पर ही गैरहाजिरी को लेकर विभागीय कार्रवाई होगी।
बरेली सदर कोतवाली में तैनाती के दौरान वहां के एसएसपी ने एक मामले में वादी की शिकायत पर इंस्पेक्टर शक्ति सिंह को निलंबित कर दिया था। उन पर एक मामले के आरोपी को उसी के खर्चे पर महाराष्ट्र से घरेलू हवाई यात्रा पर लाने का आरोप था। सूत्रों के मुताबिक निलंबन के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी में अच्छी पकड़ होने के कारण शक्ति सिंह ने अपना तबादला पीलीभीत करा लिया। इसके कुछ दिन बाद ही तत्कालीन एसपी जेके शाही ने उन्हें बहाल कर पूरनपुर का कोतवाल बना दिया। 31 मार्च, 2016 को पुलिस कस्टडी में पूरनपुर के मोहल्ला रजागंज निवासी सद्दाम और शकील की मौत हो गई थी। दोनों को पुलिस मादक पदार्थ रखने के आरोप में पकड़कर लाई थी। पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में इंस्पेक्टर शक्ति सिंह के अलावा छह पुलिस वालों समेत 14 लोगों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस मामले में आरोपी पुलिस वालों की गिरफ्तारी पर संशय अभी बरकरार है। एएसपी विकास कुमार वैद्य ने बताया कि विवेचना चल रही है। आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे तभी गिरफ्तारी हो सकेगी।
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गैरहाजिर रहने की खुली पत्रावली
पूरनपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से हत्यारोपी इंस्पेक्टर शक्ति सिंह और अन्य आरोपी पुलिस वालों को एसपी ने निलंबित कर दिया था। नियमानुसार निलंबित पुलिस वालों को पुलिस लाइन में आमद करानी चाहिए थी, लेकिन सभी आरोपी बिना किसी सूचना के गायब हो गए। प्रभारी कोतवाल ने सीओ के माध्यम से गैरहाजिरी होने की रिपोर्ट एसपी को भेजी थी। एएसपी विकास कुमार वैद्य ने बताया कि सभी आरोपियों की जांच पत्रावली खोली जा चुकी है। जांच पूरी होने पर ही गैरहाजिरी को लेकर विभागीय कार्रवाई होगी।
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