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हमले में घायल सिपाही भीमसेन ने दम तोड़ा
पीलीभीत।
Updated Sat, 20 Feb 2016 11:52 PM IST
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पत्नी कई बार बेसुध हुईं। शव का शहर के मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि बड़े बेटे गोधनलाल ने दी। मूलरूप से पीलीभीत जिले के थाना बरखेड़ा के गांव रंपुरा निवासी भीमसेन वर्ष 2008 से शहर में आए थे। वह किराए के मकान में रहते थे। साल भर पहले उन्होंने शहर की राजीव कॉलोनी में निजी मकान बनवाया था। वर्तमान में बदायूं जिले के थाना बिल्सी की रिसौली चौकी पर तैनात थे। भीमसेन 17 फरवरी को शिकायत मिलने पर अपने साथी सिपाही शहीम खां के साथ गांव गढ़ौली निवासी जगतपाल के घर तेज आवाज में बज रहे डीजे को बंद कराने गए थे। जहां पर डीजे बजा रहे जगतपाल ने अपने परिवार की मदद से सिपाहियों पर कुल्हाड़ी व फावड़े से हमला कर दिया था। दोनों सिपाही गंभीर हालत में बरेली के श्रीराममूर्ति अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। जहां लखीमपुर खीरी के रहने वाले सिपाही शहीम की मौत हो गई थी, जबकि भीमसेन जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। शनिवार की सुबह करीब सात बजे भीमसेन ने अंतिम सांस ली। सिपाही की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। दोपहर बाद पुलिस के वाहन से शव जब उनके घर पहुंचा तो परिवार के लोग बिलख उठे। पत्नी रामबेटी और बच्चों का करुण क्रंदन देख वहां सैकड़ों की संख्या में मौैजूद लोग अपने आंसू नहीं रोक सके। आसपास की महिलाएं, पुरुष और रिश्तेदार बिलख रहे परिवार वालों को ढांढस बंधा रहे थे। सायं को शव की अंत्येष्टि मुक्ति धाम पर कर दी गई। अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल रहे।
बेटी की शादी की हसरत रह गई अधूरी
भीमसेन के पांच पुत्र गोधनलाल, लालबिहारी, सूरजपाल, अंकित, सूरज और दो पुत्रियां ममता व सीमा हैं। जिसमें से तीन पुत्रों और पुत्री ममता की शादी हो चुकी है। पुत्र अंकित, सोनू और सीमा अभी अविवाहित है। वह पुत्री सीमा के विवाह की तैयारी भी कर रहे थे, लेकिन हत्यारोपियों ने दो पुत्रों व एक पुत्री की शादी करने की हसरत पूरी नहीं होने दी और जानलेवा हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
एसपी, एएसपी नहीं पहुंचे सिपाही के घर
पीलीभीत। बदायूं में जानलेवा हमले में मारे गए सिपाही भीमसेन के घर पहुंचकर जिले के किसी भी आला अफसर ने शोक संवेदना नहीं जताई। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी अतुल प्रधान ने सिपाही के घर पहुंचकर परिवार वालों को ढांढस बंधाया। वह अंत्येष्टि में भी शरीक हुए। घर वाले जब शव लेकर मुक्तिधाम पर पहुंचे तब सीओ सिटी यशवीर सिंह वहां पहुंचे। एसपी और एएसपी ने सिपाही की अर्थी को कंधा देना तो दूर पीड़ित परिवार से सांत्वना के दो शब्द कहना तक मुनासिब नहीं समझा।
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बेटी की शादी की हसरत रह गई अधूरी
भीमसेन के पांच पुत्र गोधनलाल, लालबिहारी, सूरजपाल, अंकित, सूरज और दो पुत्रियां ममता व सीमा हैं। जिसमें से तीन पुत्रों और पुत्री ममता की शादी हो चुकी है। पुत्र अंकित, सोनू और सीमा अभी अविवाहित है। वह पुत्री सीमा के विवाह की तैयारी भी कर रहे थे, लेकिन हत्यारोपियों ने दो पुत्रों व एक पुत्री की शादी करने की हसरत पूरी नहीं होने दी और जानलेवा हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
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एसपी, एएसपी नहीं पहुंचे सिपाही के घर
पीलीभीत। बदायूं में जानलेवा हमले में मारे गए सिपाही भीमसेन के घर पहुंचकर जिले के किसी भी आला अफसर ने शोक संवेदना नहीं जताई। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी अतुल प्रधान ने सिपाही के घर पहुंचकर परिवार वालों को ढांढस बंधाया। वह अंत्येष्टि में भी शरीक हुए। घर वाले जब शव लेकर मुक्तिधाम पर पहुंचे तब सीओ सिटी यशवीर सिंह वहां पहुंचे। एसपी और एएसपी ने सिपाही की अर्थी को कंधा देना तो दूर पीड़ित परिवार से सांत्वना के दो शब्द कहना तक मुनासिब नहीं समझा।
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