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किसान की मौत
बीसलपुर।
Updated Sat, 09 May 2015 11:46 PM IST
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गांव टेढ़ालेखराज में फसली क्षति से आहत किसान ख्यालीराम ने शुक्रवार शाम खेत में ही जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। अब प्रशासन अपनी खामियों पर पर्दा डालने के लिए बचाव में जुट गया है। तहसीलदार ने ख्यालीराम की मौत की वजह घरेलू कलह होना बताया है। इस पर परिवार वालों ने सख्त ऐतराज जताया है। वहीं किसान के मौत की इस मार्मिक घटना से गांव वाले भी आहत हैं। गांव में किसान के मौत के शोक में शनिवार को सभी दुकानें बंद रहीं।
गांव टेढ़ालेखराज निवासी रामप्रसाद ने बताया कि बड़े पैमाने पर हुई फसली क्षति से आहत होकर उनके बड़े भाई ख्यालीराम ने शुक्रवार को जहर खाकर खेत में आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने शुक्रवार रात ही शव को कब्जे में ले लिया था। शनिवार को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। उस घटना से मृतक के घर कोहराम मच गया था। वहीं तहसीलदार ने किसान के मौत की वजह घरेलू कलह बताया है।
तहसीलदार के इस बयान से ख्यालीराम के परिवार वाले खासे दुखी हैं। छोटे भाई रामप्रसाद का कहना है कि प्रशासन ने उसके भाई की बर्बाद फसल का एक तो मुआवजा देना उचित नहीं समझ।ा अब प्रशासन अपनी गलती को छिपाने और जवाबदेही से बचने के लिए इस तरह की बात कह रहा है। शनिवार देर शाम जब ख्यालीराम का शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। बाद में परिवार वालों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं शोक में गांव की सभी दुकानें बंद रहीं।
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तहसीलदार ने क्या कहा
तहसीलदार नन्हेलाल ने यह तो स्वीकार करते हैं कि ख्यालीराम की चार बीघा जमीन में से ढाई बीघा जमीन में गेहूं की फसल थी। जिसमें नुकसान भी हुआ। मगर फसल बर्बादी की वजह से किसान के आत्महत्या करने की बात से उन्होंने साफ इनकार किया है। उनका दावा है कि किसान ने फसल बर्बादी के चलते नहीं बल्कि घरेलू कलह के चलते आत्महत्या की है।
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गांव टेढ़ालेखराज निवासी रामप्रसाद ने बताया कि बड़े पैमाने पर हुई फसली क्षति से आहत होकर उनके बड़े भाई ख्यालीराम ने शुक्रवार को जहर खाकर खेत में आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने शुक्रवार रात ही शव को कब्जे में ले लिया था। शनिवार को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। उस घटना से मृतक के घर कोहराम मच गया था। वहीं तहसीलदार ने किसान के मौत की वजह घरेलू कलह बताया है।
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तहसीलदार के इस बयान से ख्यालीराम के परिवार वाले खासे दुखी हैं। छोटे भाई रामप्रसाद का कहना है कि प्रशासन ने उसके भाई की बर्बाद फसल का एक तो मुआवजा देना उचित नहीं समझ।ा अब प्रशासन अपनी गलती को छिपाने और जवाबदेही से बचने के लिए इस तरह की बात कह रहा है। शनिवार देर शाम जब ख्यालीराम का शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। बाद में परिवार वालों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं शोक में गांव की सभी दुकानें बंद रहीं।
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तहसीलदार ने क्या कहा
तहसीलदार नन्हेलाल ने यह तो स्वीकार करते हैं कि ख्यालीराम की चार बीघा जमीन में से ढाई बीघा जमीन में गेहूं की फसल थी। जिसमें नुकसान भी हुआ। मगर फसल बर्बादी की वजह से किसान के आत्महत्या करने की बात से उन्होंने साफ इनकार किया है। उनका दावा है कि किसान ने फसल बर्बादी के चलते नहीं बल्कि घरेलू कलह के चलते आत्महत्या की है।