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अंतर्राज्जीय साइबर ठग गैंग के तीन शातिर गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 23 May 2016 11:17 PM IST
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पकड़ा गया गैंग।
- फोटो : pilibhit, beureu
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एडीजे के खाते से पंद्रह लाख चालीस हजार रुपये अंतर्राज्जीय साइबर गैंग ने निकाले थे। सुरागरसी के दौरान पुलिस ने इस संबंध में साक्ष्य जुटाए थे, जिसके बाद मुखबिर की सूचना पर तीन शातिर ठगों की गिरफ्तारी कर ली गई। इनके पास से लाखों रुपये, जेवरात, कार और ठगी में इस्तेमाल किया जाने वाला सामान बरामद किया गया है। एसपी अनिल कुमार सिंह ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर घटना का खुलासा किया।
बतादें कि अपर जिला जज विनय कुमार के खाते से मार्च में 15.40 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। एडीजे की तहरीर पर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। मामला न्याय विभाग के एक अधिकारी से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने गुपचुप तरीके से मुकदमा दर्ज कर इसकी सुरागरसी तेज कर दी। क्राइम ब्रांच टीम ने सर्विलांस की मदद से ठगी करने वाले गिरोह के साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिए, जिसमें पुलिस के सामने बिहार के गोपालगंज जिले के छपरा निवासी वीरेश कुमार का नाम प्रकाश में आया। कुछ दिन इस पर काम करने के बाद दो अन्य नाम बिहार के सनोरिया गांव का रहने वाला नजीबुल रहमान और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के पिपरा गांव निवासी संतोष चौहान भी बतौर आरोपी प्रकाश में आ गया। पुलिस ने गैंग को पकड़ने के लिए तलाश शुरू कर दी। रविवार शाम करीब चार बजे मुखबिर से सूचना मिली कि तीनों आरोपी टनकपुर की ओर से आ रहे हैं। इस पर पुलिस ने सिविल लाइन चौकी पर घेराबंदी कर आरोपियों को धर दबोचा। इनके पास से पुलिस ने 6.92 लाख रुपये, 2.80 लाख रुपये कीमत के जेवरात, स्विफ्ट डिजायर कार, तीन लैपटॉप, दो नेटसटल, दो चार्जर, दो बैट्री, दो टिकट बुकिंग कॉपी, सात मोबाइल फोन बरामद करने का दावा किया है। पुलिस तीनों को पकड़कर कोतवाली थाने ले आई। जहां पूछताछ की गई। इसमें आरोपियों ने पिछले डेढ़ साल से ठगी करने की बात कबूली। यह भी बताया कि एडीजे के खाते से निकाली गई रकम से ही उन्होंने कार और जेवरात बनवाए हैं। एसपी अनिल कुमार सिंह ने पुलिस लाइन में खुलासा कर पुलिस के गुडवर्क को सराहा। इस अवसर पर सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट भी मौजूद रहे।
ठगी को अपनाते थे अनूठा तरीका
पुलिस के मुताबिक पकड़ा गया साइबर गैंग बिहार के गोपालगंज जिले से संचालित होता है। इसका मुखिया बिहार का रहने वाला संजीव कुमार सिंह है। उसके सात अन्य सदस्य उसके साथ ही रहते हैं। गैंग ने अपने एजेंट के तौर पर कई लड़के कई प्रदेशों के बड़े-बड़े जिलों में फैला रखे हैं। बनाए गए एजेंट एटीएम से रुपये निकालते वक्त एटीएम का नंबर देख लेते हैं। इसके बाद कोड डालते वक्त भी बड़ी चालाकी से नंबर का पता लगाते हैं। इसके बाद बिहार में बैठे सरगना को एटीएम नंबर और कोड की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा किस खाते में रकम अधिक है। उसका नंबर मुखिया को दे दिया जाता है, जिसको वह दिल्ली में बैठे अपने ग्रुप के सदस्यों को दे दिया करता था। इसके बाद ट्रैवल एजेंसी से साठगांठ कर हवाई और ट्रेन यात्रा के टिकट की आनलाइन बुकिंग करा दी जाती थी। टिकट का नगद पैसा बुक कराने आई पार्टी से लिया जाता था। टिकट बुकिंग के लिए आईआरसीटीसी की साइट का प्रयोग होता है। इस पर वीरेश ने अपना एक फेक एकाउंट भी बना रखा है।
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सरगना को मिलता है 45 प्रतिशत रुपया
गैंग में ठगी से इकठ्ठा किया गया रुपया किसको कितना मिलना है, पहले ही तय कर लिया जाता है। बिहार में बैठे सरगना को 45 प्रतिशत, दिल्ली के लोगों को 25 प्रतिशत और ट्रैवल्स एजेंसी के मालिकों को 30 प्रतिशत मिलता है।
डीजीपी की एसटीएफ ने की पूछताछ
अंतर्राज्जीय गैंग की धरपकड़ के बाद पुलिस विभाग के बड़े अफसर भी सक्रिय हुए। डीजीपी की ओर से एसआई अभिषेक पुंडीर के नेतृत्व में एसटीएफ की एक टीम पीलीभीत भेजी गई, जिसने पकड़े गए सदस्यों से जानकारी की और पूरा डाटा एकत्र कर अपने साथ ले गई है। अब इसे अन्य प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों को भेजकर उनके यहां घटित अपराध की जानकारी की जाएगी और गैंग के बकाया सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
लैपटॉप भेजा जाएगा एफएसएल
पकड़े गए शातिर ठग काम करते समय पुलिस से हमेशा सावधान रहा करते थे। मोबाइल सिम बदलने के साथ ही लैपटॉप की हार्डडिस्क से भी डाटा समाप्त कर दिया जाता था। ऐसे में लैपटॉप से सुराग बटोरने के लिए पुलिस उसे फोरेंसिक लैब लखनऊ भेजेगी।
25 हजार की नौकरी छोड़कर ठग बना वीरेश
पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों शातिर शिक्षित हैं। आरोपी संतोष चौहान गाजियाबाद से बीटेक किया हुआ है। नजीबुल रहमान बीएससी की पढ़ाई पूरी कर चुका है। वहीं वीरेश बिहार से दिल्ली सीए करने आया था। घरवाले उसकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहे थे। इस कारण उसने दिल्ली में एक 25 हजार रुपये महीने की नौकरी की। इस दौरान उसकी मुलाकात नजीबुल से हुई। दोनों बिहार में एक ही जिले के रहने वाले निकले। नजीबुल ने उसको जल्दी धनवान होने के लिए गैंग से जुड़ने का ऑफर दिया। बताते हैं कि नजीबुल की बहन से ही उसकी शादी हुई है, जिसके बाद वह भी बिहार से संचालित हो रहे संजीव कुमार के गैंग का सदस्य बन गया।
पुलिस टीम को पांच हजार का नगद इनाम
एक बड़े साइबर गैंग का खुलासा करने वाली टीम को एसपी अनिल कुमार सिंह ने पांच हजार रुपये नगद का पुरस्कार दिया है। इसके अलावा बड़े अफसरों को भी टीम को पुरस्कृत करने के लिए एक पत्र भेजा जा रहा है। सफलता पाने वाली टीम में निरीक्षक संग्राम सिंह, केपी सिंह, ख्यालीराम आदित्य, एसआई रामचंद्र सिंह, सर्विलांस टीम के कांस्टेबल सतेंद्र कुमार, जॉनसन शामिल हैं।
करोड़ों का चूना लगा चुका गैंग
देश के कई प्रदेशों में फैला ये गैंग अब तक करोड़ों रुपये का लोगों को चूना लगा चुका है। इस गैंग ने देवरिया, करनई, बजपुरा, गोंडा, गाजियाबाद, दिल्ली, बिहार, झारखंड, इलाहाबाद सहित तमाम जगह के लोगों के खाते खंगाले हैं।
दिल्ली की इन ट्रैवल्स एजेंसियों से था गठजोड़
पुलिस के अनुसार इस गैंग का दिल्ली के कई ट्रैवल्स स्वामियों से सेटिंग है, जिसमें विश्वास नगर, गांधीनगर, कंठकठुआ, मंडावरी, मयूर बिहार इलाके में चल रही तमाम ट्रैवल्स एजेंसियां शामिल हैं। अब पुलिस इन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।
क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। उत्तर प्रदेश के अलावा गैंग अन्य प्रदेशों में भी सक्रिय है। पकड़े गए तीन के अलावा अन्य साथियों और मास्टरमाइंड की तलाश को सख्त कदम उठाए जाएंगे।
- अनिल कुमार सिंह, एसपी
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बतादें कि अपर जिला जज विनय कुमार के खाते से मार्च में 15.40 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। एडीजे की तहरीर पर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। मामला न्याय विभाग के एक अधिकारी से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने गुपचुप तरीके से मुकदमा दर्ज कर इसकी सुरागरसी तेज कर दी। क्राइम ब्रांच टीम ने सर्विलांस की मदद से ठगी करने वाले गिरोह के साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिए, जिसमें पुलिस के सामने बिहार के गोपालगंज जिले के छपरा निवासी वीरेश कुमार का नाम प्रकाश में आया। कुछ दिन इस पर काम करने के बाद दो अन्य नाम बिहार के सनोरिया गांव का रहने वाला नजीबुल रहमान और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के पिपरा गांव निवासी संतोष चौहान भी बतौर आरोपी प्रकाश में आ गया। पुलिस ने गैंग को पकड़ने के लिए तलाश शुरू कर दी। रविवार शाम करीब चार बजे मुखबिर से सूचना मिली कि तीनों आरोपी टनकपुर की ओर से आ रहे हैं। इस पर पुलिस ने सिविल लाइन चौकी पर घेराबंदी कर आरोपियों को धर दबोचा। इनके पास से पुलिस ने 6.92 लाख रुपये, 2.80 लाख रुपये कीमत के जेवरात, स्विफ्ट डिजायर कार, तीन लैपटॉप, दो नेटसटल, दो चार्जर, दो बैट्री, दो टिकट बुकिंग कॉपी, सात मोबाइल फोन बरामद करने का दावा किया है। पुलिस तीनों को पकड़कर कोतवाली थाने ले आई। जहां पूछताछ की गई। इसमें आरोपियों ने पिछले डेढ़ साल से ठगी करने की बात कबूली। यह भी बताया कि एडीजे के खाते से निकाली गई रकम से ही उन्होंने कार और जेवरात बनवाए हैं। एसपी अनिल कुमार सिंह ने पुलिस लाइन में खुलासा कर पुलिस के गुडवर्क को सराहा। इस अवसर पर सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट भी मौजूद रहे।
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पुलिस के मुताबिक पकड़ा गया साइबर गैंग बिहार के गोपालगंज जिले से संचालित होता है। इसका मुखिया बिहार का रहने वाला संजीव कुमार सिंह है। उसके सात अन्य सदस्य उसके साथ ही रहते हैं। गैंग ने अपने एजेंट के तौर पर कई लड़के कई प्रदेशों के बड़े-बड़े जिलों में फैला रखे हैं। बनाए गए एजेंट एटीएम से रुपये निकालते वक्त एटीएम का नंबर देख लेते हैं। इसके बाद कोड डालते वक्त भी बड़ी चालाकी से नंबर का पता लगाते हैं। इसके बाद बिहार में बैठे सरगना को एटीएम नंबर और कोड की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा किस खाते में रकम अधिक है। उसका नंबर मुखिया को दे दिया जाता है, जिसको वह दिल्ली में बैठे अपने ग्रुप के सदस्यों को दे दिया करता था। इसके बाद ट्रैवल एजेंसी से साठगांठ कर हवाई और ट्रेन यात्रा के टिकट की आनलाइन बुकिंग करा दी जाती थी। टिकट का नगद पैसा बुक कराने आई पार्टी से लिया जाता था। टिकट बुकिंग के लिए आईआरसीटीसी की साइट का प्रयोग होता है। इस पर वीरेश ने अपना एक फेक एकाउंट भी बना रखा है।
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गैंग में ठगी से इकठ्ठा किया गया रुपया किसको कितना मिलना है, पहले ही तय कर लिया जाता है। बिहार में बैठे सरगना को 45 प्रतिशत, दिल्ली के लोगों को 25 प्रतिशत और ट्रैवल्स एजेंसी के मालिकों को 30 प्रतिशत मिलता है।
डीजीपी की एसटीएफ ने की पूछताछ
अंतर्राज्जीय गैंग की धरपकड़ के बाद पुलिस विभाग के बड़े अफसर भी सक्रिय हुए। डीजीपी की ओर से एसआई अभिषेक पुंडीर के नेतृत्व में एसटीएफ की एक टीम पीलीभीत भेजी गई, जिसने पकड़े गए सदस्यों से जानकारी की और पूरा डाटा एकत्र कर अपने साथ ले गई है। अब इसे अन्य प्रदेशों के पुलिस अधिकारियों को भेजकर उनके यहां घटित अपराध की जानकारी की जाएगी और गैंग के बकाया सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
लैपटॉप भेजा जाएगा एफएसएल
पकड़े गए शातिर ठग काम करते समय पुलिस से हमेशा सावधान रहा करते थे। मोबाइल सिम बदलने के साथ ही लैपटॉप की हार्डडिस्क से भी डाटा समाप्त कर दिया जाता था। ऐसे में लैपटॉप से सुराग बटोरने के लिए पुलिस उसे फोरेंसिक लैब लखनऊ भेजेगी।
25 हजार की नौकरी छोड़कर ठग बना वीरेश
पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों शातिर शिक्षित हैं। आरोपी संतोष चौहान गाजियाबाद से बीटेक किया हुआ है। नजीबुल रहमान बीएससी की पढ़ाई पूरी कर चुका है। वहीं वीरेश बिहार से दिल्ली सीए करने आया था। घरवाले उसकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहे थे। इस कारण उसने दिल्ली में एक 25 हजार रुपये महीने की नौकरी की। इस दौरान उसकी मुलाकात नजीबुल से हुई। दोनों बिहार में एक ही जिले के रहने वाले निकले। नजीबुल ने उसको जल्दी धनवान होने के लिए गैंग से जुड़ने का ऑफर दिया। बताते हैं कि नजीबुल की बहन से ही उसकी शादी हुई है, जिसके बाद वह भी बिहार से संचालित हो रहे संजीव कुमार के गैंग का सदस्य बन गया।
पुलिस टीम को पांच हजार का नगद इनाम
एक बड़े साइबर गैंग का खुलासा करने वाली टीम को एसपी अनिल कुमार सिंह ने पांच हजार रुपये नगद का पुरस्कार दिया है। इसके अलावा बड़े अफसरों को भी टीम को पुरस्कृत करने के लिए एक पत्र भेजा जा रहा है। सफलता पाने वाली टीम में निरीक्षक संग्राम सिंह, केपी सिंह, ख्यालीराम आदित्य, एसआई रामचंद्र सिंह, सर्विलांस टीम के कांस्टेबल सतेंद्र कुमार, जॉनसन शामिल हैं।
करोड़ों का चूना लगा चुका गैंग
देश के कई प्रदेशों में फैला ये गैंग अब तक करोड़ों रुपये का लोगों को चूना लगा चुका है। इस गैंग ने देवरिया, करनई, बजपुरा, गोंडा, गाजियाबाद, दिल्ली, बिहार, झारखंड, इलाहाबाद सहित तमाम जगह के लोगों के खाते खंगाले हैं।
दिल्ली की इन ट्रैवल्स एजेंसियों से था गठजोड़
पुलिस के अनुसार इस गैंग का दिल्ली के कई ट्रैवल्स स्वामियों से सेटिंग है, जिसमें विश्वास नगर, गांधीनगर, कंठकठुआ, मंडावरी, मयूर बिहार इलाके में चल रही तमाम ट्रैवल्स एजेंसियां शामिल हैं। अब पुलिस इन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।
क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। उत्तर प्रदेश के अलावा गैंग अन्य प्रदेशों में भी सक्रिय है। पकड़े गए तीन के अलावा अन्य साथियों और मास्टरमाइंड की तलाश को सख्त कदम उठाए जाएंगे।
- अनिल कुमार सिंह, एसपी