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पुलिस तो मुर्दों को जिंदा बताती रही
पीलीभीत, ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:50 AM IST
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पुलिस कस्टडी में दो युवकों की मौत के मामले में खुद को फंसता देख पुलिस ने शुरूआत से ही घटना को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश शुरू कर दी और मुर्दों को जिंदा बताती रही। सीएचसी के डॉक्टरों से लेकर 108 एंबुलेंस के ईएमटी ने भी इसमें पुलिस की भरसक मदद की। डॉक्टरों की मदद और पुलिस द्वारा गढ़ी गई कहानी का सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलकर सामने आ गया है। पुलिस अधिकारी दोषियों को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा करने से बचते रहे, लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की मानें तो दोनों युवकों की मौत पोस्टमार्टम होने से करीब 12 घंटा पहले यानी गुरुवार की सुबह आठ से 10 बजे के बीच हुई है। खास बात यह है कि पुलिस दोनों को जब दोपहर 11.56 बजे सीएचसी लेकर पहुंची थी, तो डॉक्टरों ने उन्हें जीवित बताया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ है कि सीएचसी पहुंचने से दो घंटे पहले ही युवकों की मौत हो गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि दो घंटे पुलिस ने आखिर युवकों के शव कहां छुपाकर रखे। इसका जवाब पुलिस अफसर नहीं दे पा रहे हैं।
पुलिस ने दावा किया था कि सद्दाम और शकील की हालत हवालात में बिगड़ गई थी। पुलिस दोनों को चंद कदमों की दूरी पर स्थित सीएचसी पर दोपहर 11.56 मिनट पर ले गई। जहां से डॉक्टरों के रेफर करने पर पुलिस 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाई। वहां डॉक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया था। पुलिस और सीएचसी के डाक्टरों का कहना था कि रेफर करते समय दोनों जीवित थे। रास्ते में उनकी मौत हुई, लेकिन पुलिस और डॉक्टरों का यह झूठ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आ गया। शायद यही वजह है कि पुलिस अधिकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी देने से देर शाम तक कतराते रहे, हालांकि देर शाम एएसपी ने अमर उजाला को बताया कि डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम से 12 घंटा पहले मौत होने की पुष्टि की है। दोनों युवकों का पोस्टमार्टम रात करीब आठ बजे शुरू होकर 11.30 बजे तक चला।
इस हिसाब से दोनों की मौत सुबह आठ से 10 बजे के बीच में हुई। पुलिस दोनों को लेकर पूरनपुर सीएचसी दोपहर 11.56 बजे पहुंची। इससे साफ है कि पुलिस सद्दाम और शाबिर के मृत होने के दो घंटे बाद सीएचसी पहुंची और डॉक्टरों ने भी शवों को ही जीवित बताकर पुलिस का साथ दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सद्दाम तथा शाबिर को कोतवाली से लेकर जिला अस्पताल तक लाने के बीच पुलिस के बयान और सीएचसी के रिकार्डों पर यदि गौर करें तो तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। मसलन ऐसा क्या था कि डॉक्टरों को पुलिस की मदद करने के लिए लाशों को जीवित बताना पड़ा।
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...तो क्या 108 एंबुलेंस में लाशें भी हो जाती हैं जिंदा
पीलीभीत। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस हिरासत में मौजूद सद्दाम और शाबिर की मौत गुरुवार की सुबह आठ से 10 बजे के बीच हुई थी। 108 एंबुलेंस का ईएमटी सूरज दोनों को सीएचसी से लेकर दोपहर 12.05 पर पीलीभीत जिला अस्पताल के लिए चला। ईएमटी की कॉल बुक में सद्दाम की धड़कन 65, बीपी 112-70, तापमान 98, पुतली और सांसे ठीक दर्शाईं गई थीं। डॉक्टरों के मुताबिक यह लक्षण एक सामान्य व्यक्ति के होते हैं। सवाल उठता है कि क्या एंबुलेंस में आने के बाद लाशों की भी पल्स चलने लगी थी। उनका ब्लड प्रेशर भी लगभग सामान्य था। शायद पुलिस की मदद के लिए ही ईएमटी ने अपने कागजों में हेराफेरी की है। कॉलबुक में की गई ओवर राइटिंग हेराफेरी की पुष्टि भी करती है।
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पुलिस ने दावा किया था कि सद्दाम और शकील की हालत हवालात में बिगड़ गई थी। पुलिस दोनों को चंद कदमों की दूरी पर स्थित सीएचसी पर दोपहर 11.56 मिनट पर ले गई। जहां से डॉक्टरों के रेफर करने पर पुलिस 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाई। वहां डॉक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया था। पुलिस और सीएचसी के डाक्टरों का कहना था कि रेफर करते समय दोनों जीवित थे। रास्ते में उनकी मौत हुई, लेकिन पुलिस और डॉक्टरों का यह झूठ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आ गया। शायद यही वजह है कि पुलिस अधिकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी देने से देर शाम तक कतराते रहे, हालांकि देर शाम एएसपी ने अमर उजाला को बताया कि डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम से 12 घंटा पहले मौत होने की पुष्टि की है। दोनों युवकों का पोस्टमार्टम रात करीब आठ बजे शुरू होकर 11.30 बजे तक चला।
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इस हिसाब से दोनों की मौत सुबह आठ से 10 बजे के बीच में हुई। पुलिस दोनों को लेकर पूरनपुर सीएचसी दोपहर 11.56 बजे पहुंची। इससे साफ है कि पुलिस सद्दाम और शाबिर के मृत होने के दो घंटे बाद सीएचसी पहुंची और डॉक्टरों ने भी शवों को ही जीवित बताकर पुलिस का साथ दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सद्दाम तथा शाबिर को कोतवाली से लेकर जिला अस्पताल तक लाने के बीच पुलिस के बयान और सीएचसी के रिकार्डों पर यदि गौर करें तो तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। मसलन ऐसा क्या था कि डॉक्टरों को पुलिस की मदद करने के लिए लाशों को जीवित बताना पड़ा।
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...तो क्या 108 एंबुलेंस में लाशें भी हो जाती हैं जिंदा
पीलीभीत। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस हिरासत में मौजूद सद्दाम और शाबिर की मौत गुरुवार की सुबह आठ से 10 बजे के बीच हुई थी। 108 एंबुलेंस का ईएमटी सूरज दोनों को सीएचसी से लेकर दोपहर 12.05 पर पीलीभीत जिला अस्पताल के लिए चला। ईएमटी की कॉल बुक में सद्दाम की धड़कन 65, बीपी 112-70, तापमान 98, पुतली और सांसे ठीक दर्शाईं गई थीं। डॉक्टरों के मुताबिक यह लक्षण एक सामान्य व्यक्ति के होते हैं। सवाल उठता है कि क्या एंबुलेंस में आने के बाद लाशों की भी पल्स चलने लगी थी। उनका ब्लड प्रेशर भी लगभग सामान्य था। शायद पुलिस की मदद के लिए ही ईएमटी ने अपने कागजों में हेराफेरी की है। कॉलबुक में की गई ओवर राइटिंग हेराफेरी की पुष्टि भी करती है।