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लोकतंत्र सेनानी श्रीकृष्ण दास का निकला माइनर में मिला शव
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बरखेड़ा (पीलीभीत)। चार अप्रैल को बीसलपुर ब्रांच माइनर में मिला शव लोकतंत्र सेनानी श्रीकृष्ण दास का निकला। शव मिलने के छह दिन बाद बृहस्पतिवार को बरखेड़ा थाने में उनके भतीजे रामचंद्र ने फोटो देखकर शिनाख्त की। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण दास पिछले कई दिनों से मणि स्थल पर रह रहे थे।बरखेड़ा थाना क्षेत्र के नवादा महेश गांव से होकर गुजर रही बीसलपुर ब्रांच माइनर में चार अप्रैल की सुबह 68 वर्षीय एक व्यक्ति का शव पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बुजुर्ग की मौत पानी में डूबने से हुई थी। छह दिन बाद बृहस्पतिवार को शव की शिनाख्त हो सकी। शव थाना बरखेड़ा क्षेत्र के ही नकटा मुरादाबाद गांव निवासी लोकतंत्र सेनानी श्रीकृष्ण दास का था। उनके भतीजे रामचंद्र ने थाने में मौजूद फोटो देख शिनाख्त की। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण दास अविवाहित थे और काफी दिनों से गांव के पूरब की तरफ स्थित एक मणि स्थल पर रहते थे। वह मानसिक मंदित भी हो गए थे। कई दिनों से वह मणि स्थल पर दिखाई नहीं दिए तो परिजनों ने तलाश शुरू कर दी। माइनर में शव मिलने की जानकारी होने पर वह थाने पहुंचे। इंस्पेक्टर बरखेड़ा एसके उपाध्याय ने बताया कि शव की शिनाख्त फोटो देखकर कर ली है। इस मामले में परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
बरेली जेल में बंद रहे थे श्रीकृष्ण दास
नकटा मुरादाबाद गांव निवासी कालीचरन ने बताया कि उनके समेत परिवार के पांच लोग भी लोकतंत्र सेनानी हैं। इनमें एक श्रीकृष्ण दास भी थे। उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर 1976 को श्रीकृष्ण दास समेत पांचों लोग बरेली जिला कारागार में बंद हुए थे। यहां पांचों लोग कई दिन तक बंद रहे और फिर आठ फरवरी 1977 को जेल से रिहा हुए थे।
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बरेली जेल में बंद रहे थे श्रीकृष्ण दास
नकटा मुरादाबाद गांव निवासी कालीचरन ने बताया कि उनके समेत परिवार के पांच लोग भी लोकतंत्र सेनानी हैं। इनमें एक श्रीकृष्ण दास भी थे। उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर 1976 को श्रीकृष्ण दास समेत पांचों लोग बरेली जिला कारागार में बंद हुए थे। यहां पांचों लोग कई दिन तक बंद रहे और फिर आठ फरवरी 1977 को जेल से रिहा हुए थे।
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