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यहां धधकती रहती हैं कच्ची शराब की भट्ठियां

Thu, 24 Aug 2017 06:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,पीलीभीत
अमर उजाला ब्यूरो,पीलीभीत Updated Thu, 24 Aug 2017 06:25 PM IST
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346 villages gets identity by illicite liquor production
- फोटो : अमर उजाला
 नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटा तराई का जिला वैसे तो तस्करों के लिए मुफीद है। इस बीच तराई के इलाके में कच्ची शराब का कारोबार भी तेजी से पनप रहा है। जनपद के 346 गांव की पहचान ही कच्ची शराब के कारोबार से है। घनी बस्ती से लेकर जंगल व नहर के किनारे शराब माफिया सक्रिय हैं। पुलिस की साठगांठ के चलते इनकी रोकथाम के नाम पर शराब खरीदने वालों को दस से बीस लीटर के साथ पकड़कर गुडवर्क दिखा अफसरों की वाहवाही लूटी जा रही है। वैसे तो इनकी साठगांठ का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि दिन हो या रात कच्ची शराब की भट्टियां धधकती रहती हैं। अधिकारियों की ओर से कभी कभार अभियान चलाए जाने पर इन स्थानों पर दबिश नहीं दी जाती। चुनाव के समय में शराब के इस अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने के हर बार दावे किए जाते हैं, लेकिन इस दौरान भी कार्रवाई औपचारिकता से बढ़कर नहीं होती। 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान आबकारी और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर 798 छापा मारकर 205 मुकदमे दर्ज किए थे। करीब साढ़े तीन हजार लीटर शराब बरामद की गई। 149 लोगों की मौके से गिरफ्तारी की गई। यह आंकड़ा दिखाकर मातहतों ने उच्चाधिकारियों को अपना गुडवर्क बता दिया। जबकि खुद आबकारी विभाग से जुड़े लोग बताते हैं कि पूरनपुर सर्किल में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर हजारों लीटर शराब किसी भी वक्त पकड़ी जा सकती है। इसके बाद चलाए गए पुलिस के कई अभियानों में एक व्यक्ति के पास से कभी बीस तो कभी पचास लीटर, इससे अधिक की बरामदगी नहीं की जा सकी है।  
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