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15 माह बाद भी पुलिस को नहीं पता शव महेंद्र या किसी और का!
Updated Fri, 04 Aug 2017 05:00 PM IST
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पीलीभीत। सराय गांव में गन्ने के खेत में अधजली हालत में मिले युवक के शव को लेकर पुलिस कार्रवाई 15 माह बाद भी ठप पड़ी है। हत्याकांड का खुलासा करना तो दूर पुलिस आज तक यह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि बरामद शव गांव के महेंद्र का है या फिर किसी और का। डीएनए रिपोर्ट का इंतजार तो कभी रिमाइंडर भेजने की बात कहकर अफसर साख बचा रहे हैं।
गजरौला थाना क्षेत्र के सराय गांव में 24 मई 2016 को गन्ने के खेत में 24 वर्षीय अज्ञात युवक का अधजला शव गन्ने के खेत में पड़ा मिला था। उसकी हत्या करने के बाद शव को जलाने की कोशिश की गई थी। करीब तीन माह बाद पुलिस ने शव की शिनाख्त गांव के महेंद्र के रूप में की। इसको लेकर छानबीन की गई। एक अधिवक्ता को हिरासत में लेने के बाद हुए हंगामे के साथ ही कार्रवाई ठप पड़ गई। उधर अफसरों के तबादले होते गए और संगीन हत्याकांड अभिलेखों मेें गुम होता चला गया। कई महीनों तक पुलिस ने महेंद्र मानकर छानबीन जारी रखी। इसके बाद पांच माह पूर्व शव महेंद्र का होने की बात को लेकर भी पुलिस असमंजस में पड़ गई। इसकी पुष्टि करने के लिए डीएनए जांच के लिए सैंपल फारेंसिक लैब लखनऊ भेजा गया। जिसकी रिपोर्ट आज तक नहीं आ सकी है। ऐसे में शव मिलने के 15 माह बाद भी पुलिस न तो कार्रवाई की दिशा तय कर सकी है, न ही शव की शिनाख्त। सिर्फ डीएनए रिपोर्ट के इंतजार का बहाना कर साख बचाई जा रही है। एसएचओ गजरौला नरेंद्र यादव ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए रिमाइंडर एफएसएल भेजा गया है।
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गजरौला थाना क्षेत्र के सराय गांव में 24 मई 2016 को गन्ने के खेत में 24 वर्षीय अज्ञात युवक का अधजला शव गन्ने के खेत में पड़ा मिला था। उसकी हत्या करने के बाद शव को जलाने की कोशिश की गई थी। करीब तीन माह बाद पुलिस ने शव की शिनाख्त गांव के महेंद्र के रूप में की। इसको लेकर छानबीन की गई। एक अधिवक्ता को हिरासत में लेने के बाद हुए हंगामे के साथ ही कार्रवाई ठप पड़ गई। उधर अफसरों के तबादले होते गए और संगीन हत्याकांड अभिलेखों मेें गुम होता चला गया। कई महीनों तक पुलिस ने महेंद्र मानकर छानबीन जारी रखी। इसके बाद पांच माह पूर्व शव महेंद्र का होने की बात को लेकर भी पुलिस असमंजस में पड़ गई। इसकी पुष्टि करने के लिए डीएनए जांच के लिए सैंपल फारेंसिक लैब लखनऊ भेजा गया। जिसकी रिपोर्ट आज तक नहीं आ सकी है। ऐसे में शव मिलने के 15 माह बाद भी पुलिस न तो कार्रवाई की दिशा तय कर सकी है, न ही शव की शिनाख्त। सिर्फ डीएनए रिपोर्ट के इंतजार का बहाना कर साख बचाई जा रही है। एसएचओ गजरौला नरेंद्र यादव ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसके लिए रिमाइंडर एफएसएल भेजा गया है।
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