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पुलिस टीम के सामने ही भाग गए पशु तस्कर
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जहानाबाद (पीलीभीत)। पुलिस की नाकामी की एक बानगी शनिवार रात हुई कार्रवाई के दौरान सामने आई। पशु तस्करी की सूचना पर जहानाबाद थाना पुलिस ने दलेलगंज गांव में एक मकान में छापा मारा। यहां पुलिस के सामने तस्कर भागने में कामयाब हो गए। यह बात दीगर रही कि थाना पुलिस मकान में बंधे गोवंश और औजार की बरामदगी को ही गुडवर्क बता पीठ थपाने में जुटी रही। दरोगा की ओर से चार शातिर पशु तस्करों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। अब उनकी जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
घटना जहानबाद थाना क्षेत्र से है। शनिवार रात एसआई विशेष कुमार, कांस्टेबल विक्रांत, पंकज तेवतिया, अरुण कुमार, जसमेंद्र सिंह गश्त पर निकले गए थे। रात करीब पौने 12 बजे उनको दलेलगंज गांव निवासी यूनुस के खाली मकान में गोकशी की सूचना मिली। इस पर टीम ने बताए गए मकान पर छापा मारा। पुलिस का कहना है कि जब वह पहुंचे तो तस्कर मकान में ही मौजूद थे। छापा पड़ने के बाद तस्कर वहां से भाग गए। पीछा कर उनको पकड़ने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इतना जरूर पुलिस ने टार्च की रोशनी में आरोपियों का चेहरा पहचान लिया। सभी पुराने तस्कर थे, इसलिए नाम-पते की जानकारी भी हो गई। पुलिस को मकान में छह गोवंशीय पशु बंधे मिले। पशुओं के शरीर पर चोट के निशान भी मिले। इसके अलावा गोवंश की हत्या में इस्तेमाल किए जाने वाले काफी औजार भी बरामद किए। बरामद पशुओं को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। आला अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया गया, फिर नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है।
कैसे की जा रही तस्करों की निगरानी
जहानाबाद पुलिस चकमा देकर भागे तस्करों के पहले भी जेल जाने की बात कहते हुए उनको गोकशी का शातिर अपराधी बता रही है। इधर, अधिकारी बढ़ती गोकशी की घटनाओं के बाद पुराने अपराधियों की निगरानी करने का दावा कर रहे हैं। यहां तक कि उनकी जमानत लेने वालों पर भी शिकंजा कसने की योजना बनाई गई थी। ऐसे में सवाल है कि फिर थाना स्तर पर पुलिस किस तरह से तस्करों की निगरानी कर रही है कि वह आसानी से मकान को स्लाटर हाउस बनाकर गोकशी का धंधा कर रहे हैं।
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2018 में 12.86 प्रतिशत बढ़ी थी गोकशी
नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटा जिला होने के कारण लंबे समय से गोकशी का धंधा जिले में बड़े स्तर पर रहा है। वर्ष 2016 में 213, वर्ष 2017 में 149 मुकदमे दर्ज हुए थे। वहीं बीते साल 2018 में गोकशी के मामलों की संख्या 171 तक पहुंच गई थी। पूरे 12.86 प्रतिशत की वृद्घि हुई थी। इस दौरान 378 तस्कर जेल भेजे गए। नौ पर रासुका की कार्रवाई की गई। वहीं 50 पर गैंगस्टर एक्ट तो 102 के खिलाफ गुंडा एक्ट किया गया। कार्रवाई का आंकड़ा बड़ा रहा, लेकिन इस पर रोकथाम लगाना मुमकिन नहीं हो सका। 2017 में सूबे की सत्ता में परिवर्तन होने पर शासन स्तर से हुई सख्ती के चलते जरूर असर देखने को मिला था, लेकिन अब हालात पुराने ढर्रे पर लौटने लगे हैं।
सूचना पर दलेलगंज गांव में एक मकान में छापा मारा गया था। वहां से गोवंशीय पशु और औजार बरामद हुए हैं। दरोगा विशेष कुमार की ओर से खमरिया दलेलगंज गांव निवासी जीशान, कामिल, रहीश मियां और सलीम के खिलाफ गोवध अधिनियम और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी पहले भी गोकशी में जेल जा चुके हैं। उनकी धरपकड़ को टीम लगाई गई है। कमल सिंह, इंस्पेक्टर जहानाबाद
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घटना जहानबाद थाना क्षेत्र से है। शनिवार रात एसआई विशेष कुमार, कांस्टेबल विक्रांत, पंकज तेवतिया, अरुण कुमार, जसमेंद्र सिंह गश्त पर निकले गए थे। रात करीब पौने 12 बजे उनको दलेलगंज गांव निवासी यूनुस के खाली मकान में गोकशी की सूचना मिली। इस पर टीम ने बताए गए मकान पर छापा मारा। पुलिस का कहना है कि जब वह पहुंचे तो तस्कर मकान में ही मौजूद थे। छापा पड़ने के बाद तस्कर वहां से भाग गए। पीछा कर उनको पकड़ने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इतना जरूर पुलिस ने टार्च की रोशनी में आरोपियों का चेहरा पहचान लिया। सभी पुराने तस्कर थे, इसलिए नाम-पते की जानकारी भी हो गई। पुलिस को मकान में छह गोवंशीय पशु बंधे मिले। पशुओं के शरीर पर चोट के निशान भी मिले। इसके अलावा गोवंश की हत्या में इस्तेमाल किए जाने वाले काफी औजार भी बरामद किए। बरामद पशुओं को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। आला अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया गया, फिर नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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कैसे की जा रही तस्करों की निगरानी
जहानाबाद पुलिस चकमा देकर भागे तस्करों के पहले भी जेल जाने की बात कहते हुए उनको गोकशी का शातिर अपराधी बता रही है। इधर, अधिकारी बढ़ती गोकशी की घटनाओं के बाद पुराने अपराधियों की निगरानी करने का दावा कर रहे हैं। यहां तक कि उनकी जमानत लेने वालों पर भी शिकंजा कसने की योजना बनाई गई थी। ऐसे में सवाल है कि फिर थाना स्तर पर पुलिस किस तरह से तस्करों की निगरानी कर रही है कि वह आसानी से मकान को स्लाटर हाउस बनाकर गोकशी का धंधा कर रहे हैं।
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2018 में 12.86 प्रतिशत बढ़ी थी गोकशी
नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटा जिला होने के कारण लंबे समय से गोकशी का धंधा जिले में बड़े स्तर पर रहा है। वर्ष 2016 में 213, वर्ष 2017 में 149 मुकदमे दर्ज हुए थे। वहीं बीते साल 2018 में गोकशी के मामलों की संख्या 171 तक पहुंच गई थी। पूरे 12.86 प्रतिशत की वृद्घि हुई थी। इस दौरान 378 तस्कर जेल भेजे गए। नौ पर रासुका की कार्रवाई की गई। वहीं 50 पर गैंगस्टर एक्ट तो 102 के खिलाफ गुंडा एक्ट किया गया। कार्रवाई का आंकड़ा बड़ा रहा, लेकिन इस पर रोकथाम लगाना मुमकिन नहीं हो सका। 2017 में सूबे की सत्ता में परिवर्तन होने पर शासन स्तर से हुई सख्ती के चलते जरूर असर देखने को मिला था, लेकिन अब हालात पुराने ढर्रे पर लौटने लगे हैं।
सूचना पर दलेलगंज गांव में एक मकान में छापा मारा गया था। वहां से गोवंशीय पशु और औजार बरामद हुए हैं। दरोगा विशेष कुमार की ओर से खमरिया दलेलगंज गांव निवासी जीशान, कामिल, रहीश मियां और सलीम के खिलाफ गोवध अधिनियम और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी पहले भी गोकशी में जेल जा चुके हैं। उनकी धरपकड़ को टीम लगाई गई है। कमल सिंह, इंस्पेक्टर जहानाबाद