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शासन ने कसा तो अफसरों को फिर याद आई अवैध शराब

Sat, 09 Feb 2019 11:42 PM IST
Prashant Singh Prashant Singh
Updated Sat, 09 Feb 2019 11:42 PM IST
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शासन ने कसा तो अफसरों को फिर याद आई अवैध शराब
पीलीभीत। यूपी-उत्तराखंड में जहरीली शराब से 35 लोगों की मौत के बाद शासन ने कसा तो जिले में एक बार फिर अधिकारियों को कच्ची शराब के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने की याद आ गई है। पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें बनाकर छापामार की गई। खास बात रही कि अधिकारी होटल, ढाबों पर कच्ची शराब तलाशते दिखाई दिए। मानों कच्ची शराब नहीं, सार्वजनिक स्थान पर जाम छलकाने वालों की धरपकड़ को अभियान छेड़ा गया हो।
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नेपाल और उत्तराखंड की सीमा से सटा होने के कारण जिले में वर्षों से कच्ची शराब का अवैध धंधा होता आया है। जंगल और नदी किनारे के इलाकों में शराब की बड़े पैमाने पर खेप तैयार की जाती है। माधोटांडा, हजारा क्षेत्र में इस अवैध धंधे में संलिप्त लोग कच्ची शराब तैयार कर आसपास के जिलों में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल तक पहुंचाते हैं। सिर्फ माधोटांडा क्षेत्र की बात करें तो ये कारोबार कम नहीं है। कलीनगर, मझारा, कटकवारा, वीरखेड़ा समेत कई गांवों की पहचान ही कच्ची शराब के कारोबार से है। यहां पर कच्ची शराब के कारोबारी जंगल का सहारा लेकर साठगांठ से बेखौफ पनप रहे हैं। जगह-जगह धधकती भट्ठियां इसकी गवाही दे रही हैं। शहर के भी कई मोहल्लों में कच्ची शराब बनती है। पुलिस के स्तर से धरपकड़ दस से बीस लीटर तक सीमित है। वहीं आबकारी विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। अब शासन से हुई सख्ती के बाद इस पर अंकुश लगाने का दावा करते हुए मुहिम छेड़ी गई है।
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शुक्रवार रात को एसडीएम सौरभ दुबे, सीओ सदर योगेंद्र कुमार ने आबकारी टीम के साथ छापामारी की। इसमें टनकपुर हाईवे पर छतरी चौराहा, नौगवां चौराहा, माधोटांडा रोड समेत कई जगह होटल, ढाबे और दुकानों पर चेकिंग की गई। इसके अलावा थानाध्यक्षों को भी निर्देश दिए गए। जिसके बाद अधिकारी सख्ती करने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन अभी फिलहाल धरातल पर कोई सफल नतीजा नहीं निकल सका है।
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