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सिस्टम पर सवालिया निशान लगा गई कैदी हेमराज की मौत
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Fri, 09 Nov 2018 05:32 PM IST
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jail
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्थिति स्पष्ट होने पर नहीं हुई कानूनी कार्रवाई
लापरवाही और वसूली के आरोपों को भी दबा गए विभागीय अधिकारी, कोई जांच तक नहीं
कैदी हेमराज की मौत की वजह भले हार्ट की बीमारी रही हो, लेकिन उसकी मौत के बाद 24 घंटे तक मचा हत्या का शोर सिस्टम पर सवालिया निशान लगा गया है। जिला अस्पताल से लेकर जेल तक उजागर हुई लापरवाही के साथ-साथ परिवार वालों द्वारा जेल प्रशासन पर लगाए गए वसूली के आरोपों को भी दबा दिया गया है। खास बात रही कि हकीकत का पता लगाने के लिए संबंधित विभाग के अफसरों द्वारा इसकी कोई जांच भी नहीं की गई है। सिर्फ मुकदमे को लेकर मिली क्लीन चिट के नाम पर घटना के बाद उजागर तमाम बिंदुओं को दफन कर दिया गया है।
बेटे की गोली मारकर हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र के ईंटारोड़ा गांव निवासी 58 वर्षीय हेमराज को जेल प्रशासन बुधवार सुबह 10:45 बजे मृत अवस्था में लेकर पहुंचा था। जेल प्रशासन का कहना था कि हेमराज की अचानक तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल भेजा गया। जेल प्रशासन यह भी कह रहा था कि हेमराज पिछले तीन दिन से अस्वस्थ चल रहा था। अब सवाल उठता है कि यदि हेमराज की तबीयत खराब थी तो उसके परिवार को इसकी सूचना क्यों नहीं दी। जेल से अस्पताल हेमराज को एक बंदी रक्षक लेकर आया। सवाल यहां भी खड़ा है। अगर हेमराज की तबीयत अधिक खराब थी तो कैदी के साथ जेल से कोई चिकित्सक जिला अस्पताल तक क्यों नहीं आया? यह सवाल भी जेल प्रशासन की व्यवस्था उजागर कर रहे हैं।
जिला अस्पताल स्थित मोर्चरी में रखे गए कैदी के शव की नाक कटी और चेहरे पर चोट के निशान मिलने के बाद जेल प्रशासन पर बेटी मिथिलेश ने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। जमकर हंगामा भी हुआ था। जेल प्रशासन पर मशक्कत के नाम पर वसूली करने तो जिला अस्पताल की मोर्चरी में शव फ्रीजर में रखने के बजाए लापरवाह रवैया अपनाकर जमीन पर रखने की बात सामने आई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जानवर द्वारा नाक कुतरने की बात निकलने के बाद भी पुलिस ने हत्या के आरोप गलत बताते हुए जेल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। यही वजह रही कि घटना के तीसरे दिन भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। आरोपों की सत्यता का पता करने के लिए जांच तक नहीं कराई जा सकी है।
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परिवारीजनों द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में हत्या का आरोप लगाया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हार्ट की बीमारी बताई गई। नाक भी जानवरों द्वारा कुतरने से क्षतविक्षत होना बताई गई। ऐसे में तहरीर पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं बनती।
धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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लापरवाही और वसूली के आरोपों को भी दबा गए विभागीय अधिकारी, कोई जांच तक नहीं
कैदी हेमराज की मौत की वजह भले हार्ट की बीमारी रही हो, लेकिन उसकी मौत के बाद 24 घंटे तक मचा हत्या का शोर सिस्टम पर सवालिया निशान लगा गया है। जिला अस्पताल से लेकर जेल तक उजागर हुई लापरवाही के साथ-साथ परिवार वालों द्वारा जेल प्रशासन पर लगाए गए वसूली के आरोपों को भी दबा दिया गया है। खास बात रही कि हकीकत का पता लगाने के लिए संबंधित विभाग के अफसरों द्वारा इसकी कोई जांच भी नहीं की गई है। सिर्फ मुकदमे को लेकर मिली क्लीन चिट के नाम पर घटना के बाद उजागर तमाम बिंदुओं को दफन कर दिया गया है।
बेटे की गोली मारकर हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र के ईंटारोड़ा गांव निवासी 58 वर्षीय हेमराज को जेल प्रशासन बुधवार सुबह 10:45 बजे मृत अवस्था में लेकर पहुंचा था। जेल प्रशासन का कहना था कि हेमराज की अचानक तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल भेजा गया। जेल प्रशासन यह भी कह रहा था कि हेमराज पिछले तीन दिन से अस्वस्थ चल रहा था। अब सवाल उठता है कि यदि हेमराज की तबीयत खराब थी तो उसके परिवार को इसकी सूचना क्यों नहीं दी। जेल से अस्पताल हेमराज को एक बंदी रक्षक लेकर आया। सवाल यहां भी खड़ा है। अगर हेमराज की तबीयत अधिक खराब थी तो कैदी के साथ जेल से कोई चिकित्सक जिला अस्पताल तक क्यों नहीं आया? यह सवाल भी जेल प्रशासन की व्यवस्था उजागर कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल स्थित मोर्चरी में रखे गए कैदी के शव की नाक कटी और चेहरे पर चोट के निशान मिलने के बाद जेल प्रशासन पर बेटी मिथिलेश ने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। जमकर हंगामा भी हुआ था। जेल प्रशासन पर मशक्कत के नाम पर वसूली करने तो जिला अस्पताल की मोर्चरी में शव फ्रीजर में रखने के बजाए लापरवाह रवैया अपनाकर जमीन पर रखने की बात सामने आई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जानवर द्वारा नाक कुतरने की बात निकलने के बाद भी पुलिस ने हत्या के आरोप गलत बताते हुए जेल प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। यही वजह रही कि घटना के तीसरे दिन भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। आरोपों की सत्यता का पता करने के लिए जांच तक नहीं कराई जा सकी है।
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परिवारीजनों द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में हत्या का आरोप लगाया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हार्ट की बीमारी बताई गई। नाक भी जानवरों द्वारा कुतरने से क्षतविक्षत होना बताई गई। ऐसे में तहरीर पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं बनती।
धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी