{"_id":"60eb3af38ebc3eccc61997d4","slug":"covid-hospital-case-pilibhit-news-bly4528060139","type":"story","status":"publish","title_hn":"एल-2 कोविड अस्पताल में डेथ ऑडिट पूरा, मगर 189 मरीजों की मौत कारण पता नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एल-2 कोविड अस्पताल में डेथ ऑडिट पूरा, मगर 189 मरीजों की मौत कारण पता नहीं
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पीलीभीत। कोविड अस्पताल में मरने वाले मरीजों का स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेथ ऑडिट कराया गया था, लेकिन ऑडिट होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग 189 नॉन कोविड से मरने वालों की मौत का कारण नहीं बता सका है। जबकि मृत्यु प्रमाणपत्र में उनकी मौत को नॉन कोविड दर्शाया गया है। ऑडिट के बाद उन लोगों की कोई लाइन लिस्ट नहीं बनाई गई है। सिर्फ ऑडिट करने वाले जांच अधिकारी ने औपचारिकता पूरी कर सीएमओ को रिपोर्ट दे दी है। हालांकि अभी तक ऑडिट की कोई सूची शासन को नहीं भेजी गई है।
संक्रमण की दूसरी लहर में जिले के काफी लोगों संक्रमित हुए थे। इस दौरान अप्रैल और मई में 6500 कोरोना संक्रमित निकले थे। इस दौरान एल-2 कोविड अस्पताल में इन दो माह में 770 मरीज भर्ती हुए थे। जिनमें 283 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 201 लोगों की मौत का हवाला दिया है। उस सूची में 12 लोगों को कोविड पॉजिटिव बताया है, जबकि 189 लोगों को नॉन कोविड दिखाते हुए उनके मृत्यु प्रमाणपत्र नॉन कोविड के जारी किए गए थे। कोविड अस्पताल में मरने वाले 189 लोगों के आश्रितों में अधिकांश लोगों ने मृत्यु प्रमाणपत्र पर नॉन कोविड लिखा होने के कारण इसका विरोध करते हुए शिकायत भी की थी। शिकायत पर शासन ने जिले में डेथ ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। जिसकी जिम्मेदारी एसीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता को दी गई थी। ऑडिट शुरू होने के दौरान 98 मरीजों की बेड हेड टिकट गायब मिली थी। जिससे स्वास्थ्य विभाग गुपचुप तरीके से निपटाने में लगा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों की बीएचटी मिल गई थी। लेकिन डेथ ऑडिट पूरा होने के बाद भी नॉन कोविड मृतकों की मौत अगर कोरोना से नहीं हुई तो किसी बीमारी से हुई है। इसका स्वास्थ्य विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। सूत्रों की मानें तो रिकॉर्ड अधूरा होने के कारण मृतकों की लाइन लिस्ट नहीं बन सकी है। जिले में संक्रमण का ग्राफ कम दिखाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जमकर आंकड़ेबाजी कर खेल किया है।
डेथ ऑडिट पूरा हो चुका है। हालांकि अभी लाइन लिस्ट तैयार नहीं की गई है। किसी तरह की कोविड में मरने वालों की मौत में कोई आंकड़ेबाजी नहीं की गई है। सूची बनवाई जा रही है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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संक्रमण की दूसरी लहर में जिले के काफी लोगों संक्रमित हुए थे। इस दौरान अप्रैल और मई में 6500 कोरोना संक्रमित निकले थे। इस दौरान एल-2 कोविड अस्पताल में इन दो माह में 770 मरीज भर्ती हुए थे। जिनमें 283 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 201 लोगों की मौत का हवाला दिया है। उस सूची में 12 लोगों को कोविड पॉजिटिव बताया है, जबकि 189 लोगों को नॉन कोविड दिखाते हुए उनके मृत्यु प्रमाणपत्र नॉन कोविड के जारी किए गए थे। कोविड अस्पताल में मरने वाले 189 लोगों के आश्रितों में अधिकांश लोगों ने मृत्यु प्रमाणपत्र पर नॉन कोविड लिखा होने के कारण इसका विरोध करते हुए शिकायत भी की थी। शिकायत पर शासन ने जिले में डेथ ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। जिसकी जिम्मेदारी एसीएमओ डॉ. अश्वनी गुप्ता को दी गई थी। ऑडिट शुरू होने के दौरान 98 मरीजों की बेड हेड टिकट गायब मिली थी। जिससे स्वास्थ्य विभाग गुपचुप तरीके से निपटाने में लगा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों की बीएचटी मिल गई थी। लेकिन डेथ ऑडिट पूरा होने के बाद भी नॉन कोविड मृतकों की मौत अगर कोरोना से नहीं हुई तो किसी बीमारी से हुई है। इसका स्वास्थ्य विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। सूत्रों की मानें तो रिकॉर्ड अधूरा होने के कारण मृतकों की लाइन लिस्ट नहीं बन सकी है। जिले में संक्रमण का ग्राफ कम दिखाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जमकर आंकड़ेबाजी कर खेल किया है।
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डेथ ऑडिट पूरा हो चुका है। हालांकि अभी लाइन लिस्ट तैयार नहीं की गई है। किसी तरह की कोविड में मरने वालों की मौत में कोई आंकड़ेबाजी नहीं की गई है। सूची बनवाई जा रही है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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