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अनलॉक में भी ठप पड़ा मावे का कारोबार

Wed, 30 Jun 2021 01:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jun 2021 01:08 AM IST
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corona affect in Mawa business
बीसलपुर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन और अब अनलॉक में भी मावा कारोबार को रफ्तार नहीं मिल सकी है। कारोबारियों के मुताबिक दुकानें भले ही खुल गईं हों, मगर डिमांड पहले की तरह नहीं रही।
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तहसील क्षेत्र के बरसिया, मीरपुर रतन, लुहिचा, पटनिया और टिहुलिया आदि गांवों में बसे लोगों का मुख्य कारोबार मावा उत्पादन है। यह लोग खेती करने के साथ ही दुधारू पशु पालते हैं। दूध से मावा बनाकर बाजार में बेचते हैं। सहालग के सीजन में मावा महंगा बिक जाता है।
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बरसिया में करीब 100, लुहिचा में 700, टिहुलिया में 100, पटनिया में 250 और मीरपुर रतन में 300 परिवार इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। टिहुलिया के उत्पादक कस्बा टिकरी, मीरपुर रतनपुर के उत्पादक कस्बा मधवापुर में, लुहिचा, बरसिया और पटनिया के उत्पादक नगर की मावा बाजार में बेचते हैं। मगर कोरोना काल में यह कारोबार भी अछूता नहीं रहा।
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पिछले साल और अब कोरोना की दूसरी लहर में लॉकडाउन लगा तो मिठाई की दुकाने बंद हो गई थी। शादियां भी न के बराबर हुईं। जो हुई भीं उनमें सीमित संख्या में पारिवारिक कार्यक्रम कर लिए गए थे। इससे कारोबार ठप पड़ गया था। अभी भी 30 प्रतिशत लोग मावा नहीं बना रहे हैं। उनका मानना है कि पहले कारोबार रफ्तार पकड़ ले और संक्रमण खत्म हो, तभी इसमें आगे काम शुरू किया जाए। अभी वह दूध बेचने लगे हैं। कारोबारियों का मानना है कि अब तक उनका 50 लाख से अधिक का नुकसान हो चुका है। इसकी भरपाई होना भी मुश्किल है।
गांव के 200 लोग इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। लॉकडाउन से पहले रोजाना लगभग एक क्विंटल मावा बनता था। बंदी हुई तो 10 किलो की भी बिक्री नहीं हो सकी। अब भी हालात सुधरे नहीं हैं। - अरविंद सिंह, मावा उत्पादक, गांव बरसिया
मावा का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ा है। दुकानें तो खुलने लगी हैं, मगर डिमांड अभी कम ही है। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। नुकसान की भरपाई अब मुमकिन नहीं लगती। - वीरपाल, मावा उत्पादक, गांव पटनिया
मेरा परिवार मावे के कारोबार में कई दशकों से है। पहले कभी इस धंधे में नुकसान नही हुआ। मगर कोरोना काल में जो नुकसान हुआ, उसने कमर तोड़कर रख दी है। अब तो भरपाई भी मुश्किल पड़ेगी। - सतीश कुमार, मावा उत्पादक, गांव लुहिचा
लॉकडाउन में आढ़त बंद रहने से मावे का व्यापार रसातल में पहुंच गया है। दुकान के कर्मचारी भी हटा दिए हैं। अब गिरे हुए मावा व्यापार को उठाने का प्रयास कर रहे हैं। मगर काफी समय लगेगा। - सोनू, मावा व्यापारी
वैसे तो सभी व्यापार प्रभावित हुए हैं लेकिन मावा व्यापार सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। दुकानें बंद पड़ गई थी। कोई अन्य काम साथ में था नहीं, तो नुकसान ही झेल रहे हैं। - नागेंद्र कुमार मावा व्यापारी

मावे के व्यापार में जबरदस्त गिरावट आई है। व्यापारियों को दुकानों का किराया जेब से देना पड़ा। नुकसान की बात करें तो अभी अनलॉक में भी काम सुचारू नहीं हो सका है। यही हाल रहा तो दूसरा काम करना पड़ेगा। - श्यामू गुप्ता, मावा व्यापारी
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