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आरोपपत्र का जवाब न देने पर सीएमओ ने निलंबित लिपिक को दिया नोटिस
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पीलीभीत। शासन से भेजे गए आरोपपत्र का जवाब न देने पर सीएमओ ने निलंबित लिपिक हीरेश सरन को नोटिस जारी कर पांच दिन में जवाब तलब किया है। दो दिन पहले निलंबित होने के बावजूद सीएमओ कार्यालय में बैठने पर लिपिक को वहां से निकाला गया था।
सीएमओ कार्यालय के लिपिक कुंवर हीरेश सरन सक्सेना को फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल करने के मामले में पिछले साल तीस दिसंबर को निलंबित करते हुए ऐडी हेल्थ बरेली ऑफिस से संबद्ध कर दिया गया था। शासनस्तर से चल रही जांच में लिपिक पर आरोप सही साबित हुए। जांच अधिकारी अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा लखनऊ डॉ. एससी सिंह ने आरोपपत्र तालीम कराने के निर्देश दिए थे।
आरोपपत्र 24 जनवरी को बरेली ऐडी हेल्थ ऑफिस भेजा गया, लेकिन लिपिक ने वहां भी प्राप्त नहीं किया। दस मार्च को फिर पत्र भेजा गया लेकिन लिपिक ने आरोपपत्र नहीं लिया। 17 फरवरी को डाक द्वारा और फिर उसके बाद 26 फरवरी और 28 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग की टीम लिपिक के घर पर नोटिस चस्पा करने गई लेकिन टीम को नोटिस चस्पा नहीं करने दिया गया।
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वहीं, वह लगातार सीएमओ कार्यालय आ-जा रहा था। शुक्रवार को वह पुराने सीएमओ कार्यालय के स्टोर रूम में बैठा था। सीएमओ खुद मौके पर गए और लिपिक को बाहर निकाला। अब सीएमओ ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पांच दिन में जवाब मांगा है।
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सीएमओ कार्यालय के लिपिक कुंवर हीरेश सरन सक्सेना को फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल करने के मामले में पिछले साल तीस दिसंबर को निलंबित करते हुए ऐडी हेल्थ बरेली ऑफिस से संबद्ध कर दिया गया था। शासनस्तर से चल रही जांच में लिपिक पर आरोप सही साबित हुए। जांच अधिकारी अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा लखनऊ डॉ. एससी सिंह ने आरोपपत्र तालीम कराने के निर्देश दिए थे।
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आरोपपत्र 24 जनवरी को बरेली ऐडी हेल्थ ऑफिस भेजा गया, लेकिन लिपिक ने वहां भी प्राप्त नहीं किया। दस मार्च को फिर पत्र भेजा गया लेकिन लिपिक ने आरोपपत्र नहीं लिया। 17 फरवरी को डाक द्वारा और फिर उसके बाद 26 फरवरी और 28 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग की टीम लिपिक के घर पर नोटिस चस्पा करने गई लेकिन टीम को नोटिस चस्पा नहीं करने दिया गया।
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वहीं, वह लगातार सीएमओ कार्यालय आ-जा रहा था। शुक्रवार को वह पुराने सीएमओ कार्यालय के स्टोर रूम में बैठा था। सीएमओ खुद मौके पर गए और लिपिक को बाहर निकाला। अब सीएमओ ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पांच दिन में जवाब मांगा है।