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Pilibhit News: पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां न मिलने पर किसान ने किया हंगामा
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बीसलपुर। पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां न मिलने से क्षुब्ध गांव करनैया के एक किसान ने सोमवार को गन्ना समिति कार्यालय में सचिव के समक्ष काफी हंगामा किया।
गांव करनैया के एक किसान ने सोमवार को सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव से कहा कि उनके पास 80 बीघा पौध प्रजाति का गन्ना है। गन्ना विभाग की हीलाहवाली के चलते अब तक उसे पौध प्रजाति के गन्ने की एक भी पर्ची नहीं मिली हेै।
नियमानुसार नवंबर में गन्ना सत्र शुरू होते ही पेड़ी प्रजाति के साथ पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां भी मिलनी शुरू हो जानी चाहिए थीं। पर्चियां न मिलने से उनके खेतों में खड़ा पौध प्रजाति का गन्ना सूख रहा है। किसान सचिव से पर्चियां दिलवाने की मांग कर रहा था।
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समिति सचिव ने यह कहकर किसान को समझाने का प्रयास किया कि गन्ने की पर्चियां लखनऊ स्थित गन्ना आयुक्त कार्यालय से जारी होती है। पर्चियां जारी कराना सचिव के हाथ में नहीं है। किसान सचिव के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और हंगामा करने लगा।
किसान का आरोप था कि सचिव जिम्मेदारी से बचने के लिए झूठ बोल रहे हैं। हंगामे के दौरान कार्यालय में काफी भीड़ लग गई। इससे कामकाज भी ठप हो गया। सचिव ने किसान की अपने विभाग के एक अधिकारी से फोन पर बात कराई, तब कही जाकर किसान ने विश्वास किया।
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गांव करनैया के एक किसान ने सोमवार को सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव से कहा कि उनके पास 80 बीघा पौध प्रजाति का गन्ना है। गन्ना विभाग की हीलाहवाली के चलते अब तक उसे पौध प्रजाति के गन्ने की एक भी पर्ची नहीं मिली हेै।
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नियमानुसार नवंबर में गन्ना सत्र शुरू होते ही पेड़ी प्रजाति के साथ पौध प्रजाति के गन्ने की पर्चियां भी मिलनी शुरू हो जानी चाहिए थीं। पर्चियां न मिलने से उनके खेतों में खड़ा पौध प्रजाति का गन्ना सूख रहा है। किसान सचिव से पर्चियां दिलवाने की मांग कर रहा था।
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समिति सचिव ने यह कहकर किसान को समझाने का प्रयास किया कि गन्ने की पर्चियां लखनऊ स्थित गन्ना आयुक्त कार्यालय से जारी होती है। पर्चियां जारी कराना सचिव के हाथ में नहीं है। किसान सचिव के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और हंगामा करने लगा।
किसान का आरोप था कि सचिव जिम्मेदारी से बचने के लिए झूठ बोल रहे हैं। हंगामे के दौरान कार्यालय में काफी भीड़ लग गई। इससे कामकाज भी ठप हो गया। सचिव ने किसान की अपने विभाग के एक अधिकारी से फोन पर बात कराई, तब कही जाकर किसान ने विश्वास किया।