{"_id":"60772e218ebc3ed38166d764","slug":"civic-amenities-pilibhit-news-bly4439315154","type":"story","status":"publish","title_hn":"संक्रमित के अंतिम संस्कार को लेकर हंगामा, भीड़ ने लगाया जाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संक्रमित के अंतिम संस्कार को लेकर हंगामा, भीड़ ने लगाया जाम
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बरखेड़ा (पीलीभीत)। कोरोना संक्रमित बुजुर्ग की मौत के बाद शव के अंतिम संस्कार को लेकर परिवार वालों और स्वास्थ्य कर्मियों में विवाद हो गया। पहले रात में ही अंत्येष्टि को लेकर अनबन होती रही। फिर परिवार की ओर से शव का चेहरा दिखाने को कहा गया तो इनकार कर दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने मारपीट की, इससे ग्रामीण भड़क गए। स्वास्थ्य कर्मी एंबुलेंस से शव लेकर लौट गए। उधर, गुस्साई भीड़ ने लिंक मार्ग पर जाम लगा दिया। सीओ पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराने को उनसे बातचीत की।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव आमडार निवासी रामपाल सिंह चार अप्रैल को बंटवारे को लेकर सगे भाई के परिवार से हुई मारपीट में घायल हो गए थे। उन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। बेटे राजबहादुर ने चाचा राजपाल, रानू सिंह, रणवीर सिंह और हरपाल सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अस्पताल में बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे इलाज के दौरान रामपाल की मौत हो गई। इससे कुछ घंटे पहले ही निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने एंटीजन किट से रामपाल की कोरोना जांच की थी, जिसमें वह संक्रमित निकले थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पूर्व में दर्ज की गई रिपोर्ट में भी गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ा दी गई थी।
शाम करीब सात बजे स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस एंबुलेंस से शव लेकर गांव पहुंचे और कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार रात में ही करने को कहा गया। इस पर परिवार वालों ने इनकार कर दिया। राज बहादुर का कहना था कि परिवार को बिना बताए कोरोना जांच कर दी गई। इसकी रिपोर्ट भी उन्हें नहीं दी गई थी। अब अंतिम संस्कार का दबाव बनाने लगे। परिवार रात होने की वजह से बृहस्पतिवार को अंतिम संस्कार कराना चाहता था। मगर जब बातचीत हुई तो परिवार के सभी सदस्य मान भी गए थे। शव का एक बार चेहरा दिखाने को कहा तो इनकार कर दिया। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से मारपीट शुरू कर दी। इस पर ग्रामीण भी आ गए थे। फिर एंबुलेंसकर्मी शव लेकर जाने लगे। उन्हें रोकने का प्रयास किया, मगर कोई नहीं माना। एंबुलेंस कर्मी शव लेकर लौट गए। इसके बाद ग्रामीणों ने आमडार और नगरा गांव के बीच जाम लगा दिया।
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उधर, सूचना पर सीओ प्रशांत कुमार, बरखेड़ा इंस्पेक्टर वीरेश कुमार, कोतवाल बीसलपुर कमल सिंह के साथ पहुंचे। परिवार को आश्वस्त कर आधे घंटे बाद जाम खुलवा दिया। अफसर परिवार के लोगों से बातचीत में जुटे रहे। फिलहाल शव पोस्टमार्टम हाउस पर मोर्चरी में रखवा दिया गया है।
भीड़ हो गई थी उग्र, इसलिए लौट आए : एंबुलेंस चालक
ग्रामीणों की भीड़ पर एंबुलेंस में तोड़फोड़ करने का आरोप भी लगाया गया है। एंबुलेंस चालक महेंद्र ने बताया कि शव लेकर वह गांव पहुंचे थे। जिम्मेदार अधिकारी परिवार से अंतिम संस्कार को लेकर बातचीत कर रहे थे। फिर किस बात पर विवाद तेज हो गया और भीड़ उग्र हो गई थी। एंबुलेंस में तोड़फोड़ की कोशिश की। इसीलिए शव लेकर लौट आए। अधिकारियों के निर्देश पर शव को पोस्टमार्टम हाउस पर रखवा दिया है।
अंतिम संस्कार के समय को लेकर विवाद की स्थिति बनी। भीड़ के होने पर एंबुलेंस को मौके से हटा दिया था। चूंकि मामला कोरोना संक्रमित से भी जुड़ा था, इसलिए शव सुरक्षित मोर्चरी में रखवा दिया है। भीड़ ने जाम लगा दिया। परिवार के लोगों से बातचीत कर रहे हैं। कोविड प्रोटोकॉल तहत ही अंतिम संस्कार होना है।
- प्रशांत कुमार, सीओ बीसलपुर
निजी अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग की कोरोना जांच की गई थी। जांच के कुछ देर बाद ही मौत हो गई। अस्पताल से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कोविड नियमों का पालन करते हुए अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था की गई थी। भीड़ भड़कने के कारण अभी अंतिम संस्कार नहीं हो सका।
- डॉ. सीएम चतुर्वेदी, प्रभारी सीएमओ
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बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव आमडार निवासी रामपाल सिंह चार अप्रैल को बंटवारे को लेकर सगे भाई के परिवार से हुई मारपीट में घायल हो गए थे। उन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। बेटे राजबहादुर ने चाचा राजपाल, रानू सिंह, रणवीर सिंह और हरपाल सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अस्पताल में बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे इलाज के दौरान रामपाल की मौत हो गई। इससे कुछ घंटे पहले ही निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने एंटीजन किट से रामपाल की कोरोना जांच की थी, जिसमें वह संक्रमित निकले थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पूर्व में दर्ज की गई रिपोर्ट में भी गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ा दी गई थी।
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शाम करीब सात बजे स्वास्थ्य कर्मी और पुलिस एंबुलेंस से शव लेकर गांव पहुंचे और कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार रात में ही करने को कहा गया। इस पर परिवार वालों ने इनकार कर दिया। राज बहादुर का कहना था कि परिवार को बिना बताए कोरोना जांच कर दी गई। इसकी रिपोर्ट भी उन्हें नहीं दी गई थी। अब अंतिम संस्कार का दबाव बनाने लगे। परिवार रात होने की वजह से बृहस्पतिवार को अंतिम संस्कार कराना चाहता था। मगर जब बातचीत हुई तो परिवार के सभी सदस्य मान भी गए थे। शव का एक बार चेहरा दिखाने को कहा तो इनकार कर दिया। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से मारपीट शुरू कर दी। इस पर ग्रामीण भी आ गए थे। फिर एंबुलेंसकर्मी शव लेकर जाने लगे। उन्हें रोकने का प्रयास किया, मगर कोई नहीं माना। एंबुलेंस कर्मी शव लेकर लौट गए। इसके बाद ग्रामीणों ने आमडार और नगरा गांव के बीच जाम लगा दिया।
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उधर, सूचना पर सीओ प्रशांत कुमार, बरखेड़ा इंस्पेक्टर वीरेश कुमार, कोतवाल बीसलपुर कमल सिंह के साथ पहुंचे। परिवार को आश्वस्त कर आधे घंटे बाद जाम खुलवा दिया। अफसर परिवार के लोगों से बातचीत में जुटे रहे। फिलहाल शव पोस्टमार्टम हाउस पर मोर्चरी में रखवा दिया गया है।
भीड़ हो गई थी उग्र, इसलिए लौट आए : एंबुलेंस चालक
ग्रामीणों की भीड़ पर एंबुलेंस में तोड़फोड़ करने का आरोप भी लगाया गया है। एंबुलेंस चालक महेंद्र ने बताया कि शव लेकर वह गांव पहुंचे थे। जिम्मेदार अधिकारी परिवार से अंतिम संस्कार को लेकर बातचीत कर रहे थे। फिर किस बात पर विवाद तेज हो गया और भीड़ उग्र हो गई थी। एंबुलेंस में तोड़फोड़ की कोशिश की। इसीलिए शव लेकर लौट आए। अधिकारियों के निर्देश पर शव को पोस्टमार्टम हाउस पर रखवा दिया है।
अंतिम संस्कार के समय को लेकर विवाद की स्थिति बनी। भीड़ के होने पर एंबुलेंस को मौके से हटा दिया था। चूंकि मामला कोरोना संक्रमित से भी जुड़ा था, इसलिए शव सुरक्षित मोर्चरी में रखवा दिया है। भीड़ ने जाम लगा दिया। परिवार के लोगों से बातचीत कर रहे हैं। कोविड प्रोटोकॉल तहत ही अंतिम संस्कार होना है।
- प्रशांत कुमार, सीओ बीसलपुर
निजी अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग की कोरोना जांच की गई थी। जांच के कुछ देर बाद ही मौत हो गई। अस्पताल से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कोविड नियमों का पालन करते हुए अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था की गई थी। भीड़ भड़कने के कारण अभी अंतिम संस्कार नहीं हो सका।
- डॉ. सीएम चतुर्वेदी, प्रभारी सीएमओ