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चार करोड़ की लागत है साहब.. कुछ दिन तो सलामत रहे सड़क
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पीलीभीत। सड़कों की बदहाल स्थिति सुधारने के लिए भले ही शासन करोड़ों रुपये खर्च कर रहा हो, लेकिन कार्यदायी संस्था की मनमानी के चलते स्थिति सुधर नहीं ही है। यही वजह है कि साढ़े चार करोड़ की लागत से मंजूर हुए शारदा सागर डैम की मुख्य बॉडी का मार्ग बनाने के नाम पर भी बड़ा खेल किया जा रहा है। मानकों को ताख पर रखकर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। खास बात यह है कि कोई भी अभियंता इसे देखने तक नहीं पहुंच रहा है। जबकि बुलंदशहर के एक ठेकेदार का पेटी ठेकेदार यहां निर्माण में जमकर धांधली कर रहा है।
शारदा सागर डैम के बॉडी का मुख्य मार्ग वर्षों से गड्ढों में तब्दील हो गया था। इस कारण इधर निकलना मुश्किल था। इसके निर्माण के लिए पूर्व में सिंचाई विभाग की ओर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सिंचाई कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंप दिया गया। शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। तत्कालीन सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने यह प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को दे दिया था। निर्माण का ठेका बुलंदशहर के एक ठेकेदार को दिया गया था। ठेकेदार ने कार्य पीलीभीत के एक पेटी ठेकेदार को दे दिया। तीन माह पूर्व मार्ग पर पेंटिंग का कार्य शुरू हुआ तो उसमें ही घपला शुरू हो गया। इस मार्ग के गड्ढों पर खुला पत्थर डाल दिया गया तो कहीं ईंटों की रोड़ी डालकर पेंटिंग कर दी गई। इसमें भी एक ही लेयर डाली जा रहा है। जबकि मानक के अनुसार मार्ग निर्माण के अलावा मार्ग की बायीं पटरी पर खड़ंजा और डैम के भीतरी हिस्से और जहां जर्जर पैराफिट दीवार है उसकी भी मरम्मत शामिल है। इधर, मरम्मत का कार्य वैसे तो उत्तर प्रदेश सिंचाई कॉरपोरेशन लिमिटेड के जिम्मे है, लेकिन देखरेख की जिम्मेदारी शारदा सागर के अभियंताओं की भी है, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहा है।
इस मामले में यूपीपीसीएल के सहायक अभियंता आरके सिंह से दूरभाष पर बात कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।
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शारदा सागर डैम के बॉडी का मुख्य मार्ग वर्षों से गड्ढों में तब्दील हो गया था। इस कारण इधर निकलना मुश्किल था। इसके निर्माण के लिए पूर्व में सिंचाई विभाग की ओर से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सिंचाई कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंप दिया गया। शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। तत्कालीन सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने यह प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को दे दिया था। निर्माण का ठेका बुलंदशहर के एक ठेकेदार को दिया गया था। ठेकेदार ने कार्य पीलीभीत के एक पेटी ठेकेदार को दे दिया। तीन माह पूर्व मार्ग पर पेंटिंग का कार्य शुरू हुआ तो उसमें ही घपला शुरू हो गया। इस मार्ग के गड्ढों पर खुला पत्थर डाल दिया गया तो कहीं ईंटों की रोड़ी डालकर पेंटिंग कर दी गई। इसमें भी एक ही लेयर डाली जा रहा है। जबकि मानक के अनुसार मार्ग निर्माण के अलावा मार्ग की बायीं पटरी पर खड़ंजा और डैम के भीतरी हिस्से और जहां जर्जर पैराफिट दीवार है उसकी भी मरम्मत शामिल है। इधर, मरम्मत का कार्य वैसे तो उत्तर प्रदेश सिंचाई कॉरपोरेशन लिमिटेड के जिम्मे है, लेकिन देखरेख की जिम्मेदारी शारदा सागर के अभियंताओं की भी है, लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहा है।
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इस मामले में यूपीपीसीएल के सहायक अभियंता आरके सिंह से दूरभाष पर बात कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी।