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महिलाएं उत्पीडन का मुकाबला करने के लिए बनें अपराजिता
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पीलीभीत। महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। सनातन धर्म में नारी को देवी का स्वरूप माना गया है। साहित्य में नारी को बुद्धि और पुरुषों को बल की संज्ञा दी गई है। महिलाएं शक्ति का अहसास करें और उत्पीड़न का मुकाबला करने के लिए अपराजिता बनें। यह बात लक्ष्य डिग्री कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रंजना सिंह ने अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत हुई निबंध प्रतियोगिता के समापन पर कही।
लक्ष्य डिग्री कॉलेज में बृहस्पतिवार को महिला सशक्तीकरण विषय पर आधारित निबंध प्रतियोगिता हुई। इससे पहले छात्राओं को महिला सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता की शपथ दिलाई गई और संकल्प पत्र भरवाए गए। निर्णायक मंडल में अवनीश शुक्ला, अंकित गुप्ता, विश्वनाथ मिश्रा ने छात्राओं के लिखे निबंधों का अवलोकन कर परिणाम की घोषणा की। इसमें बीए तृतीय वर्ष की छात्रा महिमा चौधरी प्रथम, बीए प्रथम वर्ष की सोनल सक्सेना द्वितीय और किरन वर्मा ने तीसरे स्थान पर रहीं। अंत में हुई गोष्ठी में प्राचार्या डॉ. रंजना सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर विचार व्यक्त किए। कहा कि छात्राओं को अमर उजाला के इस अभियान से सीख लेकर खुद को सशक्त बनाना चाहिए। इस मौके पर कॉलेज अध्यक्ष रवि गुप्ता, हिंदी विभागाध्यक्ष अवनीश शुक्ला, उमेश कुमार, डॉ. वंदना शर्मा, ज्योति श्रीवास्तव, अमरीना खान, स्वाती मिश्रा मौजूद रहे।
पुरुषों के बराबर का दर्जा मिलने के बाद महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित है। अधिकारों को जानने और पाने के लिए पीछे रहने की जरूरत नहीं है। शिक्षा के बगैर महिलाएं सशक्त नहीं बन सकती। खुद को शिक्षित होने के साथ महिला वर्ग को शिक्षित करने की जरूरत है, यही सीख अमर उजाला ने दी है। - गरिमा वर्मा
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कहते हैं कि समाज में महिलाओं को पूजा जाता है, लेकिन अब भी समाज में महिलाओं को कुछ मौकों पर अपमान झेलना पड़ता है। इस कार्यक्रम से हमें अपने हक, अधिकार का ज्ञान मिलने के साथ ही हिम्मत दी गई है। - महिमा चौधरी।
नारी ने खेल, शिक्षा, राजनीति, समाजसेवा आदि क्षेत्र में नाम रोशन किए हैं। नारी के बगैर पुरुष अधूरा है। रिश्ते नाते नारी से ही बनते है। हर पुरुष को जन्म देने वाली एक नारी ही है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अमर उजाला का ये कार्यक्रम सराहनीय है। - गायत्री सरोज
यह सच है कि आधुनिकता में शिक्षा के साथ नारी के सम्मान में भी बढ़ोतरी हुई है। महिलाएं खुद के अंदर छिपी प्रतिभाओं को पहचान कर सशक्त बनें, यह आज हमको सिखाया गया है। इससे समाज को एक नई दिशा मिलेगी- अनम आफरीन
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लक्ष्य डिग्री कॉलेज में बृहस्पतिवार को महिला सशक्तीकरण विषय पर आधारित निबंध प्रतियोगिता हुई। इससे पहले छात्राओं को महिला सशक्तीकरण के प्रति जागरूकता की शपथ दिलाई गई और संकल्प पत्र भरवाए गए। निर्णायक मंडल में अवनीश शुक्ला, अंकित गुप्ता, विश्वनाथ मिश्रा ने छात्राओं के लिखे निबंधों का अवलोकन कर परिणाम की घोषणा की। इसमें बीए तृतीय वर्ष की छात्रा महिमा चौधरी प्रथम, बीए प्रथम वर्ष की सोनल सक्सेना द्वितीय और किरन वर्मा ने तीसरे स्थान पर रहीं। अंत में हुई गोष्ठी में प्राचार्या डॉ. रंजना सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर विचार व्यक्त किए। कहा कि छात्राओं को अमर उजाला के इस अभियान से सीख लेकर खुद को सशक्त बनाना चाहिए। इस मौके पर कॉलेज अध्यक्ष रवि गुप्ता, हिंदी विभागाध्यक्ष अवनीश शुक्ला, उमेश कुमार, डॉ. वंदना शर्मा, ज्योति श्रीवास्तव, अमरीना खान, स्वाती मिश्रा मौजूद रहे।
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पुरुषों के बराबर का दर्जा मिलने के बाद महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित है। अधिकारों को जानने और पाने के लिए पीछे रहने की जरूरत नहीं है। शिक्षा के बगैर महिलाएं सशक्त नहीं बन सकती। खुद को शिक्षित होने के साथ महिला वर्ग को शिक्षित करने की जरूरत है, यही सीख अमर उजाला ने दी है। - गरिमा वर्मा
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कहते हैं कि समाज में महिलाओं को पूजा जाता है, लेकिन अब भी समाज में महिलाओं को कुछ मौकों पर अपमान झेलना पड़ता है। इस कार्यक्रम से हमें अपने हक, अधिकार का ज्ञान मिलने के साथ ही हिम्मत दी गई है। - महिमा चौधरी।
नारी ने खेल, शिक्षा, राजनीति, समाजसेवा आदि क्षेत्र में नाम रोशन किए हैं। नारी के बगैर पुरुष अधूरा है। रिश्ते नाते नारी से ही बनते है। हर पुरुष को जन्म देने वाली एक नारी ही है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अमर उजाला का ये कार्यक्रम सराहनीय है। - गायत्री सरोज
यह सच है कि आधुनिकता में शिक्षा के साथ नारी के सम्मान में भी बढ़ोतरी हुई है। महिलाएं खुद के अंदर छिपी प्रतिभाओं को पहचान कर सशक्त बनें, यह आज हमको सिखाया गया है। इससे समाज को एक नई दिशा मिलेगी- अनम आफरीन