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शासन को भी शक...धान खरीद में बिचौलिए कर गए खेल
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पीलीभीत। धान खरीद में हुई धांधलेबाजी की परतें खुलने लगी हैं। शासन के संज्ञान में आया है कि सहकारिता विभाग की एजेंसियों द्वारा की गई धान खरीद में बिचौलियों ने करोड़ों रुपये का धान इन सेंटरों में खपा दिया। इस गोरखधंधे की शिकायतें मिलने पर सहकारिता विभाग के आयुक्त ने जिला सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक को धान खरीद की जांच करने के आदेश दिए हैं।
जिले में एक अक्तूबर से आठ क्रय एजेंसियों के 147 धान सेंटरों के माध्यम से खरीद शुरू की गई थी। शासन द्वारा धान खरीद का लक्ष्य 3.08 लाख मीट्रिक टन दिया गया। हालांकि शुरुआती दौर में धान खरीद की गति बेहद धीमी रही, लेकिन एक माह बाद इन सरकारी सेंटरों पर धान खरीद का ग्राफ इतना तेजी से बढ़ा कि शासन द्वारा दिए गए लक्ष्य निर्धारित समय सीमा से एक माह पहले ही पूरा लिया गया। बंटाईदार के नाम पर कई खाद्यान्न माफिया ने अपना सस्ते में खरीदा गया धान सरकारी सेंटरों पर बेच दिया। विभाग के मुताबिक 3.08 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 3.67 लाख मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है। सेंटरों पर 39998 किसानों से 674 करोड 80 लाख रुपये की धान खरीद की गई। इधर शासन के संज्ञान में आया है कि सहकारिता विभाग की एजेंसियों द्वारा की गई धान खरीद में बिचौलियों की खासी भूमिका रही। उन्होंने किसानों से सस्ते दामों में खरीदा गया धान सरकारी दरों पर धान सेंटरों पर खपा दिया। बताते हैं कि सेंटरों पर धान बेचने कोई और किसान गया और धनराशि किसी और के खाते में डाली गई। ऐसे में बिचौलियों ने धान बिक्री में करोड़ों का खेल कर लिया। शिकायत मिलने के बाद सहकारिता विभाग ने पूरे प्रदेश में की गई धान खरीद की जांच के आदेश दिए हैं। आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता एसवीएस रंगाराव ने जिला सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक को धान खरीद की जांच करने के आदेश दिए हैं। जारी आदेश में कहा गया कि जहां भी ऐसे मामले पकड़ में आए तो तत्काल गबन और अनियमितता के आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया जाए। जांच रिपोर्ट 22 जनवरी तक देने के निर्देश दिए हैं।
सहकारिता के 90 सेंटरों पर हुई खरीद
डिप्टी आरएमओ डॉ. अनिवाश कुमार झा के मुताबिक सहकारिता विभाग की पीसीएफ एजेंसी के 28 धान सेंटरों पर 43540 टन धान खरीद की गई। इसके अलावा पीसीयू के 32 सेंटरों पर 71032 टन और यूपीएसएस के 30 धान सेंटरों पर 65876 टन धान खरीद हुई है। इस तरह कुल 90 सेंटरों पर खरीद हुई।
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इस संबंध में शासनादेश प्राप्त हो चुका है। प्रदेश के सभी जिलों में सहकारिता से जुड़े धान खरीद का सत्यापन करने केे निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर कार्य शुरू कर दिया गया है। -वीर विक्रम सिंह, जिला सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक
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जिले में एक अक्तूबर से आठ क्रय एजेंसियों के 147 धान सेंटरों के माध्यम से खरीद शुरू की गई थी। शासन द्वारा धान खरीद का लक्ष्य 3.08 लाख मीट्रिक टन दिया गया। हालांकि शुरुआती दौर में धान खरीद की गति बेहद धीमी रही, लेकिन एक माह बाद इन सरकारी सेंटरों पर धान खरीद का ग्राफ इतना तेजी से बढ़ा कि शासन द्वारा दिए गए लक्ष्य निर्धारित समय सीमा से एक माह पहले ही पूरा लिया गया। बंटाईदार के नाम पर कई खाद्यान्न माफिया ने अपना सस्ते में खरीदा गया धान सरकारी सेंटरों पर बेच दिया। विभाग के मुताबिक 3.08 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 3.67 लाख मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है। सेंटरों पर 39998 किसानों से 674 करोड 80 लाख रुपये की धान खरीद की गई। इधर शासन के संज्ञान में आया है कि सहकारिता विभाग की एजेंसियों द्वारा की गई धान खरीद में बिचौलियों की खासी भूमिका रही। उन्होंने किसानों से सस्ते दामों में खरीदा गया धान सरकारी दरों पर धान सेंटरों पर खपा दिया। बताते हैं कि सेंटरों पर धान बेचने कोई और किसान गया और धनराशि किसी और के खाते में डाली गई। ऐसे में बिचौलियों ने धान बिक्री में करोड़ों का खेल कर लिया। शिकायत मिलने के बाद सहकारिता विभाग ने पूरे प्रदेश में की गई धान खरीद की जांच के आदेश दिए हैं। आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता एसवीएस रंगाराव ने जिला सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक को धान खरीद की जांच करने के आदेश दिए हैं। जारी आदेश में कहा गया कि जहां भी ऐसे मामले पकड़ में आए तो तत्काल गबन और अनियमितता के आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया जाए। जांच रिपोर्ट 22 जनवरी तक देने के निर्देश दिए हैं।
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सहकारिता के 90 सेंटरों पर हुई खरीद
डिप्टी आरएमओ डॉ. अनिवाश कुमार झा के मुताबिक सहकारिता विभाग की पीसीएफ एजेंसी के 28 धान सेंटरों पर 43540 टन धान खरीद की गई। इसके अलावा पीसीयू के 32 सेंटरों पर 71032 टन और यूपीएसएस के 30 धान सेंटरों पर 65876 टन धान खरीद हुई है। इस तरह कुल 90 सेंटरों पर खरीद हुई।
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इस संबंध में शासनादेश प्राप्त हो चुका है। प्रदेश के सभी जिलों में सहकारिता से जुड़े धान खरीद का सत्यापन करने केे निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर कार्य शुरू कर दिया गया है। -वीर विक्रम सिंह, जिला सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक