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समूह बनाकर केंचुआ खाद तैयार करके बदल दी गांव में खेती की तस्वीर

Mon, 02 May 2022 01:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 02 May 2022 01:54 AM IST
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Changed the picture of farming in the village by forming a group and preparing earthworm manure
विमला देवी - फोटो : PILIBHIT
बिलसंडा। अधिक उत्पादन के लालच में किसान अंधाधुंध रसायनिक खादों और कीटनाशकों को उपयोग करते हैं। इससे जमीन भी बंजर होती जा रही है। बिलसंडा के बेहटी गांव की विमला देवी ने खेती के इस ढर्रे को बदलने की पहल शुरू की है। वह गांव की महिलाओं के साथ मिलकर केंचुआ खाद तैयार कर रही हैं। साथ ही किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक भी कर रही हैं। क्षेत्र में इसका असर भी दिखा और तमाम किसान इस जैविक खाद का प्रयोग करने लगे हैं। खासतौर से सब्जी की खेती करने वालों को इसका ज्यादा फायदा मिल रहा है।
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बिलसंडा क्षेत्र का बेहटी एक छोटा सा गांव है। यहां अधिकतर लोग खेती करते हैं। अधिक उत्पादन के लालच में किसान ज्यादा खाद और कीटनाशकों का उपयोग करते हैं। गांव की विमला देवी ने इसमें बदलाव लाने की ठानी। पिछले साल जून में गांव की कुछ महिलाओं को साथ में जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया और केंचुआ खाद बनाना शुरू किया। ब्लॉक स्तर पर हुए कई प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंचुुआ खाद बनाने की विधि सीखी। अब गांव में ही वह अपने समूह के साथ केंचुआ खाद तैयार करती हैं। इससे महिलाओं की आमदनी भी बढ़ी है।
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केसे तैयार करते हैं केंचुुआ खाद
विमाला देवी समूह की अध्यक्ष हैं। पहले उन्होंने केंचुआ खाद बनाना सीखा फिर बाकी महिलाओं को उसकी जानकारी दी। विमला देवी बताती हैं कि जैविक खाद तैयार करने के लिए वह गोबर के साथ केंचुआ को मिलाकर करीब ढाई से तीन माह तक छोड़ देते हैं। तीन माह के बाद गोबर से बने खाद को छाना जाता है। एक टन गोबर में छह क्विंटल जैविक खाद बनकर तैयार हो जाती है। रासायनिक खाद में सीमित उर्वरक तत्व होते हैं जबकि जैविक खाद में कई उर्वरक तत्व एक साथ मिलते हैं। जैविक खाद में प्रमुख रूप से कार्बन, पोटैशियम, नाइट्रोजन, फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, आयरन, कॉपर, जिंक एवं माइक्रोन्युट्रीएंट्स आदि पाए जाते हैं।
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पैकिंग करके करती हैं बिक्री
समूह की महिलाएं तैयार खाद के छोटे-छोटे पैकेट तैयार करती हैं। एक किलो पैकेट की कीमत दस रुपये है। बड़े पैकेट भी तैयार किए जाते हैं। अच्छी बात है कि क्षेत्र में जो लोग सब्जी उगाते हैं वह धीरे-धीरे इसका उपयोग बढ़ाने लगे हैं। उनको इस खाद से फायदा मिल रहा है। फसल में बीमारी कम लगती है। अच्छी पैदावार होती है। विमला देवी बताती हैं कि जून में काम शुरू किया था। पहले कम बिक्री होती थी। अब एडवांस में बिक्री हो जाती है। समूह की महिलाओं की अच्छी कमाई भी हो रही है। वह बताती है कि अभी शुरुआत है, आने वाले दिनों में वह उत्पादन क्षमता बढ़ाएंगी।

केंचुुआ खाद में गोबर खाद से ज्यादा होते हैं पोषक तत्व
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका के अनुसार केंचुआ खाद में गोबर खाद की तुलना में तीन गुना ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। उन्होंने बताया कि गोबर की खाद में नाइट्रोजन की मात्रा 0.5 फीसदी होती है जबकि केंचुआ खाद में इसकी मात्रा 1.5 फीसदी होती है। फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा गोबर की खाद में 0.1 से 0.2 फीसदी तक होती है जबकि केंचुआ खाद में 0.3 से 0.4 फीसदी तक होता है। उन्होंने बताया कि केंचुआ खाद खेत में डालने से भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है। ये खाद पूरी तरह से जैविक है और भूमि उपचार में भी काम करती है।

जैविक खाद बनाती महिलाएं। संवाद

जैविक खाद बनाती महिलाएं। संवाद- फोटो : PILIBHIT

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