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शिविरों से मिलता है रचनात्मक कार्य करने का मौका : सुशील
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बीसलपूर के गांव महोबा में एनएसएस शिविर में रंगोली बनाती छात्राएं । स्रोत - प्राचार्य
तीन गांवों में राष्ट्रीय सेवायोजना शिविर शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बीसलपुर। राजकीय महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवायोजना के सात दिवसीय वार्षिक शिविर शुक्रवार से कितनापुर, महावा और चौसरा में शुरू हो गए। शुक्रवार को पहले दिन उद्घाटन समारोह और पूरे सप्ताह के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील सोनी ने बारी-बारी से तीनों गांवों के शिविरों का मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप जलाकर उद्घाटन किया। शिविर स्थलों पर छात्रों ने सफाई अभियान चलाया। मिट्टी डालकर शिविर स्थलों के ऊबड़-खाबड़ हिस्सों को समतल किया।
प्राचार्य ने कहा कि राष्ट्रीय सेवायोजना के शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को रचनात्मक कार्य करने का मौका मिलता है। कितनापुर, चौसरा और महावा के शिविरों का संचालन कार्यक्रम अधिकारियों क्रमश: डॉ. चंद्र प्रभा गंगवार, डॉ रोहित पटेल और डॉ. महेंद्र पाल ने किया।
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महावा और कितनापुर के शिविरों में छात्राओं ने रंगोली भी बनाई। प्राचार्य ने बताया कि तीनों शिविरों के शिविरार्थी रोजाना सुबह से दोपहर तक गांवों में रचनात्मक कार्य करेंगे। दोपहर बाद शिविर स्थलों पर गोष्ठियों का आयोजन होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बीसलपुर। राजकीय महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवायोजना के सात दिवसीय वार्षिक शिविर शुक्रवार से कितनापुर, महावा और चौसरा में शुरू हो गए। शुक्रवार को पहले दिन उद्घाटन समारोह और पूरे सप्ताह के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील सोनी ने बारी-बारी से तीनों गांवों के शिविरों का मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप जलाकर उद्घाटन किया। शिविर स्थलों पर छात्रों ने सफाई अभियान चलाया। मिट्टी डालकर शिविर स्थलों के ऊबड़-खाबड़ हिस्सों को समतल किया।
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प्राचार्य ने कहा कि राष्ट्रीय सेवायोजना के शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को रचनात्मक कार्य करने का मौका मिलता है। कितनापुर, चौसरा और महावा के शिविरों का संचालन कार्यक्रम अधिकारियों क्रमश: डॉ. चंद्र प्रभा गंगवार, डॉ रोहित पटेल और डॉ. महेंद्र पाल ने किया।
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महावा और कितनापुर के शिविरों में छात्राओं ने रंगोली भी बनाई। प्राचार्य ने बताया कि तीनों शिविरों के शिविरार्थी रोजाना सुबह से दोपहर तक गांवों में रचनात्मक कार्य करेंगे। दोपहर बाद शिविर स्थलों पर गोष्ठियों का आयोजन होगा।