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बल्क ड्रग डिवाइस पार्क ललितपुर जाने पर राजनीति शुरू, विधायक बोले- मुख्यमंत्री से मिलूंगा

Wed, 19 Aug 2020 01:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2020 01:40 AM IST
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Bulk drug medical device park shifting case
पीलीभीत। कुछ समय पहले पीलीभीत के भरा-पचपेड़ा में 2000 एकड़ जमीन पर बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क बनने की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद यह बड़ा प्रोजेक्ट ललितपुर ले जाने के फैसले से बेरोजगार और मेडिकल कारोबारियों को तगड़ा झटका लगा है। इस फैसले के पीछे तर्क दिया गया है कि उत्तराखंड की सीमा से लगे इस क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क में लगने वाली इकाइयां अधिक मात्रा में प्रदूषण फैलाएंगी, जो प्रदूषण मुक्त जोन के लिए घातक है। अब तो दो अन्य प्रोजेक्ट फार्मा पार्क और औद्योगिक हब को लेकर ही बेरोजगार आस लगाए हैं।
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बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क को लेकर आस लगाए बैठे लोगों ने जहां जनप्रतिनिधियों की पैरवी को लचर बताया, वहीं इस पार्क के लिए जुटे शहर विधायक ने कहा कि वह इस मामले में जल्द मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों से मिलेंगे, किसी हाल में इस प्रोजेक्ट को ललितपुर नहीं जाने दिया जाएगा। बता दें कि बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क बनाने की संभावनाएं तलाशने के लिए 16 जून को लखनऊ से कार्यदायी संस्था यूपिको की टीम भी सर्वे कर गई थी। मगर, अब यह पार्क ललितपुर ले जाने की कवायद का पता चला है। इसके पीछे जमीन के विवादित होने और प्रदूषण मुक्त जोन में केमिकलयुक्त प्रदूषण बढ़ने के खतरे की बात कही जा रही है। चिकित्सा सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर मेडिकल डिवाइस पार्क पीलीभीत में बनता तो यहां प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दो लाख लोगों को रोजगार मिल सकता था। उत्तर प्रदेश में एक बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क और चार फार्मा पार्क के निर्माण प्रस्तावित हैं। दो माह पूर्व सदर विधायक संजय सिंह गंगवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अमरिया क्षेत्र के भरा पचपेड़ा गांव में जमीन की उपलब्धता बताते हुए यहां बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क, औद्योगिक हब और फार्मा पार्क बनाने का आग्रह किया था। इसके बाद प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने जिला प्रशासन को 2000 एकड़ जमीन की व्यवस्था कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। प्रशासनिक अफसरों ने छह जून को भरा पचपेड़ा पहुंचकर जमीन का निरीक्षण किया था और पूरे रकवे का ले आउट उपलब्ध कराने को कहा था। तब स्थानीय अधिकारियों ने यह भी कहा था कि यदि जमीन की और आवश्यकता होगी है तो कटैइया पंडरी गांव से दिलाई जाएगी।
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16 जून को लखनऊ से सर्वे को आई थी टीम
उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कंसल्टेंटस कंपनी के एमडी प्रवीन सिंह ने भी 16 जून को भरा पचपेड़ा पहुंचकर अपनी टीम के साथ जमीन का सर्वे किया था। उन्होंने भी सर्वे के दौरान सारे नियम पूरे होने की बात कही थी। तब यह माना जा रहा था कि पार्क के लिए पीलीभीत की दावेदारी सबसे मजबूत होगी, मगर मंगलवार को बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क बनने की उम्मीद उस समय धरी की धरी रह गई, जब सरकार ने उसे पीलीभीत के बजाय ललितपुर ले जाने के प्रस्ताव पर विचार करना शुरू कर दिया। राज्य सरकार अब पीलीभीत में प्रस्तावित बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क ललितपुर में स्थापित करने पर मंथन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक भरापचपेड़ा की जमीन विवादित होने और प्रदूषण मुक्त जोन में केमिकल प्रदूषण बढ़ने की आशंका के चलते ही ऐसा निर्णय लिया गया है। बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क पीलीभीत से ललितपुर स्थानांतरित होने से विकास की उम्मीद लगाए बैठे यहां के बेरोजगारों और मेडिकल कारोबारियों को गहरा झटका लगा है। सरकार के इस कदम से वे निराश हैं।
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भरा पचपेड़ा में अगर बल्क ड्रग इंडस्ट्री लगतीं तो इससे जनपद के बेरोजगारों को बड़ी संख्या में रोजगार मिल सकता था। ललितपुर ट्रांसफर होने से बेरोजगार निराश हैं। पता नहीं, यहां के जनप्रतिनिधि क्या कर रहे हैं। -राजेश कुमार वर्मा, मेडिकल स्टोर संचालक
जनपद में अब तक कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं है। भरा पचपेड़ा में यदि बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क स्थापित होता तो जाहिर सी बात है कि यहां का अभूतपूर्व विकास होता। बेरोजगारी दूर होती। -विमल कुमार गोयल, व्यापारी
आजादी के बाद अब तक यहां के बेरोजगार युवा बड़े शहरों में जाकर रोजगार तलाशते हैं। यदि यह इंडस्ट्री लग जाती तो बेरोजगार युवाओं को बड़ी राहत मिलती। यहीं रोजगार मिल जाता। अब निराशा हुई है। -विनय कुमार, बेरोजगार
भरा पचपेड़ा में काफी जमीन खाली पड़ी है। यहां पर इस इंडस्ट्री को स्थापित किया जा सकता था, मगर जनप्रतिनिधियों की लचर पैरवी के चलते यह मौका हमारे हाथ से निकल गया। - सुनील कुमार अरोड़ा, कारोबारी
बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क हाइली केमिकलयुक्त प्रोजेक्ट है। इसे प्रदूषण मुक्त जोन में नहीं लगाया जा सकता। इसीलिए ललितपुर ले जाने पर विचार चल रहा है। मगर, अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को मंजूर करना है। - प्रवीण कुमार, एमडी, यूपिको

बल्क ड्रग मेडिकल डिवाइस पार्क को हम ललितपुर नहीं जाने देंगे। मैं लखनऊ जाकर फिर मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों से मिलूंगा। केमिकल प्रदूषण को रोकने के लिए संयंत्र लगाए जा सकते हैं। मेरा सबसे ज्यादा जोर फार्मा पार्क और औद्योगिक हब बनाने पर था। हम तीनों प्रोजेक्ट यहीं लगवाएंगे। - संजय सिंह गंगवार, विधायक शहर
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