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बड़े पैमाने पर हुए अनुबंधों जांच शुरू
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Aug 2016 11:24 PM IST
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सिंचाई विभाग के हेड वर्क्स खंड में बड़े पैमाने पर किए गए अनुबंधों की जांच शासन स्तर से शुरू की गई है। इस मामले में शासन द्वारा गठित कमेटी के दो बड़े अफसरों ने बेहद गोपनीय ढंग से यहां पहुंचकर मामले की जांच की।
बताते हैं कि अभियंता टीम को अनुबंधों की फाइल ही दिखा सके। सिंचाई विभाग में अपने चहेते ठेकेदारों पर अफसर कब मेहरबान हो जाएं कुछ पता नहीं और कब फर्जी भुगतान करने को नये-नये फंडे अपना लें, यह भी सोच से परे है। ऐसा ही एक बड़ा मामला हेड वर्क्स खंड शारदा नहर के अधीन आने वाली नहरों पर भी हुआ है। इस खंड के पास वाइफरकेशन की नहरों के साथ शारदा मुख्य नहर, बाइपास चैनल, बनबसा बैराज आता है। पिछले दिनों बाइपास चैनल से चार हजार क्यूसेक पानी शारदा मुख्य नहर में देने को 25 करोड़ रुपया स्वीकृत हुआ था। वैसे तो सिंचाई विभाग इतनी बड़ी धनराशि के प्रोजेक्ट पर डबल ए या ए श्रेणी के पंजीकृत ठेकेदारों को टेंडर आमंत्रित करता है, लेकिन यहां इस प्रोजेक्ट पर दो-दो लाख रुपये की लागत के 1200 से अधिक अनुबंध कर दिए गए। हालांकि, तबसे अब तक शारदा मुख्य नहर व हरदोई ब्रांच पर जो करोड़ों रुपया स्वीकृत हुआ, उसमें डबल ए या ए श्रेणी के ठेकेदारों से कार्य कराया गया। बाइफरकेशन से जुड़े ठेकेदारों ने जो सी व डी श्रेणी के पंजीकृत ठेकेदार थे, उन्होंने इस बात को लेकर प्रदर्शन कर नाराजगी जताई थी।
इधर, शासन ने प्रदेश भर में सिंचाई खंडों में किए गए अनुबंधों का सर्वे कराया तो पता चला कि हेड वर्क्स खंड में सर्वाधिक अनुबंध हुए हैं। इसको लेकर शासन ने क्लास वन के दो अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच के निर्देश दिए थे। पिछले सप्ताह लखनऊ से आई टीम ने बेहद गोपनीय ढंग से जांच की। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी यह मामला काफी दबाए रखा। बनबसा गेस्टहाउस में ठहरी टीम ने अधिशासी अभियंता से अनुबंधों की फाइलें तलब की। बताते हैं कि अभियंता उनको संबंधित फाइलें नहीं दिखा सके और लखनऊ आकर फाइल दिखाने की बात कही। इसके बाद टीम वापस लौट गई।
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महज चार हजार क्यूसेक पानी देने को 25 करोड़
इधर, बाईपास चैनल का मामला काफी सुर्खियों में है, क्योंकि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने 25 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मात्र चार हजार क्यूसेक पानी देने के लिए खुदाई का बनाया था। इधर, सिंचाई विभाग के जिम्मेदार सूत्र बताते हैं कि अनुबंधों में कई बड़ी खामियां हैं। चूंकि अवर अभियंताओं से कार्य कराने का मेजरमेंट कराया गया, इसलिए अब छुट भइये अभियंताओं में इसको लेकर हड़कंप मचा है। इधर हेड वर्क्स खंड के अधिकारियों से इस मामले में जानने का प्रयास किया गया तो कोई भी अधिकारी इस मामले में मुंह खोलने को तैयार दिखा।
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बताते हैं कि अभियंता टीम को अनुबंधों की फाइल ही दिखा सके। सिंचाई विभाग में अपने चहेते ठेकेदारों पर अफसर कब मेहरबान हो जाएं कुछ पता नहीं और कब फर्जी भुगतान करने को नये-नये फंडे अपना लें, यह भी सोच से परे है। ऐसा ही एक बड़ा मामला हेड वर्क्स खंड शारदा नहर के अधीन आने वाली नहरों पर भी हुआ है। इस खंड के पास वाइफरकेशन की नहरों के साथ शारदा मुख्य नहर, बाइपास चैनल, बनबसा बैराज आता है। पिछले दिनों बाइपास चैनल से चार हजार क्यूसेक पानी शारदा मुख्य नहर में देने को 25 करोड़ रुपया स्वीकृत हुआ था। वैसे तो सिंचाई विभाग इतनी बड़ी धनराशि के प्रोजेक्ट पर डबल ए या ए श्रेणी के पंजीकृत ठेकेदारों को टेंडर आमंत्रित करता है, लेकिन यहां इस प्रोजेक्ट पर दो-दो लाख रुपये की लागत के 1200 से अधिक अनुबंध कर दिए गए। हालांकि, तबसे अब तक शारदा मुख्य नहर व हरदोई ब्रांच पर जो करोड़ों रुपया स्वीकृत हुआ, उसमें डबल ए या ए श्रेणी के ठेकेदारों से कार्य कराया गया। बाइफरकेशन से जुड़े ठेकेदारों ने जो सी व डी श्रेणी के पंजीकृत ठेकेदार थे, उन्होंने इस बात को लेकर प्रदर्शन कर नाराजगी जताई थी।
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इधर, शासन ने प्रदेश भर में सिंचाई खंडों में किए गए अनुबंधों का सर्वे कराया तो पता चला कि हेड वर्क्स खंड में सर्वाधिक अनुबंध हुए हैं। इसको लेकर शासन ने क्लास वन के दो अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच के निर्देश दिए थे। पिछले सप्ताह लखनऊ से आई टीम ने बेहद गोपनीय ढंग से जांच की। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने भी यह मामला काफी दबाए रखा। बनबसा गेस्टहाउस में ठहरी टीम ने अधिशासी अभियंता से अनुबंधों की फाइलें तलब की। बताते हैं कि अभियंता उनको संबंधित फाइलें नहीं दिखा सके और लखनऊ आकर फाइल दिखाने की बात कही। इसके बाद टीम वापस लौट गई।
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महज चार हजार क्यूसेक पानी देने को 25 करोड़
इधर, बाईपास चैनल का मामला काफी सुर्खियों में है, क्योंकि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने 25 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मात्र चार हजार क्यूसेक पानी देने के लिए खुदाई का बनाया था। इधर, सिंचाई विभाग के जिम्मेदार सूत्र बताते हैं कि अनुबंधों में कई बड़ी खामियां हैं। चूंकि अवर अभियंताओं से कार्य कराने का मेजरमेंट कराया गया, इसलिए अब छुट भइये अभियंताओं में इसको लेकर हड़कंप मचा है। इधर हेड वर्क्स खंड के अधिकारियों से इस मामले में जानने का प्रयास किया गया तो कोई भी अधिकारी इस मामले में मुंह खोलने को तैयार दिखा।