{"_id":"5a7320244f1c1b8e268b7a31","slug":"ayush-mela-organised-in-pilibhit","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयुष मेले में मरीजों की उमड़ी भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आयुष मेले में मरीजों की उमड़ी भीड़
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Thu, 01 Feb 2018 07:41 PM IST
विज्ञापन
ayush mela
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय व चिकित्सालय के तत्वावधान में बृहस्पतिवार से आयुष मेले की शुरूआत हो गई। दो दिवसीय मेले का शुभारंभ राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्म सिंह सैनी ने किया। उन्होंने मेले में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का भी निरीक्षण कर आयुर्वेद विधा को जनजन तक पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने आयुर्वेदिक महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए हास्टल बनवाने की घोषणा की।
राज्यमंत्री बृहस्पतिवार को आयुर्वेदिक महाविद्यालय में भगवान धनवंतरि के चित्र के समक्ष दीप जलाकर व फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूर्व में आयुष विधा अनदेखी के चलते पिछड़ती जा रही थी। औषधियों में मिक्सिंग के चलते दवाइयों का सही प्रभाव नहीं हो रहा था। कुल मिलाकर इस विभाग को ही खत्म करने की योजना बनाई जाने लगी थी, लेकिन वर्ष 2104 में केंद्र में बनी भाजपा सरकार ने इस विधा का पुनर्जीवित करने का काम किया। यही वजह है कि आज आयुष विधा का देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इस पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस डॉक्टर गांव की ओर नहीं जाना चाहते, लेकिन आयुर्वेदिक कॉलेजों से निकले चिकित्सकों के सेवाओं की शुरूआत ही गांवों से होती है। इस विधा के प्रचार प्रसार की जरूरत है। इसके लिए सार्वजिक स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, बस अड्डों आदि पर कैंप लगाए जाएं और मरीजों का परीक्षण करने के साथ साथ इसका प्रचार प्रसार करें ताकि लोगों को सस्ता और बेहतर इलाज मिल सके।
राज्यमंत्री ने महाविद्यालय प्रशासन की मांग पर हॉस्टल बनवाने व पीएचडी की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। कार्यक्रम में निदेशक आयुर्वेद डॉ. आरआर चौधरी, रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश वर्मा, सदर विधायक संजय सिंह गंगवार, डीएम शीतल वर्मा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रकाश चंद सक्सेना ने भी विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन
राज्यमंत्री ने स्टालों का किया निरीक्षण
राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी ने मेले में लगे पंचकर्म, स्वस्थ वृत, संहिता संस्कृत एवं सिद्धांत, रोग एवं विकृति विज्ञान, काय चिकित्सा, प्रसूति एवं स्त्री रोग, क्रिया शरीर विभाग, शल्य, काय चिकित्सा समेत 14 विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागों द्वारा मरीजों की दी जा रही सुविधाओं आदि के बारे में जानकारी हासिल की।
विजेता प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत
कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री ने पूर्व में हुई प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया। इसमें बैडमिंटन सिंगल्स में सागरिका चौधरी, बैडमिंटन डबल्स में सागरिका चौधरी व दिव्या गुप्ता, चैस में नंदिनी आनंद आदि द्वारा प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें स्मृति चिह्न व प्रमाणपत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
पहले दिन 900 मरीजों का हुआ परीक्षण
आयुष मेले में बृहस्पतिवार सुबह से मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। मरीजों की सुविधा के लिए पूछताछ काउंटर बनाए गए। वहीं मरीजों की खून आदि की जांच के लिए भी अलग से व्यवस्था की गई। मेले में पहले दिन शाम पांच बजे तक डॉक्टरों की टीमों द्वारा मरीजों का परीक्षण किया गया। प्राचार्य डॉ. प्रकाश चंद सक्सेना ने बताया कि आयुष मेले में पहले 900 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें दवा दी गई है।
इनकी रही मौजूदगी
एसपी कलानिधि नैथानी, सीएमओ डॉ. ओपी सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी मीरा वर्मा, डॉ. एचएस मिश्रा, डॉ. गुरमीत राम, डॉ. पीके चौधरी, प्रो.केएन यादव, डॉ. आरबी यादव, शंभूनाथ चतुर्वेदी समेत कई चिकित्सक व विद्यार्थी मौजूद रहे।
विज्ञापन
राज्यमंत्री बृहस्पतिवार को आयुर्वेदिक महाविद्यालय में भगवान धनवंतरि के चित्र के समक्ष दीप जलाकर व फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूर्व में आयुष विधा अनदेखी के चलते पिछड़ती जा रही थी। औषधियों में मिक्सिंग के चलते दवाइयों का सही प्रभाव नहीं हो रहा था। कुल मिलाकर इस विभाग को ही खत्म करने की योजना बनाई जाने लगी थी, लेकिन वर्ष 2104 में केंद्र में बनी भाजपा सरकार ने इस विधा का पुनर्जीवित करने का काम किया। यही वजह है कि आज आयुष विधा का देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इस पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस डॉक्टर गांव की ओर नहीं जाना चाहते, लेकिन आयुर्वेदिक कॉलेजों से निकले चिकित्सकों के सेवाओं की शुरूआत ही गांवों से होती है। इस विधा के प्रचार प्रसार की जरूरत है। इसके लिए सार्वजिक स्थानों जैसे रेलवे स्टेशन, बस अड्डों आदि पर कैंप लगाए जाएं और मरीजों का परीक्षण करने के साथ साथ इसका प्रचार प्रसार करें ताकि लोगों को सस्ता और बेहतर इलाज मिल सके।
विज्ञापन
राज्यमंत्री ने महाविद्यालय प्रशासन की मांग पर हॉस्टल बनवाने व पीएचडी की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। कार्यक्रम में निदेशक आयुर्वेद डॉ. आरआर चौधरी, रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश वर्मा, सदर विधायक संजय सिंह गंगवार, डीएम शीतल वर्मा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रकाश चंद सक्सेना ने भी विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन
राज्यमंत्री ने स्टालों का किया निरीक्षण
राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी ने मेले में लगे पंचकर्म, स्वस्थ वृत, संहिता संस्कृत एवं सिद्धांत, रोग एवं विकृति विज्ञान, काय चिकित्सा, प्रसूति एवं स्त्री रोग, क्रिया शरीर विभाग, शल्य, काय चिकित्सा समेत 14 विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया। उन्होंने विभागों द्वारा मरीजों की दी जा रही सुविधाओं आदि के बारे में जानकारी हासिल की।
विजेता प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत
कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री ने पूर्व में हुई प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को भी पुरस्कृत किया। इसमें बैडमिंटन सिंगल्स में सागरिका चौधरी, बैडमिंटन डबल्स में सागरिका चौधरी व दिव्या गुप्ता, चैस में नंदिनी आनंद आदि द्वारा प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें स्मृति चिह्न व प्रमाणपत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
पहले दिन 900 मरीजों का हुआ परीक्षण
आयुष मेले में बृहस्पतिवार सुबह से मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। मरीजों की सुविधा के लिए पूछताछ काउंटर बनाए गए। वहीं मरीजों की खून आदि की जांच के लिए भी अलग से व्यवस्था की गई। मेले में पहले दिन शाम पांच बजे तक डॉक्टरों की टीमों द्वारा मरीजों का परीक्षण किया गया। प्राचार्य डॉ. प्रकाश चंद सक्सेना ने बताया कि आयुष मेले में पहले 900 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें दवा दी गई है।
इनकी रही मौजूदगी
एसपी कलानिधि नैथानी, सीएमओ डॉ. ओपी सिंह, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी मीरा वर्मा, डॉ. एचएस मिश्रा, डॉ. गुरमीत राम, डॉ. पीके चौधरी, प्रो.केएन यादव, डॉ. आरबी यादव, शंभूनाथ चतुर्वेदी समेत कई चिकित्सक व विद्यार्थी मौजूद रहे।